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एक्सपायर हुए 50000 सिलेंडर, गैस का टोटा

Thu, 25 Jul 2013 12:19 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 25 Jul 2013 12:19 PM IST
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fifty thousand gas cylinders expired

तेल कंपनियों की लापरवाही रसोई गैस उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है। करीब 50 हजार सिलेंडर एक्सपायर होने की वजह से सप्लाई से बाहर हो गए हैं।

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इसके चलते रसोई गैस का टोटा हो गया है। बुकिंग के बाद भी सिलेंडर की लेटलतीफी का दंश उपभोक्ता झेलने को विवश हैं।

लखनऊ रेंज में आने वाले आधा दर्जन से अधिक बॉटलिंग प्लांट में टेस्टिंग के बाद 50 हजार से अधिक सिलेंडर कंटेनरों का प्रयोग रोका गया है।

इनके उपयोग की मियाद खत्म हो चुकी थी। इसका असर घरेलू एलपीजी की सप्लाई पर पड़ने लगा है। हालांकि तेल कंपनियां घरेलू गैस की आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी की बात से इंकार कर रही हैं।
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गैस एजेंसियां जो घरेलू गैस सिलेंडर आपूर्ति करती हैं, उनके कंटेनर की भी एक्सपायरी डेट होती है। इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को कम ही होती है।

जानकारी के अभाव में उपभोक्ता डिलीवरी लेते समय उस पर अंकित सिलेंडर चेकिंग की एक्सपायरी डेट की अनदेखी कर देते हैं।

ऐसे सिलेंडर ही कई बार बड़े हादसों का सबब बनते हैं। ये सिलेंडर निर्माण के बाद इनके प्रयोग की तय समय सीमा पांच से सात साल का समय पूरा कर चुके होते हैं।

डिलीवरी के समय कोड देखें
उपभोक्ता गैस गैस सिलेंडर की डिलीवरी लेते समय उस पर अंकित कोड जरूर देखें। इंडियन ऑयल से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि घरेलू गैस के नए सिलेंडर कंटेनर को चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव (सीसीओई) से दस साल इस्तेमाल की छूट मिलती है।
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इसी आधार पर सिलेंडर के ऊपरी हिस्से में ए, बी, सी, डी कोडिंग के साथ उसके निर्माण अथवा टेस्टिंग का वर्ष अंकित किया जाता है।

जनवरी से मार्च तक निर्मित सिलेंडरों के लिए ए, अप्रैल से जून तक बी, जुलाई से सितंबर के लिए सी और अक्तूबर से दिसंबर के लिए डी का इस्तेमाल होता है।

निर्मित सिलेंडर के बॉटलिंग प्लांट में दोबारा जांच की तय अवधि को उसकी एक्सपायरी डेट माना जाता है। रीफिलिंग के लिए प्लांट में आने वाले सिलेंडरों की हाइड्रो टेस्टिंग होती है।

इसके लिए सिलेंडर में 17.5 किलोग्राम की जगह 25 किलोग्राम को आधार बना कर प्रेशर दबाव बना कर उसकी क्षमता को आंका जाता है।

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