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Lucknow News: लखनऊ के ठाकुरगंज अस्पताल में अब फेको विधि से होंगे मोतियाबिंद के ऑपरेशन
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लखनऊ। ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में अब मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेको विधि से होंगे। वहीं, ईएनटी यूनिट को भी अपग्रेड किया जाएगा। इसमें माइक्रोस्कोप व इंडोस्कोपी यूनिट भी लगेगी। इससे डिजिटल ऑपरेशन की राह आसान होगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है शासन से बजट मिल गया है। कॉर्पोरेशन को मशीन की खरीद करनी है।
अस्पताल के नेत्ररोग विभाग में टॉपिकल माइक्रो फेको विधि से मोतियाबिंद के ऑपरेशन होंगे। इसमें बिना दर्द के आसानी से सर्जरी हो जाती है। सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया फेको विधि में छोटा सा चीरा लगाकर फेको मशीन से सफेद मोतिया को आंख के अंदर ही नष्ट कर दिया जाता है। इसी के माध्यम से ही फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर लगा दिया जाता है।
हालांकि, उन्होंने बताया जिन लोगों को ज्यादा कठोर मोतिया होता है उसे फेको विधि से नहीं हटाया जाता, क्योंकि फेको का पावर अधिक होता है, जो कॉर्निया को नष्ट कर सकता है। ऐसे मामलों में सामान्य ऑपरेशन करते हैं। इसमें आंख के आस-पास इंजेक्शन लगाकर सुन्न करते हैं, जिससे आंख इधर-उधर न घूमे। इसमें मरीज को दर्द सहना पड़ता है। वहीं, फेको विधि में कोई इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। केवल आंख में दवा डालकर ऑपरेशन किया जाता है।
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डॉ. सिंह ने आगे बताया कि ईएनटी यूनिट में माइक्रोस्कोप व इंडोस्कोपिक यूनिट स्थापित होने के बाद नाक-कान व गले के इंडोस्कोपी विधि से डिजिटल ऑपरेशन भी संभव होंगे। अस्पताल को यूनिट अपग्रेड करने के लिए शासन से 97 लाख रुपये मिले हैं।
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अस्पताल के नेत्ररोग विभाग में टॉपिकल माइक्रो फेको विधि से मोतियाबिंद के ऑपरेशन होंगे। इसमें बिना दर्द के आसानी से सर्जरी हो जाती है। सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने बताया फेको विधि में छोटा सा चीरा लगाकर फेको मशीन से सफेद मोतिया को आंख के अंदर ही नष्ट कर दिया जाता है। इसी के माध्यम से ही फोल्डेबल लेंस को आंख के अंदर लगा दिया जाता है।
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हालांकि, उन्होंने बताया जिन लोगों को ज्यादा कठोर मोतिया होता है उसे फेको विधि से नहीं हटाया जाता, क्योंकि फेको का पावर अधिक होता है, जो कॉर्निया को नष्ट कर सकता है। ऐसे मामलों में सामान्य ऑपरेशन करते हैं। इसमें आंख के आस-पास इंजेक्शन लगाकर सुन्न करते हैं, जिससे आंख इधर-उधर न घूमे। इसमें मरीज को दर्द सहना पड़ता है। वहीं, फेको विधि में कोई इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। केवल आंख में दवा डालकर ऑपरेशन किया जाता है।
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डॉ. सिंह ने आगे बताया कि ईएनटी यूनिट में माइक्रोस्कोप व इंडोस्कोपिक यूनिट स्थापित होने के बाद नाक-कान व गले के इंडोस्कोपी विधि से डिजिटल ऑपरेशन भी संभव होंगे। अस्पताल को यूनिट अपग्रेड करने के लिए शासन से 97 लाख रुपये मिले हैं।