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UP Election 2022: यूपी चुनाव में रिश्वत लेने व देने वालों पर होगी कार्रवाई, एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 29 Jan 2022 12:13 PM IST

सार

यूपी चुनाव में रिश्वत लने व देने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी विधानसभा चुनाव में रिश्वत देने ही नहीं लेने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। रिश्वत के लेनदेन में रिटर्निंग ऑफिसरों को वस्तुओं को जब्त कर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए इसकी एक प्रति व्यय प्रेक्षक को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं को प्रभावित करने वालों की निगरानी के लिए चुनाव आयोग की मशीनरी सक्रिय हो गई है। आयोग ने इसकी निगरानी का जिम्मा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग (सीजीएसटी) को सौंपा है।

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कानून-व्यवस्था तथा चुनाव खर्च की निगरानी के लिए पुलिस, आबकारी, आयकर तथा अन्य संबंधित विभागों की टीमों को सक्रिय किया गया है। अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रत्याशियों के खर्च की निगरानी शुरू हो जाएगी। एयरपोर्ट, सीमा शुल्क चौकियों, वाहनों व गोदामों आदि की जांच का जिम्मा सीजीएसटी को सौंपा गया है। शराब, नकदी, मुफ्त उपहार आदि बांटने की जांच के लिए सीजीएसटी की ओर से उड़न दस्तों का गठन किया गया है। इन दस्तों ने सड़क मार्ग पर संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू कर दी है।


चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली वस्तुओं जैसे शराब, नकदी, कपड़े, बर्तन आदि ले जाने वाले लोगों व वाहनों पर खास नजर रखी जा रही है। अब तक लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, शाहजहांपुर, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी तथा हरदोई आदि जिलों में 100 से ज्यादा गोदामों की जांच कराई गई है। साड़ी, रेडीमेड कपड़ों, इलेक्ट्रिकल तथा रसोई के सामान इत्यादि से संबंधित गोदामों की जांच पर खास जोर दिया जा रहा है।

धनबल व बाहुबल रोकने पर खास जोर

आयोग ने गांवों एवं मजरों तथा शहरी क्षेत्रों में कमजोर वर्ग बहुल क्षेत्रों में मतदाताओं को डराने-धमकाने वालों को चिह्नित करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की रणनीति बनाई है। शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ऐसे क्षेत्रों को पहले से चिह्नित किया जाएगा। चुनाव में धनबल व बाहुबल रोकने पर खास जोर है। इसके लिए पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक व्यय और आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित मामलों की पहचान के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर लेखा टीम व सहायक व्यय प्रेक्षक को रिपोर्ट भेजी जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में उड़न दस्तों के अलावा स्थानीय मशीनरी को राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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