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Lucknow News: जनजाति उत्सव की आखिरी शाम ने जीता दिल
Wed, 22 Nov 2023 02:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 22 Nov 2023 02:10 AM IST
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लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी में मंगलवार को जनजाति भागीदारी उत्सव की आखिरी शाम ने मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। कलाकारों ने अंतिम दिन नृत्य व संगीत से शाम को कुछ ऐसे सजाया कि देखने वाले वाह वाह कर उठे। देश के 17 राज्यों से आए जनजाति वर्ग के लोगों ने फिर मिलने का वादा कर शहर को अलविदा कहा।
समापन समारोह में उत्तराखंड का तांदी व हारूल नृत्य, झारखंड का पाइका, छत्तीसगढ़ी कर्मा व गैड़ी नृत्य, मध्य प्रदेश का गुदंब बाजा, उत्तर प्रदेश का हुरदुगुवा, गरदबाजा, राजस्थान का सहरिया स्वांग और सिक्किम का याकछम नृत्य कलाकारों ने पेश किया। इसके बाद आयोजकों ने कलाकार व शिल्पकारों को प्रतीक चिन्ह में मूंच से बनी गणेश जी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में पद्मश्री मालिनी अवस्थी, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव समाज कल्याण डॉ. हरिओम, टीआरआई के निदेशक अतुल द्विवेदी व अन्य मौजूद रहे।
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वाद्य यंत्रों की रही धूम
समापन समारोह में जनजाति वाद्य यंत्रों का वादन करते कलाकारों ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। देश भर की अलग-अलग जनजातियों के करीब 120 वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी उत्सव में लगी थी। आखिरी शाम को कलाकारों ने एक साथ एक स्वर में इन यंत्रों का वादन किया जिसे सुनकर हर कोई झूम उठा।
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दो संस्थानों के बीच हुआ एमओयू
ऐसे आयोजन और किए जा सकें, इसके लिए लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान और सोन चिरैया लोक संगीत उत्थान समिति के बीच एमओयू साइन किया गया। इससे जनजातीय कला और परंपराओं के साथ ही रिसर्च और शिक्षा को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई जा रही है।
खरीदारों ने दिखाया उत्साह
उत्सव के आखिरी दिन शहर के लोगों ने शिल्प मेले में जनजातीय उत्पादों की खरीद को लेकर काफी उत्साह दिखाया। मूंज के उत्पाद, साड़ियां, सर्दी के कपड़े, घरों की सजावट का सामान, बांस व लकड़ी के उत्पाद जमकर बिके। इसके अलावा व्यंजन मेले में महाराष्ट्र के वड़ापाव, राजस्थान की मुंगौडी व बिहार के लिट्टी चोखा और उत्तर प्रदेश की चाट के स्वाद का आनंद भी लोगों ने लिया।
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समापन समारोह में उत्तराखंड का तांदी व हारूल नृत्य, झारखंड का पाइका, छत्तीसगढ़ी कर्मा व गैड़ी नृत्य, मध्य प्रदेश का गुदंब बाजा, उत्तर प्रदेश का हुरदुगुवा, गरदबाजा, राजस्थान का सहरिया स्वांग और सिक्किम का याकछम नृत्य कलाकारों ने पेश किया। इसके बाद आयोजकों ने कलाकार व शिल्पकारों को प्रतीक चिन्ह में मूंच से बनी गणेश जी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में पद्मश्री मालिनी अवस्थी, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव समाज कल्याण डॉ. हरिओम, टीआरआई के निदेशक अतुल द्विवेदी व अन्य मौजूद रहे।
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वाद्य यंत्रों की रही धूम
समापन समारोह में जनजाति वाद्य यंत्रों का वादन करते कलाकारों ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। देश भर की अलग-अलग जनजातियों के करीब 120 वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी उत्सव में लगी थी। आखिरी शाम को कलाकारों ने एक साथ एक स्वर में इन यंत्रों का वादन किया जिसे सुनकर हर कोई झूम उठा।
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दो संस्थानों के बीच हुआ एमओयू
ऐसे आयोजन और किए जा सकें, इसके लिए लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान और सोन चिरैया लोक संगीत उत्थान समिति के बीच एमओयू साइन किया गया। इससे जनजातीय कला और परंपराओं के साथ ही रिसर्च और शिक्षा को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई जा रही है।
खरीदारों ने दिखाया उत्साह
उत्सव के आखिरी दिन शहर के लोगों ने शिल्प मेले में जनजातीय उत्पादों की खरीद को लेकर काफी उत्साह दिखाया। मूंज के उत्पाद, साड़ियां, सर्दी के कपड़े, घरों की सजावट का सामान, बांस व लकड़ी के उत्पाद जमकर बिके। इसके अलावा व्यंजन मेले में महाराष्ट्र के वड़ापाव, राजस्थान की मुंगौडी व बिहार के लिट्टी चोखा और उत्तर प्रदेश की चाट के स्वाद का आनंद भी लोगों ने लिया।