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Lucknow News: बुखार व गले का संक्रमण भी दे सकता है दिल की बीमारी
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प्रेसवार्ता में जानकारी देते डॉक्टर।
लखनऊ। बुखार के साथ गले के भीतरी हिस्से में सूजन व जलन को अनदेखा न करें। यह दिल की बीमारी दे सकता है। यह रूमेटिक बुखार के लक्षण हैं। इसमें पैर व चेहरे के अलावा शरीर के अन्य अंगों में भी सूजन आ जाती है। गले में होने वाले इस संक्रमण की वजह स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया होता है। जो धीरे-धीरे दिल को गिरफ्त में ले लेता है। इस संक्रमण को रूमेटिक दिल की बीमारी (आरएचडी) कहा जाता है।
संक्रमण को दूर करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। यह बातें बृहस्पतिवार को पीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. अंकित साहू ने दी। वकार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 76वें वार्षिक सम्मेलन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पीजीआई समेत देश-विदेश के 4000 के करीब हृदय रोग चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्घाटन वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अध्यक्ष अमेरिका चिकित्सक व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जगत नरूला ने किया।
प्रो. अंकित साहू ने बताया यह बीमारी 5-15 साल के बच्चों में देखी जाती है। बच्चों के हृदय का वॉल्व सिकुड़ने से दिल कमजोर हो जाता है। खून का थक्का जमने व पैरालिसिस के साथ हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज बैलून वाल्वोप्लास्टी और ओपन हार्ट सर्जरी से किया जा सकता है।
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बगैर सर्जरी ठीक कर सकते हैं वाॅल्व
अमेरिका से आए डाॅ. रामदास जी पाई ने बताया हृदय संबंधी बीमारियों में वाॅल्व का खराब होना आम बात है। बीपी-शुगर की वजह से एरोटिक वाॅल्व में कैल्शियम एकत्र होकर हार्ट में रक्त पहुंचाने वाली नली पतला कर देता है। कैथेडर से दिल के वाॅल्व पहुंचकर स्टेंट लगाया जा सकता है जो नली के बंद हो रहे रास्ते को खोल देता है। डॉ. पाई ने बताया कि माइट्रल वाॅल्व पर कैल्शियम जमा होने की आशंका दो फीसदी लोगों में होती है। शुरुआती दौर में जब लोगों को इसकी दिक्कत होती है वह लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं।
डायबिटीज-प्रोजेस्ट्रान हार्मोन को काबू रखे
पीजीआई की हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. रूपाली खन्ना ने महिलाओं में कम उम्र में होने वाले हृदय रोग पर शोध किया है। 45 से कम उम्र की महिलाओं में होने वाली सामान्य दिल की बीमारियों के कारणों का पता लगाया है। 99 युवा महिलाओं पर शोध कर पता लगाया कि आखिर क्या कारण हैं कि कम उम्र में महिलाएं हृदय रोग का शिकार हो रही हैं। शोध में 66 महिलाओं का कोरोनरी एंजियोग्राफी परीक्षण किया गया। दो-तिहाई महिलाओं यानि 66 फीसदी महिलाओं में सीएडी का पता चला है। इनमें मधुमेह, उच्च सीरम ट्राइग्लिसराइड स्तर, कम प्रोजेस्टेरोन और कम इंसुलिन स्तर देखा गया। शोध में सामने आया कि डायबिटीज और प्रोजेस्ट्रान हार्मोन को नियंत्रण रखा जाए तो हृदय रोग से बचा जा सकता है। सीएडी में रक्त वाहिका में रुकावट आती है, जिसे खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी करनी पड़ती है।
हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर
लोहिया संस्थान कॉर्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि हाइपरटेंशन एक साइंलेट किलर है। वर्तमान में करीब 90 फीसदी लोग इसका शिकार होते हैं। हर व्यक्ति को 20 साल की उम्र से बीपी जरूर चेक करवाते रहना चाहिए। मोटे लोगों को अधिक ध्यान देना चाहिए। पुरुष का पेट 90 सेंटीमीटर व महिलाओं का 80 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।
अलसी बीज रखेगा दिल को फिट
केजीएमयू के लॉरी कॉर्डियोलॉजी के वरिष्ठ डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि दिल को ठीक रखने के लिए ओमेगा बहुत जरूरी है। इसलिए डाइट में ओमेगा का विशेष ध्यान रखना होगा। शाकाहारी लोगों को आटा, दाल में अलसी के बीज को पीसकर उचित मात्रा में डालना चाहिए। मछली में ओमेगा अधिक मात्रा में मिलती है, इसलिए मांसाहारी लोग इसका सेवन भी उचित मात्रा में कर सकते हैं।
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संक्रमण को दूर करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। यह बातें बृहस्पतिवार को पीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. अंकित साहू ने दी। वकार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 76वें वार्षिक सम्मेलन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पीजीआई समेत देश-विदेश के 4000 के करीब हृदय रोग चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्घाटन वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अध्यक्ष अमेरिका चिकित्सक व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जगत नरूला ने किया।
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प्रो. अंकित साहू ने बताया यह बीमारी 5-15 साल के बच्चों में देखी जाती है। बच्चों के हृदय का वॉल्व सिकुड़ने से दिल कमजोर हो जाता है। खून का थक्का जमने व पैरालिसिस के साथ हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज बैलून वाल्वोप्लास्टी और ओपन हार्ट सर्जरी से किया जा सकता है।
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बगैर सर्जरी ठीक कर सकते हैं वाॅल्व
अमेरिका से आए डाॅ. रामदास जी पाई ने बताया हृदय संबंधी बीमारियों में वाॅल्व का खराब होना आम बात है। बीपी-शुगर की वजह से एरोटिक वाॅल्व में कैल्शियम एकत्र होकर हार्ट में रक्त पहुंचाने वाली नली पतला कर देता है। कैथेडर से दिल के वाॅल्व पहुंचकर स्टेंट लगाया जा सकता है जो नली के बंद हो रहे रास्ते को खोल देता है। डॉ. पाई ने बताया कि माइट्रल वाॅल्व पर कैल्शियम जमा होने की आशंका दो फीसदी लोगों में होती है। शुरुआती दौर में जब लोगों को इसकी दिक्कत होती है वह लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं।
डायबिटीज-प्रोजेस्ट्रान हार्मोन को काबू रखे
पीजीआई की हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. रूपाली खन्ना ने महिलाओं में कम उम्र में होने वाले हृदय रोग पर शोध किया है। 45 से कम उम्र की महिलाओं में होने वाली सामान्य दिल की बीमारियों के कारणों का पता लगाया है। 99 युवा महिलाओं पर शोध कर पता लगाया कि आखिर क्या कारण हैं कि कम उम्र में महिलाएं हृदय रोग का शिकार हो रही हैं। शोध में 66 महिलाओं का कोरोनरी एंजियोग्राफी परीक्षण किया गया। दो-तिहाई महिलाओं यानि 66 फीसदी महिलाओं में सीएडी का पता चला है। इनमें मधुमेह, उच्च सीरम ट्राइग्लिसराइड स्तर, कम प्रोजेस्टेरोन और कम इंसुलिन स्तर देखा गया। शोध में सामने आया कि डायबिटीज और प्रोजेस्ट्रान हार्मोन को नियंत्रण रखा जाए तो हृदय रोग से बचा जा सकता है। सीएडी में रक्त वाहिका में रुकावट आती है, जिसे खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी करनी पड़ती है।
हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर
लोहिया संस्थान कॉर्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि हाइपरटेंशन एक साइंलेट किलर है। वर्तमान में करीब 90 फीसदी लोग इसका शिकार होते हैं। हर व्यक्ति को 20 साल की उम्र से बीपी जरूर चेक करवाते रहना चाहिए। मोटे लोगों को अधिक ध्यान देना चाहिए। पुरुष का पेट 90 सेंटीमीटर व महिलाओं का 80 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।
अलसी बीज रखेगा दिल को फिट
केजीएमयू के लॉरी कॉर्डियोलॉजी के वरिष्ठ डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि दिल को ठीक रखने के लिए ओमेगा बहुत जरूरी है। इसलिए डाइट में ओमेगा का विशेष ध्यान रखना होगा। शाकाहारी लोगों को आटा, दाल में अलसी के बीज को पीसकर उचित मात्रा में डालना चाहिए। मछली में ओमेगा अधिक मात्रा में मिलती है, इसलिए मांसाहारी लोग इसका सेवन भी उचित मात्रा में कर सकते हैं।