बच्चों को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर, यूपी डीजीपी ने दिए निर्देश
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डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने पुलिस अफसरों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे माता पिता या संरक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें जो अपने बच्चों को लावारिस छोड़ देते हैं। उन्होंने थानों में बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने और तत्परता से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अफसरों को सर्कुलर भेजा है।
सर्कुलर में कहा गया है कि लावारिस बच्चों को संगठित गिरोह आपराधिक कृत्य के लिए, बाल श्रम या अंग प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस पर प्रभावी रोक जरूरी है। बच्चों को लावारिस छोड़ना अपराध है। ऐसे में बच्चों के मामलों में पुलिस को ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है।
डीजीपी ने कहा थानों पर बच्चों का बयान लेते समय सभी पहलुओं को शामिल करें और उनके बयान को अक्षरश: दर्ज करें। बच्चों का बयान लेते समय उपनिरीक्षक स्तर की पुलिस कर्मी सादे परिधान में ही रहेंगी। लावारिस बच्चों के मिलने पर धारा 317 के तहत एफआईआर भी दर्ज कर सकते हैं। ऐसे मामलों की निगरानी डीएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे। जांच अधिकारी पीड़ित बच्चे के साथ संवाद एवं प्रकरण में सहयोग के लिए मनोचिकित्सक व अनुभवी स्वैछिक संगठन से भी मदद ले सकते हैं।
नौ माह में रेलवे स्टेशनों पर मिले साढ़े तीन हजार लावारिस बच्चे
प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर लावारिस बच्चों के मिलने का सिलसिला जारी है। नौ माह में प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर 3477 बच्चे बरामद किए गए। इसमें से 1349 बच्चों के ही मां-बाप का पता चल सका। बाकी 2128 बच्चे आज भी चाइल्ड लाइन या एनजीओ के साथ रह रहे हैं।