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Lucknow News: कोर्ट की सख्ती के बाद पहली कार्रवाई, बाकी पर मेहरबानी

Mon, 14 Jul 2025 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:06 AM IST
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First action after court's strictness, mercy on others
केस 1- केजीएमयू की पूर्व कुलपति डॉ. सरोज चूड़ामणि गोपाल के कार्यकाल में वर्ष 2008 से 2011 के बीच प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इसमें प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए 10 से ज्यादा डाॅक्टरों के वीडियो भी बनाए गए। इसके बावजूद एक भी डाॅक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
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केस 2- केजीएमयू के डाॅक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस के स्पष्ट साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई के बजाय सभी को संविदा नाैकरी का तोहफा दे दिया गया। ऐसा होने पर वे केजीएमयू में भी बने रहे और इसी के सहारे अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस भी चमकाते रहे। संविदा का आदेश एक साल का था, लेकिन कई डाॅक्टर 10 साल से ज्यादा समय तक जमे रहे।
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केस 3- वर्ष 2023 में केजीएमयू के एक विभागाध्यक्ष पर प्राइवेट प्रैक्टिस का आरोप लगा। जांच के बाद उन्हें चार्जशीट दी जा चुकी है। इसके बावजूद इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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लखनऊ। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पहली बार किसी डाॅक्टर को प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप में बर्खास्त किया गया। वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप साबित होने के बावजूद कई डाॅक्टर अब भी नाैकरी में जमे हुए हैं।
केजीएमयू में शनिवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में प्राइवेट प्रैक्टिस और कई अन्य आरोपों में सेवानिवृत्ति से महज तीन दिन पहले डॉ. आमोद कुमार सचान को बर्खास्त कर दिया गया। केजीएमयू प्रशासन के मुताबिक, हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश होने की वजह से इस मामले में 15 जुलाई से पहले कार्रवाई करनी जरूरी थी। वहीं, दूसरे मामलों को अब भी नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए क्यों जरूरी है केजीएमयू की नाैकरी
केजीएमयू एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां करीब साढ़े चार हजार बेड हैं। लखनऊ के साथ ही पूरे प्रदेश के मरीज यहां आते हैं। इसलिए किसी भी साधारण डाॅक्टर के मुकाबले यहां के डाॅक्टर के पास चर्चित होने के ज्यादा माैके होते हैं। इसी वजह से डाॅक्टर केजीएमयू की नाैकरी करते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करना चाहते हैं।
खुद कठघरे में हैं बर्खास्तगी का फैसला सुनाने वाले
केजीएमयू में शनिवार को बैठी कार्य परिषद में दो सदस्य ऐसे भी थे, जिनके खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होने के ठोस साक्ष्य मिले थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें से एक को उस समय चेतावनी देकर छोड़ दिया गया और दूसरे के खिलाफ ऐसा करने की भी जहमत नहीं उठाई गई।

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Iकेजीएमयू में प्राइवेट प्रैक्टिस न करने के लिए सभी से शपथ पत्र लिए गए हैं। जिन पर आरोप हैं, उन पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। किसी को संरक्षण नहीं दिया जा रहा है।I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI
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