यूपी के बाढ़ राहत कैंपों में होगा खास इंतजाम, साफ-सफाई के साथ ही मिलेगी मनोरंजन की सुविधा
बाढ़ प्रभावित जिलों में इस बार राहत कैंपों में शरण लेने वालों को ‘अपनी सरकार’ का एहसास कराने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर कैंपों को इस तरह डिजाइन करने की योजना है कि वहां रहने वाले बूढ़े, बच्चे, महिला और जवान को लगे कि ये पहली सरकार है जो उन्हें लेकर इतनी संवेदनशील है।
प्रदेश में हर साल करीब 35 से 40 जिले बाढ़ की चपेट में आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़कर सरकारी कैंपों में शरण लेनी पड़ती है। कई निर्देशों के बावजूद राहत सामग्री में भ्रष्टाचार और अनदेखी के कारण सरकार की फजीहत होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली बार बाढ़ प्रभावित कई जिलों का जायजा लिया था। इस दौरान उन्हें कई जगहों पर शिकायतें मिली थीं।
इन सबसे सबक लेते हुए सरकार ने इस बार कैंपों के लिए सुसज्जित योजना बनाई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने ऐसी योजना तैयार की है, जिससे यहां रहने वाले व्यक्ति को राहत का एहसास होगा। ऐसे में लोकसभा चुनाव के पहले यदि बाढ़ प्रबंधन जमीन पर उतर सका तो आम लोगों के साथ सरकार को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
राहत कैंपों में ये मिलेंगी सुविधाएं
- साफ बिस्तर, तकिया, चादर, चारपाई और पंखे की व्यवस्था।
- साफ पानी के लिए वाटर एटीएम, कैन, क्लोरीनेटेड वाटर टैंकर।
- 24 घंटे बिजली, जनरेटर, सोलर लालटेन का भी प्रबंध।
- अलग से होगा मनोरंजन कक्ष, टीवी, रेडियो व अखबार की व्यवस्था।
- दो बार ताजा खाना मिलेगा, केला, दूध, बिस्किट और सत्तू भी मिलेगा।
- महिलाओं की विशेष सुरक्षा के लिए महिला होमगार्ड या पीआरडी की ड्यूटी।
- महिला कर्मी महिला शरणार्थियों को देंगी सेनेटरी नैपकिन।
- महिलाओं व पुरुषों के लिए होंगे अलग-अलग शौचालय व स्नानघर ।
- मेडिकल कैंप में बच्चों, गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की व्यवस्था।
- आवश्यक दवाओं के साथ, 108 व 102 एंबुलेंस भी रहेगी तैयार।
- नियिमत रूप से कीटनाशक व चूने का होगा छिड़काव।
- सर्पदंश जैसी घटनाओं को रोकने के होंगे आवश्यक प्रबंध ।
- प्रत्येक व्यक्ति का नाम, पता, फोन नंबर व निवास का ब्यौरा होगा दर्ज।
- एसडीएम होंगे कैंप प्रभारी, नोडल अधिकारी होंगे नायब तहसीलदार।
इस तरह होगा व्यवस्था का क्रियान्वयन
- प्रत्येक कैंप के लिए खाद्य व्यवस्था, मेडिकल, सुरक्षा, पेयजल, सैनिटेशन, पशु व्यवस्था, प्रकाश के लिए अलग-अलग होंगे नोडल अधिकारी।
- प्रत्येक अधिकारी का नाम व मोबाइल नंबर कैंप के बाहर फ्लेक्सी बोर्ड/वाल राइटिंग कर दर्ज किया जाएगा।
- राहत कैंपों में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम (माइक आदि) की रहेगी व्यवस्था।
- ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को शरणार्थियों से मधुर व्यवहार अपनाने के निर्देश।
- एक नोडल अधिकारी राहत कैंप की नियमित करेगा मीडिया ब्रीफिंग।
- बाढ़ आपदा से निपटने के लिए मोटर बोट व नाव की होगी व्यवस्था।
पशु कैंप की अलग से होगी व्यवस्था
बाढ़ से प्रभावित पशुओं के लिए अलग से पशु कैंप की व्यवस्था होगी। यहां पशुओं के लिए चारा, साफ पानी, टीकाकरण का प्रबंध रहेगा। इन कैंपों की प्रतिदिन साफ-सफाई होगी और डॉक्टर की पालीवार ड्यूटी लगाई जाएगी।