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कटिया से झुग्गी बस्ती में आग, 24 छोटे सिलिंडर दगने से दहला इलाका
Mon, 15 Apr 2019 01:23 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Mon, 15 Apr 2019 01:23 AM IST
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बस्ती में लगी अाग
- फोटो : अमर उजाला
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ठाकुरगंज के मोहिनीपुरवा इलाके की दो साल पुरानी झुग्गी बस्ती में रविवार सुबह अचानक आग लग गई। इससे झोपड़ी में रखे रसोई गैस के 24 छोटे सिलिंडर तेज धमाके के साथ दगने लगे। इससे पूरा इलाका दहल गया। इसके चलते कुछ देर तक दमकलकर्मी भी आग बुझाना छोड़कर सिलिंडरों की तलाश में जुट गए।
चार घंटे की मशक्कत के बाद दमकल ने आग पर काबू पाया। हादसे का कारण पुलिस कटिया कनेक्शन बता रही है। अग्निकांड में 28 झोपड़ियों के साथ एक स्कूटी, बाइक व 20 साइकिलें राख हो गईं।
क्षेत्राधिकारी चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी के मुताबिक, मोहिनीपुरवा इलाके में दो सालों से छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के 25 मजदूरों का और बिहार के तीन मजदूरों का परिवार रहता है। सभी दिहाड़ी मजदूर हैं। रविवार सुबह मनोहर यादव की झोपड़ी में शॉर्ट सर्किट से चिन्गारी उठी और लपटें निकलने लगीं।
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मनोहर परिवार संग जान बचाकर बाहर भागा। चीखपुकार सुनकर पड़ोसी मदद को दौड़े, लेकिन तेज हवा के कारण आग ने 28 झोपड़ियों को चपेट में ले लिया। इस बीच सूचना पर दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। इसके बाद कई फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियों का आने का सिलसिला शुरू हुआ।
चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय प्रताप सिंह के मुताबिक, शुरूआती जांच में हादसे की वजह कटिया कनेक्शन ही लग रहा है। हालांकि जांच रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
इन मजदूरों की जली गृहस्थी
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक, मनोहर यादव, अशोक शाही, अयोध्या, शोभा साहू, हुलासी साहू, पारस, विष्णु, विजय साहू, दुर्गेश, पेखन, गंगाराम, फ गनू, चिंताराम साहू, कमलेश, अर्जुन, रामजी, नारद, किशन, शिव प्रसाद, लोकनाथ, सामारु, कलाहा, दिलहरन सहित कई अन्य लोगों की गृहस्थी का सामान राख हो गया।
मुआवजे की मांग पर हंगामा
झुग्गी बस्ती में छत्तीसगढ़ के मजदूरों के अलावा बिहार के भी कुछ लोग रहते थे। आरोप है कि आग बिल्डरों द्वारा साजिश के तहत लगाई गई है। ताकि वह यहां बहुमंजिली भवनों का निर्माण करा सकें। मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। मांग थी कि पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। चिंताराम के मुताबिक, शरीर पर पड़े कपड़े ही बचे हैं। बच्चों का भी समान राख हो गया। किशन ने बताया कि मजदूरी की कमाई आग की भेंट चढ़ गई।
हैंडपंप व बिजली का अवैध कनेक्शन
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मोहिनीपुरवा में जगदीश मौर्या व गिरीश मौर्या का खाली प्लॉट था। इसमें 28 झोपड़ियां बसाई गई थीं। मजदूरों से हर महीने 800 से 1000 रुपये किराया वसूला जाता है। हैंडपंप व बिजली का कनेक्शन अवैध तरीके से उपलब्ध कराया जाता है। कटिया कनेक्शन से ही आग लगी है। वहीं, हादसे की जानकारी होने पर ठाकुरगंज प्रभारी निरीक्षक दीनानाथ मिश्रा, एफएसओ चौक, एसडीएम अभिनव रंजन श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
12 परिवार गए थे छत्तीसगढ़
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त ज्यादातर परिवार के पुरुष मजदूरी करने गए थे। कुछ ही बचे थे। वहीं, 12 परिवार छत्तीसगढ़ गया था। वर्तमान में सिर्फ झुग्गी बस्ती में 16 परिवार ही मौजूद थे। 12 परिवारों के आने पर ही नुकसान का आंकलन किया जा सकेगा।
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चार घंटे की मशक्कत के बाद दमकल ने आग पर काबू पाया। हादसे का कारण पुलिस कटिया कनेक्शन बता रही है। अग्निकांड में 28 झोपड़ियों के साथ एक स्कूटी, बाइक व 20 साइकिलें राख हो गईं।
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क्षेत्राधिकारी चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी के मुताबिक, मोहिनीपुरवा इलाके में दो सालों से छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के 25 मजदूरों का और बिहार के तीन मजदूरों का परिवार रहता है। सभी दिहाड़ी मजदूर हैं। रविवार सुबह मनोहर यादव की झोपड़ी में शॉर्ट सर्किट से चिन्गारी उठी और लपटें निकलने लगीं।
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मनोहर परिवार संग जान बचाकर बाहर भागा। चीखपुकार सुनकर पड़ोसी मदद को दौड़े, लेकिन तेज हवा के कारण आग ने 28 झोपड़ियों को चपेट में ले लिया। इस बीच सूचना पर दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। इसके बाद कई फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियों का आने का सिलसिला शुरू हुआ।
चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय प्रताप सिंह के मुताबिक, शुरूआती जांच में हादसे की वजह कटिया कनेक्शन ही लग रहा है। हालांकि जांच रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
इन मजदूरों की जली गृहस्थी
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक, मनोहर यादव, अशोक शाही, अयोध्या, शोभा साहू, हुलासी साहू, पारस, विष्णु, विजय साहू, दुर्गेश, पेखन, गंगाराम, फ गनू, चिंताराम साहू, कमलेश, अर्जुन, रामजी, नारद, किशन, शिव प्रसाद, लोकनाथ, सामारु, कलाहा, दिलहरन सहित कई अन्य लोगों की गृहस्थी का सामान राख हो गया।
मुआवजे की मांग पर हंगामा
झुग्गी बस्ती में छत्तीसगढ़ के मजदूरों के अलावा बिहार के भी कुछ लोग रहते थे। आरोप है कि आग बिल्डरों द्वारा साजिश के तहत लगाई गई है। ताकि वह यहां बहुमंजिली भवनों का निर्माण करा सकें। मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। मांग थी कि पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। चिंताराम के मुताबिक, शरीर पर पड़े कपड़े ही बचे हैं। बच्चों का भी समान राख हो गया। किशन ने बताया कि मजदूरी की कमाई आग की भेंट चढ़ गई।
हैंडपंप व बिजली का अवैध कनेक्शन
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मोहिनीपुरवा में जगदीश मौर्या व गिरीश मौर्या का खाली प्लॉट था। इसमें 28 झोपड़ियां बसाई गई थीं। मजदूरों से हर महीने 800 से 1000 रुपये किराया वसूला जाता है। हैंडपंप व बिजली का कनेक्शन अवैध तरीके से उपलब्ध कराया जाता है। कटिया कनेक्शन से ही आग लगी है। वहीं, हादसे की जानकारी होने पर ठाकुरगंज प्रभारी निरीक्षक दीनानाथ मिश्रा, एफएसओ चौक, एसडीएम अभिनव रंजन श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
12 परिवार गए थे छत्तीसगढ़
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त ज्यादातर परिवार के पुरुष मजदूरी करने गए थे। कुछ ही बचे थे। वहीं, 12 परिवार छत्तीसगढ़ गया था। वर्तमान में सिर्फ झुग्गी बस्ती में 16 परिवार ही मौजूद थे। 12 परिवारों के आने पर ही नुकसान का आंकलन किया जा सकेगा।