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ठगी के केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने पर इंस्पेक्टर और कंपनी के निदेशक पर केस

Fri, 28 Jun 2019 01:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 01:18 AM IST
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Fir against inspector
ठगी के केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने पर इंस्पेक्टर व शेयर कंपनी के निदेशक पर एफआईआर
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लखनऊ। वजीरगंज के पांडेयगंज गल्ला मंडी निवासी अधिवक्ता राजेश शुक्ला ने ठगी के केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने पर एसआईएस के इंस्पेक्टर भानू प्रताप सिंह और वेल्थ मंत्रा कंपनी के निदेशक संजीव अग्रवाल समेत पांच लोगों के खिलाफ फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज कराई है।
अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने वेल्थ मंत्रा कंपनी के निदेशक के कहने पर शेयर में 5.63 लाख रुपये लगाए थे। रुपया डूब गया तो उन्होंने हजरतगंज कोतवाली में निदेशक के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई।
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अधिवक्ता के कहने पर विवेचना एसआईएस ट्रांसफर की गई थी, जहां विवेचक भानू प्रताप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद अधिवक्ता ने इंस्पेक्टर और कंपनी के निदेशक तथा दो-तीन अज्ञात वकीलों पर मिलीभगत कर मामले को खत्म करने के आरोप में केस दर्ज कराया।
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इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि अधिवक्ता ने छह साल पहले वेल्थ मंत्रा कंपनी के निदेशक संजीव अग्रवाल के कहने पर एक कंपनी के शेयर खरीदे थे। संजीव का कहना था कि कंपनी बोनस देने वाली है इसलिए शेयर दोगुने हो जाएंगे।
अधिवक्ता ने 13 चेक के जरिए 563350 रुपये कंपनी को दिए। हालांकि, शेयर की कीमत कम हो गई जिससे उनकी रकम डूब गई। अधिवक्ता ने संजीव अग्रवाल पर रकम दोगुनी होने का झूठ बोलकर रुपया हड़पने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2014 में हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज कराया था।
अधिवक्ता का कहना है कि केस की विवेचना सही तरीके से नहीं हो रही थी। पुलिस ने विवेचना में कई बिंदुओं को नजरअंदाज किया जिस पर उन्होंने जुलाई 2016 में तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी से मिलकर विवेचना एसआईएस स्थानांतरित करा दी।
एसआईएस में इंस्पेक्टर भानू प्रताप सिंह को विवेचना सौंपी गई। अधिवक्ता ने केस के महत्वपूर्ण साक्ष्य उन्हें सौंपे। कुछ दिन बाद उन्होंने विवेचना के बारे में जानकारी के लिए इंस्पेक्टर को फोन कॉल की तो वह टालमटोल करने लगे।
बकौल अधिवक्ता, इंस्पेक्टर कोई न कोई बहाना बनाकर मिलने से बचते रहे। इस बीच कोर्ट में अपने मामले की फाइनल रिपोर्ट देखकर वह सन्न रह गए। उन्होंने विवेचक की तरफ से प्रस्तुत की गई फाइनल रिपोर्ट पढ़ी तो होश उड़ गए।
जो साक्ष्य उन्होंने इंस्पेक्टर को दिए थे, उसमें से एक भी विवेचना में शामिल नहीं किया गया था। अधिवक्ता का कहना है कि इंस्पेक्टर ने वेल्थ मंत्रा के निदेशक संजीव अग्रवाल और दो-तीन वकीलों के साथ मिलकर केस खत्म करने के उद्देश्य से फाइनल रिपोर्ट लगाई है।
दीवालिया है कंपनी, रद हो चुका है बीएसई-एनएसई का लाइसेंस
अधिवक्ता का कहना है कि वेल्थ मंत्रा कंपनी के खिलाफ लखनऊ के विभिन्न थानों में 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। रेरा, सेबी और सिविल में भी कई मामले चल रहे हैं। कंपनी अपने आप को दीवालिया घोषित कर चुकी है। सेबी ने भी कंपनी का बीएसई और एनएसई का लाइसेंस रद कर दिया है। उनका आरोप है कि विवेचक ने जांच में इन तथ्यों को जानबूझकर अनदेखा किया।
कोर्ट में नहीं पेश हुए विवेचक तो जारी हुआ था गैर जमानती वारंट
अधिवक्ता ने इंस्पेक्टर भानू प्रताप सिंह पर साक्ष्य गायब करने और विवेचना ठीक से न करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में शिकायत की थी। कोर्ट ने इंस्पेक्टर को तलब किया लेकिन वह नहीं आए। कई बार बुलाने पर भी इंस्पेक्टर कोर्ट नहीं पहुंचे तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। उस वक्त इंस्पेक्टर भानू प्रताप सिंह का तबादला मथुरा हो गया था। कोर्ट ने सात सितंबर 2018 को मथुरा के एसपी को भी तलब किया था।

इंस्पेक्टर ने बनाया शिकायत वापस लेने का दबाव
अधिवक्ता का कहना है कि कोर्ट आने से पहले उन्होंने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों से कई फोन कॉल कराईं और मिलकर बातचीत करने व नुकसान की भरपाई करने का लालच भी दिया। हालांकि, अधिवक्ता नही माने। 25 सितंबर 2018 को इंस्पेक्टर कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने साक्ष्य के बारे में उनसे सवाल पूछे तो इंस्पेक्टर ने कोई भी साक्ष्य न दिए जाने की बात कहकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया।
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