केजीएमयू की मर्च्युरी में ही 'दफन' हो गया 15 हजार मौतों का राज
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पोस्टमार्टम हाउस में रखे 15 हजार से अधिक विसरा पड़े-पड़े खराब हो गए और इसी के साथ दफन हो गया हजारों की मौत का राज। लगातार बढ़ती विसरा की संख्या से परेशान केजीएमयू प्रशासन ने अब इनकों फेंकने की तैयारी कर ली है।
बार-बार के आग्रह के बाद भी पुलिस के उदासीन रवैये से आजिज केजीएमयू प्रशासन ने साफ कह दिया है कि अब नहीं ले गए तो इन्हें फेंकवा देंगे। इससे पुलिस व केजीएमयू के बीच विवाद की नौबत आ गई है।
केजीएमयू में प्रदेशभर के मरीज आते हैं। मरीज की मौत होने पर यहीं पोस्टमार्टम होता है। मौत की वजह साफ नहीं होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। उम्मीद होती है कि विसरा जांच में मौत की वजह खुल सकती है।
कुछ मामलों में पुलिस विसरा ले जाती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यहीं छोड़ देती है। ऐसी स्थिति में ये विसरा चौक पुलिस के हवाले कर दिए जाते हैं। केजीएमयू के पोस्टमार्टम हाउस में छह माह से ज्यादा पुराने करीब 15 हजार से अधिक विसरा बोतल में बंद हैं।
इसमें 80 फीसदी से ज्यादा पड़ोसी जिले उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, फैजाबाद, लखीमपुर खीरी जिले के हैं। इन्हें न तो संबंधित जिले की पुलिस ले जाती है और न ही चौक पुलिस हटवा रही है।
आखिर क्या है विसरा जांच
जानकारों का कहना है कि मौत की वजह संदिग्ध होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। इसमें लीवर, स्प्लीन और किडनी के पार्ट रखे जाते हैं। यदि किसी की एक्सीडेंट में मौत होने का शक हो और शव देखने के बाद संदेह की स्थिति लगे तो विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। जहरीले पदार्थ से मौत के मामले में विसरा जरूर रखा जाता है। डेड बॉडी अगर नीली पड़ी हो, जीभ, आंख, नाखून आदि नीला पड़ गए हों तो भी विसरा रख लिया जाता है।
बार- बार लिखा पत्र, नतीजा सिफर
केजीएमयू के मेडिकल अफसर बीके ओझा का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस में रखे बिसरा मुसीबत बन गए हैं। यहां रखने से कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं। दूसरे जिलों की पुलिस यहीं छोड़ कर चली जाती है। इसे हटवाने की जिम्मेदारी चौक थाने की पुलिस की है। लेकिन पुलिस भी नहीं हटवा रही है। कई बार एसएसपी को पत्र भेजा जा चुका है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एक बार फिर पत्र भेजा जा रहा है।