पहले 10 पेड़ लगाएंगे तब एक काट पाएंगे, इन पेड़ों को काटने के लिए अनुमति लेना होगा अनिवार्य
प्रदेश कैबिनेट ने जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहयोगी नीम, पीपल, बरगद समेत 29 पेड़ों को काटने की अनुमति लेने की व्यवस्था फिर से लागू कर दी है।
पेड़ काटने की अनुमति के लिए आवेदन की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होगी। एक पेड़ काटने से पहले 10 पेड़ लगाने पड़ेंगे। साथ ही इन पेड़ों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।
प्रदेश सरकार ने अक्तूबर 2017 में अधिकतर पेड़ों को काटने की अनुमति लेने की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। अब उस अधिसूचना को निरस्त करते हुए 29 पेड़ों को काटने की अनुमति लेने की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
इसके तहत प्रतिबंधित श्रेणी के वृक्षों को काटने के लिए वृक्ष स्वामी को प्रत्येक काटे गए वृक्ष के स्थान पर कम से कम 10 वृक्ष लगाना और उनकी देखभाल करना होगा।
स्थान उपलब्ध नहीं तो जमा करनी होगी रोपण राशि
यदि पेड़ लगाने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं होगा तो उसे वन विभाग में पेड़ लगाने व देखभाल के लिए तय प्रतिपूर्ति रोपण राशि जमा करनी होगी। इस राशि से वन विभाग प्रतिपूर्ति पौधरोपण कराएगा। इससे वृक्षावरण बढ़ने के साथ संबंधित प्रजातियों के संरक्षण में मदद मिलेगी। वन निगम वृक्ष स्वामी की भूमि पर लगे वृक्षों के प्रमाणीकरण की सुविधा देगा।
अब लिखित अनुमति लेकर काटे जा सकेंगे ये पेड़
आम (देशी, तुकमी व कलमी), नीम, साल, महुआ, बीजा साल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम व सागौन।