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Lucknow News: रोहतास बिल्डर्स व आईडीबीआई बैंक के मैनेजर पर केस
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लखनऊ। रोहतास बिल्डर्स, वकील डी. सब्बरवाल, आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कर्मचारियों के खिलाफ विभूतिखंड थाने में जालसाजी, जाली दस्तावेज तैयार करने व साजिश रचने का केस दर्ज किया गया है।
आरोप है कि रोहतास बिल्डर्स के निदेशक पंकज रस्तोगी ने 38 लाख में प्रेसिडेंशियल टावर में फ्लैट दिया। कब्जे के बाद भी रजिस्ट्री में टालमटोल किया और वकील की मदद से फ्लैट को अपने भाई दीपक रस्तोगी के नाम पर कर दिया।
फिर एक फर्म के नाम पर आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कर्मचारियों से मिलकर लोन हासिल कर लिया। इस जालसाजी की जानकारी पीड़ित को सीबीआई का नोटिस आने के बाद हुई। कहीं सुनवाई न होने पर पीड़ित ने कोर्ट में गुहार लगाई थी।
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मूलरूप से प्रतापगढ़ निवासी अनिल प्रताप सिंह फ्लैट नंबर-1011 ब्लॉक-ए रोहतास प्रेसिडेंशियल टावर में रहते हैं। अनिल के मुताबिक, वर्ष 2006 में रोहतास कंपनी के प्रोजेक्ट प्रेसिडेंशियल टावर में फ्लैट बुक कराया था।
2010 में कंपनी ने आवंटन पत्र देते हुए वर्ष 2016 में कब्जा भी दे दिया। फ्लैट के लिए उन्होंने 38 लाख रुपए दिए थे। बैनामे में टालमटोल देख पीड़ित ने फरवरी 2018 में राज्य आयोग में वाद दायर किया।
जुलाई 2019 में फैसला उनके पक्ष में आया और कंपनी को बैनामा करने का आदेश दिया गया। इस बीच पीड़ित को पता चला कि रोहतास बिल्डर्स फ्लैट किसी दूसरे को बेचने की फिराक में है।
पीड़ित के मुताबिक, रोहतास बिल्डर्स के निदेशक पंकज रस्तोगी ने अपने वकील डी. सब्बरवाल को पावर ऑफ अटार्नी दे दी थी। इसके बाद फ्लैट का एग्रीमेंट अपने भाई दीपक रस्तोगी के नाम करा दिया।
फिर दीपक ने आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कर्मचारियों से मिलीभगत की। हाइड्रिक फर्म इनपुट्स लि. फर्म के दस्तावेज लगाकर फ्लैट को बैंक में गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का लोन ले लिया था।
सीबीआई का नोटिस आने पर हुआ खुलासा
अनिल के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को उनके पास सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा से नोटिस मिला। इसमें फर्म पर मुकदमे की बात लिखते हुए बयान के लिए बुलाया गया। पीड़ित ने सभी दस्तावेज दिखाते हुए बयान दर्ज कराया। आईडीबीआई ने डीएम के सामने फ्लैट पर कब्जा लेने के लिए वाद दायर किया। पीड़ित ने आपत्ति लगाई तो बैंक के कुछ अफसरों ने उसे धमकाया। कहीं सुनवाई न होने पर अनिल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फरमान होने पर विभूतिखंड पुलिस ने रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड, दीपक रस्तोगी, पंकज रस्तोगी, आईडीबीआई बैंक के कर्मचारी, तत्कालीन मैनेजर व वकील डी.सब्बरवाल के खिलाफ जाली दस्तावेज के आधार पर फर्जीवाड़े, अमानत में खयानत, आपराधिक साजिश व धमकी देने का केस दर्ज कर लिया गया है।
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आरोप है कि रोहतास बिल्डर्स के निदेशक पंकज रस्तोगी ने 38 लाख में प्रेसिडेंशियल टावर में फ्लैट दिया। कब्जे के बाद भी रजिस्ट्री में टालमटोल किया और वकील की मदद से फ्लैट को अपने भाई दीपक रस्तोगी के नाम पर कर दिया।
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फिर एक फर्म के नाम पर आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कर्मचारियों से मिलकर लोन हासिल कर लिया। इस जालसाजी की जानकारी पीड़ित को सीबीआई का नोटिस आने के बाद हुई। कहीं सुनवाई न होने पर पीड़ित ने कोर्ट में गुहार लगाई थी।
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मूलरूप से प्रतापगढ़ निवासी अनिल प्रताप सिंह फ्लैट नंबर-1011 ब्लॉक-ए रोहतास प्रेसिडेंशियल टावर में रहते हैं। अनिल के मुताबिक, वर्ष 2006 में रोहतास कंपनी के प्रोजेक्ट प्रेसिडेंशियल टावर में फ्लैट बुक कराया था।
2010 में कंपनी ने आवंटन पत्र देते हुए वर्ष 2016 में कब्जा भी दे दिया। फ्लैट के लिए उन्होंने 38 लाख रुपए दिए थे। बैनामे में टालमटोल देख पीड़ित ने फरवरी 2018 में राज्य आयोग में वाद दायर किया।
जुलाई 2019 में फैसला उनके पक्ष में आया और कंपनी को बैनामा करने का आदेश दिया गया। इस बीच पीड़ित को पता चला कि रोहतास बिल्डर्स फ्लैट किसी दूसरे को बेचने की फिराक में है।
पीड़ित के मुताबिक, रोहतास बिल्डर्स के निदेशक पंकज रस्तोगी ने अपने वकील डी. सब्बरवाल को पावर ऑफ अटार्नी दे दी थी। इसके बाद फ्लैट का एग्रीमेंट अपने भाई दीपक रस्तोगी के नाम करा दिया।
फिर दीपक ने आईडीबीआई बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कर्मचारियों से मिलीभगत की। हाइड्रिक फर्म इनपुट्स लि. फर्म के दस्तावेज लगाकर फ्लैट को बैंक में गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का लोन ले लिया था।
सीबीआई का नोटिस आने पर हुआ खुलासा
अनिल के मुताबिक, 4 अप्रैल 2022 को उनके पास सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा से नोटिस मिला। इसमें फर्म पर मुकदमे की बात लिखते हुए बयान के लिए बुलाया गया। पीड़ित ने सभी दस्तावेज दिखाते हुए बयान दर्ज कराया। आईडीबीआई ने डीएम के सामने फ्लैट पर कब्जा लेने के लिए वाद दायर किया। पीड़ित ने आपत्ति लगाई तो बैंक के कुछ अफसरों ने उसे धमकाया। कहीं सुनवाई न होने पर अनिल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फरमान होने पर विभूतिखंड पुलिस ने रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड, दीपक रस्तोगी, पंकज रस्तोगी, आईडीबीआई बैंक के कर्मचारी, तत्कालीन मैनेजर व वकील डी.सब्बरवाल के खिलाफ जाली दस्तावेज के आधार पर फर्जीवाड़े, अमानत में खयानत, आपराधिक साजिश व धमकी देने का केस दर्ज कर लिया गया है।