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प्लॉट के नाम पर 50 करोड़ की ठगी कर चुके पांच शातिर ठग गिरफ्तार
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लखनऊ। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर क्वेडा एक्सप्रेस सिटी के नाम से जमीन बेचने का फर्जी कारोबार करने वाले पांच जालसाजों को विभूतिखंड पुलिस ने शुक्रवार को दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह द्वारा 200 लोगों से 50 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 6 आरोपियों की तलाश की जा रही है।
एडीसीपी पूर्वी एसएम कासिम आब्दी के मुताबिक, रायरबेली निवासी प्रदीप कुमार ने बुधवार को विभूतिखंड थाने में केस दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखकर क्वेडा एक्सप्रेस सिटी नामक साइट पर प्लॉट के नाम पर दो लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये का चेक कंपनी के कर्मचारियों को दिया था। इसके बाद प्रदीप ने कंपनी के लोगों से प्लॉटिंग की साइट का नक्शा और अन्य जानकारी मांगी तो वे जमीन की 75 प्रतिशत कीमत जमा करने के लिए दबाव बनाने लगे।
शक होने पर प्रदीप ने जांच में पाया कि कंपनी जमीन के नाम पर कई लोगों से ठगी कर चुकी है। इस पर पीड़ित ने अपने रुपये वापस मांगे तो कंपनी के लोगों ने उसके साथ अभद्रता की। प्रदीप की तहरीर पर कंपनी के निदेशक रेखचंद्र मौर्या, रमा यादव, अनिल यादव, मीनाक्षी तिवारी व पूनम तिवारी, आनंद मोर्या, रजनीश मौर्या, अरूणेश प्रताप सिंह पर केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने शुक्रवार को रजनीश मौर्या, आनंद मौर्या, बृजेश कुमार यादव, संजय कुमार सिंह और संतोष पटेल को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के पास से चार लैपटॉप, जमीन के दस्तावेज, तीन लग्जरी कार, 18 रबर मोहर, स्वेप मशीन, एटीएम कार्ड सहित कई दस्तावेज मिले हैं। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर जांच कर रही है।
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मास्टरमाइंड सहित छह की तलाश
एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक के मुताबिक, इस कंपनी के तीन डायरेक्टर व मास्टरमाइंड सहित छह लोग फरार है। इसमें रेखचंद्र मौर्या, रमा यादव और अनिल यादव मास्टरमाइंड हैं। अरुणेश प्रताप सिंह, मीनाक्षी तिवारी व पूनम तिवारी भी शामिल हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। जांच में पता चला है कि जालसाजों ने करीब 200 लोगों से 50 करोड़ से अधिक की रकम जमीन और निवेश के नाम पर ठगी है।
आठ कंपनियां बनाकर करते थे ठगी
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक, इन जालसाजों ने दो साल पहले कंपनी बनाई जिसका कार्यालय विनम्रखंड में खोला। दो साल में ही आठ कंपनियां बनाकर ठगी करने लगे। दस्तावेजों के आधार पता चला कि जालसाजों ने क्वेडा एक्सप्रेस प्राइवेट लि., क्वेडा ग्रोथ मल्टीट्रेड प्रा. लि., क्वेडा विजनेस साल्यूशन प्रा. लि., क्वेडा ग्रीन सिटी, क्वेडा डेवलपर्स, केडी जिओ इंश्योरेंस वेब एग्रीमेंट प्रा. लि., केडीएल मेट्रो सिटी डेवलपर्स प्रा. लि. और रियल टाइम कॉटेन नाम से कंपनियां बनाईं।
छह बैंक खातों में 50 करोड़ के लेनदेन
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, शुरूआती जांच में सामने आया कि इन जालसाजों ने छह बैंकों में खाता खोल रखा था जिसका रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि दो साल के अंदर इन ठगों ने इन खातों के जरिये 50 करोड़ रुपये का लेनदेन किया है। अब जालसाजों ने किसी खातें में दो लाख तो किसी में डेढ़ लाख रुपये का ही बैलेंस छोड़ा है। पुलिस इन ठगों के कुछ और बैंक खातों के बारे में पता कर रही है जिसमें करोडों के लेनदेन हुए हैं।
एक पर एक प्लॉट फ्री और कैश बैक का दिया था लालच
लखनऊ। पुलिस के अनुसार, जालसाजों की किसी कंपनी का रेरा में पंजीकरण नहीं था। यह कंपनी टाउनशिप बनाने के नाम पर ठगी कर रही थी। जालसाजों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक प्लॉट पर एक प्लॉट फ्री और कैश बैक का ऑफर भी दिया था जिसके झांसे में आकर लोगों ने करोड़ों रुपये निवेश किए। पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम दो से चार गुना तक बढ़ने की उम्मीद है जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, इस कंपनी में मिले दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि निवेश करने वालों में प्रशासनिक अधिकारी, नेता, बड़े व्यापारी, ठेकेदार, पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ठगी के शिकार लोगों की संख्या 400 से अधिक हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद ठगी की रकम 100 करोड़ से अधिक हो सकती है।
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक पकड़े गये जालसाजों के पास से मिले कई दस्तावेजों की जांच की गई। इस दौरान पता चला कि किसी भी कंपनी का रजिस्ट्रेशन रेरा में नहीं कराया गया है। जबकि यह कंपनी बड़े टाउनशिप बनाने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर रही थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के पास कंपनी ने कुछ किसानों से जमीन एग्रीमेंट कराने की पुष्टि हुई है। लेकिन कंपनी सैकड़ों एकड़ में टाउनशिप बनाने का प्रचार प्रसार किया। इसके हैंडविल व ब्रोसर बंटवाये। सोशल मीडिया पर भी कंपनी ने कई लुभावने झांसे दिये। जब भी कोई ग्राहक जमीन के लिए इनकेपास जाता था। उसे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे केआसपास खाली मैदानों की जमीनों को दिखाकर अपना बताते। फिर उसी पर टाउनशिप डवलप करने की बात कहते।
एक के दाम में दो प्लॉट देने का झांसा
एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक के मुताबिक कंपनी ने ठगी के लिए कई योजनाएं लॉन्च की थी। इसमें ग्राहक को इस बात का लालच दिया जाता था। एक प्लॉट की बुकिंग करने उसके तय समय पर कीमत अदा करने पर उतने ही वर्गफुट का दूसरा प्लॉट ग्राहक की मनमर्जी के मुताबिक दिया जाएगा। इसके अलावा जमीन बुक कराने के कुछ दिनों तक एक तय सीमा के रुपये जमा करने पर रूपये की वापसी की गारंटी भी देते थे। कैशबैक योजना के तहत कुछ ग्राहकों का रुपये भी वापस किया। ताकि लोगों को भरोसा हो सके। लेकिन किसी को दो साल के अंदर जमीन नहीं दी है।
400 से अधिक लोगों से ठगी की उम्मीद
पुलिस के मुताबिक दबिश के दौरान जालसाजों के कार्यालय से कई रजिस्टर मिले हैं। जिसमें सैकड़ों नाम लिखे। यह रजिस्टर कई तरह केहैं। एक उन लोगों के हैं जो जमीन देखने गये थे लेकिन बुकिंग नहीं कराई। एक पर बुकिंग की पहली किस्त से तीन किस्तों तक के लोगों के नाम हैं। वही कुछ रजिस्टर पर ऐसे नाम मिले हैं। जिन्होंने उनकी योजनाओं में 10 लाख रुपये से अधिक का निवेश किया है। पुलिस ऐसे सभी लोगों के डिटेल जुटा रही है। सभी पीड़ितों से बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। पुलिस के मुताबिक शुरूआती जांच में मिले नामों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या 400 से अधिक है। जांच पूरी होने के बाद ठगी रकम 100 करोड़ से अधिक हो सकती है।
कई अधिकारियों ने भी किये निवेश
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एडीसीपी पूर्वी एसएम कासिम आब्दी के मुताबिक, रायरबेली निवासी प्रदीप कुमार ने बुधवार को विभूतिखंड थाने में केस दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखकर क्वेडा एक्सप्रेस सिटी नामक साइट पर प्लॉट के नाम पर दो लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये का चेक कंपनी के कर्मचारियों को दिया था। इसके बाद प्रदीप ने कंपनी के लोगों से प्लॉटिंग की साइट का नक्शा और अन्य जानकारी मांगी तो वे जमीन की 75 प्रतिशत कीमत जमा करने के लिए दबाव बनाने लगे।
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शक होने पर प्रदीप ने जांच में पाया कि कंपनी जमीन के नाम पर कई लोगों से ठगी कर चुकी है। इस पर पीड़ित ने अपने रुपये वापस मांगे तो कंपनी के लोगों ने उसके साथ अभद्रता की। प्रदीप की तहरीर पर कंपनी के निदेशक रेखचंद्र मौर्या, रमा यादव, अनिल यादव, मीनाक्षी तिवारी व पूनम तिवारी, आनंद मोर्या, रजनीश मौर्या, अरूणेश प्रताप सिंह पर केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने शुक्रवार को रजनीश मौर्या, आनंद मौर्या, बृजेश कुमार यादव, संजय कुमार सिंह और संतोष पटेल को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के पास से चार लैपटॉप, जमीन के दस्तावेज, तीन लग्जरी कार, 18 रबर मोहर, स्वेप मशीन, एटीएम कार्ड सहित कई दस्तावेज मिले हैं। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर जांच कर रही है।
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मास्टरमाइंड सहित छह की तलाश
एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक के मुताबिक, इस कंपनी के तीन डायरेक्टर व मास्टरमाइंड सहित छह लोग फरार है। इसमें रेखचंद्र मौर्या, रमा यादव और अनिल यादव मास्टरमाइंड हैं। अरुणेश प्रताप सिंह, मीनाक्षी तिवारी व पूनम तिवारी भी शामिल हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। जांच में पता चला है कि जालसाजों ने करीब 200 लोगों से 50 करोड़ से अधिक की रकम जमीन और निवेश के नाम पर ठगी है।
आठ कंपनियां बनाकर करते थे ठगी
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक, इन जालसाजों ने दो साल पहले कंपनी बनाई जिसका कार्यालय विनम्रखंड में खोला। दो साल में ही आठ कंपनियां बनाकर ठगी करने लगे। दस्तावेजों के आधार पता चला कि जालसाजों ने क्वेडा एक्सप्रेस प्राइवेट लि., क्वेडा ग्रोथ मल्टीट्रेड प्रा. लि., क्वेडा विजनेस साल्यूशन प्रा. लि., क्वेडा ग्रीन सिटी, क्वेडा डेवलपर्स, केडी जिओ इंश्योरेंस वेब एग्रीमेंट प्रा. लि., केडीएल मेट्रो सिटी डेवलपर्स प्रा. लि. और रियल टाइम कॉटेन नाम से कंपनियां बनाईं।
छह बैंक खातों में 50 करोड़ के लेनदेन
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, शुरूआती जांच में सामने आया कि इन जालसाजों ने छह बैंकों में खाता खोल रखा था जिसका रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि दो साल के अंदर इन ठगों ने इन खातों के जरिये 50 करोड़ रुपये का लेनदेन किया है। अब जालसाजों ने किसी खातें में दो लाख तो किसी में डेढ़ लाख रुपये का ही बैलेंस छोड़ा है। पुलिस इन ठगों के कुछ और बैंक खातों के बारे में पता कर रही है जिसमें करोडों के लेनदेन हुए हैं।
एक पर एक प्लॉट फ्री और कैश बैक का दिया था लालच
लखनऊ। पुलिस के अनुसार, जालसाजों की किसी कंपनी का रेरा में पंजीकरण नहीं था। यह कंपनी टाउनशिप बनाने के नाम पर ठगी कर रही थी। जालसाजों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक प्लॉट पर एक प्लॉट फ्री और कैश बैक का ऑफर भी दिया था जिसके झांसे में आकर लोगों ने करोड़ों रुपये निवेश किए। पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम दो से चार गुना तक बढ़ने की उम्मीद है जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, इस कंपनी में मिले दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि निवेश करने वालों में प्रशासनिक अधिकारी, नेता, बड़े व्यापारी, ठेकेदार, पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ठगी के शिकार लोगों की संख्या 400 से अधिक हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद ठगी की रकम 100 करोड़ से अधिक हो सकती है।
प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक पकड़े गये जालसाजों के पास से मिले कई दस्तावेजों की जांच की गई। इस दौरान पता चला कि किसी भी कंपनी का रजिस्ट्रेशन रेरा में नहीं कराया गया है। जबकि यह कंपनी बड़े टाउनशिप बनाने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर रही थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के पास कंपनी ने कुछ किसानों से जमीन एग्रीमेंट कराने की पुष्टि हुई है। लेकिन कंपनी सैकड़ों एकड़ में टाउनशिप बनाने का प्रचार प्रसार किया। इसके हैंडविल व ब्रोसर बंटवाये। सोशल मीडिया पर भी कंपनी ने कई लुभावने झांसे दिये। जब भी कोई ग्राहक जमीन के लिए इनकेपास जाता था। उसे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे केआसपास खाली मैदानों की जमीनों को दिखाकर अपना बताते। फिर उसी पर टाउनशिप डवलप करने की बात कहते।
एक के दाम में दो प्लॉट देने का झांसा
एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक के मुताबिक कंपनी ने ठगी के लिए कई योजनाएं लॉन्च की थी। इसमें ग्राहक को इस बात का लालच दिया जाता था। एक प्लॉट की बुकिंग करने उसके तय समय पर कीमत अदा करने पर उतने ही वर्गफुट का दूसरा प्लॉट ग्राहक की मनमर्जी के मुताबिक दिया जाएगा। इसके अलावा जमीन बुक कराने के कुछ दिनों तक एक तय सीमा के रुपये जमा करने पर रूपये की वापसी की गारंटी भी देते थे। कैशबैक योजना के तहत कुछ ग्राहकों का रुपये भी वापस किया। ताकि लोगों को भरोसा हो सके। लेकिन किसी को दो साल के अंदर जमीन नहीं दी है।
400 से अधिक लोगों से ठगी की उम्मीद
पुलिस के मुताबिक दबिश के दौरान जालसाजों के कार्यालय से कई रजिस्टर मिले हैं। जिसमें सैकड़ों नाम लिखे। यह रजिस्टर कई तरह केहैं। एक उन लोगों के हैं जो जमीन देखने गये थे लेकिन बुकिंग नहीं कराई। एक पर बुकिंग की पहली किस्त से तीन किस्तों तक के लोगों के नाम हैं। वही कुछ रजिस्टर पर ऐसे नाम मिले हैं। जिन्होंने उनकी योजनाओं में 10 लाख रुपये से अधिक का निवेश किया है। पुलिस ऐसे सभी लोगों के डिटेल जुटा रही है। सभी पीड़ितों से बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। पुलिस के मुताबिक शुरूआती जांच में मिले नामों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या 400 से अधिक है। जांच पूरी होने के बाद ठगी रकम 100 करोड़ से अधिक हो सकती है।
कई अधिकारियों ने भी किये निवेश