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UP: भाजपा-रालोद को रास आता रहा है गठबंधन; 1977 में चौधरी चरण सिंह और अटल बिहारी की दोस्ती से शुरू हुआ था सफर
Sat, 10 Feb 2024 12:53 PM IST
शाहरुख खान
अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Feb 2024 12:53 PM IST
सार
भाजपा और रालोद को गठबंधन रास आता रहा है। 1977 में चौधरी चरण सिंह और अटल बिहारी की दोस्ती से सफर शुरू हुआ था। 2014 लोकसभा चुनाव में दूरियां बढ़ गई थी। अब दोनों पावर सेंटर में दखल होगा।
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bjp-rld alliance
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिमी उप्र की सियायत में गहरा दखल रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल की भाजपा से दोस्ती करीब पांच दशक पुरानी है। जनता दल में अटल बिहारी वाजपेयी और चौधरी चरण सिंह की दोस्ती से शुरू हुआ यह सफर तीसरी पीढ़ी में नए रिश्तों की इबारत लिखने की राह पर है।
भाजपा और कांग्रेस के साथ केंद्र और यूपी में तीन बार सत्ता में दखल रख चुकी रालोद अब दोनों पावर सेंटर्स पर अपना दमखम दिखाएगी। जानकारों के मुताबिक वर्ष 1977 में जनता दल का हिस्सा रहे अटल बिहारी वाजपेयी और चौधरी चरण सिंह की मित्रता लंबे वक्त तक चली।
अगले दो दशकों में सियासत बदली और चरण सिंह के बेटे चौधरी अजित सिंह वीपी सिंह सरकार और नरसिम्हाराव की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। अजित सिंह ने वर्ष 1999 में रालोद बनाई, जिसके बाद भाजपा के साथ मिलकर कई बार चुनाव लड़ा। वह अटल सरकार में कृषि मंत्री बने।
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वर्ष 2003 में सपा का दामन थामा, जिसके बाद मुलायम सरकार में छह मंत्री पद मिले। हालांकि 2004 में सपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़कर तीन सीटें तो जीतीं, लेकिन केंद्र सरकार में शामिल नहीं हो सके।
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भाजपा और कांग्रेस के साथ केंद्र और यूपी में तीन बार सत्ता में दखल रख चुकी रालोद अब दोनों पावर सेंटर्स पर अपना दमखम दिखाएगी। जानकारों के मुताबिक वर्ष 1977 में जनता दल का हिस्सा रहे अटल बिहारी वाजपेयी और चौधरी चरण सिंह की मित्रता लंबे वक्त तक चली।
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अगले दो दशकों में सियासत बदली और चरण सिंह के बेटे चौधरी अजित सिंह वीपी सिंह सरकार और नरसिम्हाराव की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। अजित सिंह ने वर्ष 1999 में रालोद बनाई, जिसके बाद भाजपा के साथ मिलकर कई बार चुनाव लड़ा। वह अटल सरकार में कृषि मंत्री बने।
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वर्ष 2003 में सपा का दामन थामा, जिसके बाद मुलायम सरकार में छह मंत्री पद मिले। हालांकि 2004 में सपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़कर तीन सीटें तो जीतीं, लेकिन केंद्र सरकार में शामिल नहीं हो सके।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन से चुनाव लड़े। लेकिन, तरकरीब ढाई साल बाद चौधरी अजित सिंह ने यूपीए का हिस्सा बनने का फैसला कर लिया।
वह केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बने। वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद रालोद अलग-थलग पड़ गया। वर्ष 2017 में उसने अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा, हालांकि केवल एक सीट पर ही जीत हासिल हुई। इसके बाद 2022 में सपा के साथ गठबंधन में लड़े गए चुनाव में रालोद के नौ विधायक बने।
रालोद का सफर
- 1999 में भाजपा के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा, 2 सीटें जीतीं
- 2002 में भाजपा से गठबंधन कर रालोद के 14 विधायक जीते
- 2003 में सपा से गठबंधन किया, मुलायम सरकार में छह मंंत्री बने
- 2004 का लोकसभा चुनाव सपा के साथ लड़ा, तीन सीटें जीतीं
- 2007 में यूपी में अकेले लड़े, 10 सीटों पर जीत हुई हासिल
- 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ आने पर 5 सांसद बने
- 2011 में यूपीए में शामिल हुए, अजित सिंह केंद्रीय मंत्री बने
- 2012 में कांग्रेस के साथ यूपी में चुनाव लड़ा, नौ सीटें मिलीं
- 2014 में यूपीए में रहे, कोई लोकसभा सीट नहीं कर सके फतह
- 2017 में अकेले लड़ने का फैसला, केवल एक विधायक ही बना
- 2019 के लोकसभा में चुनाव में कांग्रेस और सपा के साथ लड़े, कोई सीट नहीं मिली।
- 2022 में सपा के साथ आजमाया भाग्य, नौ विधायक जीते
- 2002 में भाजपा से गठबंधन कर रालोद के 14 विधायक जीते
- 2003 में सपा से गठबंधन किया, मुलायम सरकार में छह मंंत्री बने
- 2004 का लोकसभा चुनाव सपा के साथ लड़ा, तीन सीटें जीतीं
- 2007 में यूपी में अकेले लड़े, 10 सीटों पर जीत हुई हासिल
- 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ आने पर 5 सांसद बने
- 2011 में यूपीए में शामिल हुए, अजित सिंह केंद्रीय मंत्री बने
- 2012 में कांग्रेस के साथ यूपी में चुनाव लड़ा, नौ सीटें मिलीं
- 2014 में यूपीए में रहे, कोई लोकसभा सीट नहीं कर सके फतह
- 2017 में अकेले लड़ने का फैसला, केवल एक विधायक ही बना
- 2019 के लोकसभा में चुनाव में कांग्रेस और सपा के साथ लड़े, कोई सीट नहीं मिली।
- 2022 में सपा के साथ आजमाया भाग्य, नौ विधायक जीते