आजादी के 68 साल बाद पहला प्रधान चुनेगा गांव
आजादी के 68 साल बाद पचपेड़वा ब्लॉक के वन ग्राम बड़का भुकुरवा के लोग पहली बार अपनी सरकार चुनेंगे। पहली बार राजस्व ग्राम पंचायत का दर्जा पाने वाले इस गांव का प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
तीन मजरों वाली इस ग्राम पंचायत के लोगों में शनिवार को होने वाले मतदान के लिए गांव के लोगों में भारी उत्साह है। थारु जनजाति बाहुल्य वाले ग्राम बड़का भुकुरवा, छोटका भुकुरवा व कंचनपुर को मिलाकर बड़का भुकुरवा के नाम से राजस्व ग्राम पंचायत का गठन किया गया है।
पहली बार यहां होने वाले पंचायत चुनाव में बड़का भुकुरवा प्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है। तीनों मजरों में कुल मतदाताओं की संख्या 680 है।
यहां से प्रधान पद के लिए बड़का भुकुरवा से प्रेमलता तथा रातरानी व कंचनपुर से रेशमा तथा मीना चुनाव मैदान में है। प्रेमलता ने स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण की है।
नहीं पहुंच सकी है विकास की किरण
वन ग्राम होने के कारण इन गांवों में आज तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। तीन मजरों में एक भी पक्का मकान नहीं है। गांव के लोग फूस के घरों में किसी तरह गुजर-बसर करते हैं। गांव में प्रसाधन कक्ष और शुद्ध पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद हम लोगों में पहली बार विकास की उम्मीद जगी है।
पंचायत का गठन होने के बाद गांव में इंदिरा आवास, इंडिया मार्का हैंडपंप, विद्युतीकरण, प्रसाधन कक्ष, नाली तथा सड़क आदि के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
शुक्रवार को गांव में पंचायत चुनाव को लेकर लोग काफी उत्साहित दिखे। जगह-जगह बैठकर लोग अपने प्रतिनिधि के बारे में चर्चा में मशगूल रहे।