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‘कैसे खेलन जइबे सावन में सजनिया...’
नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 23 Jul 2014 10:20 AM IST
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‘कैसे खेलन जइबे सावन में सजनिया...’ कजरी पर लोकनृत्य की प्रस्तुति ने मंगलवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बैठे दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
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इससे पूर्व कथक की मनमोहक पेशकश ने लोगों का मनोरंजन किया। प्रस्तुतियां समर्पण संस्था की ओर से आयोजित ‘सारे रंग एक संग’ में हो रही थी।
प्रियंका सिंह के निर्देशन में कजरी, कथक के अलावा ठुमरी, तराना, सूफी और होली गीतों ने धमाल मचाया। शुरुआती प्रस्तुति में कृष्ण वंदना ‘भजे ब्रज’ पर कथक के बाद ठुमरी ‘मग रोको न रे सांवरिया...’, ‘तू माने या ना माने...’ पर कलाकारों ने समां बांध दिया।
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लोक नृत्य की कड़ी में घूमर पेश किय गया। ‘मारी घूमर नखराली रे....’ ने खूब तालियां बंटोरी। अंत में होली गीत ‘होलिया में उड़े रे गुलाल...’ पर नृत्य हुआ।
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मंच पर नृत्यांगनाओं में प्रियंका सिंह, अंकिता, आरती गुप्ता, श्रुति विश्वकर्मा, कीर्ति सिंह, मेघा, स्वाती विश्वकर्मा, मानसी रस्तोगी ने शानदार प्रस्तुतियां दी।
मंच से परे मनीष, सुशील, विनय, ओंकार, प्रवीन, राजकुमार, शैलेंद्र, अखिलेंद्र, विवेक, नागेंद्र, सौरभ, संजय, राकेश ने जिम्मेदारियां संभाली।