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‘बिटिया की आंखें दान कर दीजिए, ताकि वे देखती रहें दुनिया’, पिता के इन शब्दों ने कर दी सबकी आंखे नम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 14 Feb 2018 01:59 PM IST
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वर्तिका (फाइल फोटो)
- फोटो : amarujala
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‘ड़ॉक्टर साहब, मेरी बिटिया तो लौटकर नहीं आएगी, उसकी आंखें किसी को दान कर दीजिए, ताकि कोई और दुनिया देख सके।’ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती बेटी वर्तिका (22) की मंगलवार रात हुई मौत के बाद बाराबंकी निवासी शिवबरन सिंह ने जब बेटी के नेत्रदान कराने का यह फैसला सुनाया तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
वर्तिका 15 दिन पहले मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। वह सीएम हेल्पलाइन 1076 में ट्रेनिंग कर रही थी। पिता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
मूलरूप से बाराबंकी के जहांगीराबाद बहादुरपुर गांव के किसान शिवबरन सिंह की 22 वर्षीय बेटी वर्तिका पढ़ाई के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में टेलीकॉलर की ट्रेनिंग कर रही थी।
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बीती 29 जनवरी को घर से ऑफिस जाते वक्त पॉलीटेक्निक चौराहे पर डाले की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। मंगलवार की रात उसकी मौत हो गई। मृतका के भाई समीर ने बताया कि माता-पिता ने बचपन में ही मौसी की बेटी वर्तिका को गोद ले लिया था ।
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वर्तिका 15 दिन पहले मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। वह सीएम हेल्पलाइन 1076 में ट्रेनिंग कर रही थी। पिता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
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मूलरूप से बाराबंकी के जहांगीराबाद बहादुरपुर गांव के किसान शिवबरन सिंह की 22 वर्षीय बेटी वर्तिका पढ़ाई के साथ-साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में टेलीकॉलर की ट्रेनिंग कर रही थी।
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बीती 29 जनवरी को घर से ऑफिस जाते वक्त पॉलीटेक्निक चौराहे पर डाले की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। मंगलवार की रात उसकी मौत हो गई। मृतका के भाई समीर ने बताया कि माता-पिता ने बचपन में ही मौसी की बेटी वर्तिका को गोद ले लिया था ।
नई शुरुआत से पहले ही सब खत्म
प्रमाण पत्र
- फोटो : amarujala
उसने एमए में टॉप किया था। समीर ने बताया कि हाल ही में वर्तिका का चयन प्रधानमंत्री विकास योजना के तहत 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लिए हुआ था, उसकी ट्रेनिंग चल रही थी। दो फरवरी को उसकी जॉइनिंग थी, पर नियति से उसकी खुशी देखी नहीं गई।समीर ने बताया कि वर्तिका के घायल होने की सूचना पर रिपोर्ट लिखाने गाजीपुर थाने गए थे।
वहां डाला नंबर के आधार पर अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। उस दौरान डाला थाने के बाहर मौजूद था, लेकिन चालक फरार था। अगले दिन पहुंचा तो पुलिसकर्मियो ने चालक को पकड़े बगैर डाले को थाने से रिलीज कर दिया था। वहीं इंसपेक्टर सुजीत कुमार राय का का कहना है कि उन्हें एक्सीडेंट की जानकारी नहीं है। पता करेंगे और डाला छोड़े जाने के बारे में जांच होगी
वहां डाला नंबर के आधार पर अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। उस दौरान डाला थाने के बाहर मौजूद था, लेकिन चालक फरार था। अगले दिन पहुंचा तो पुलिसकर्मियो ने चालक को पकड़े बगैर डाले को थाने से रिलीज कर दिया था। वहीं इंसपेक्टर सुजीत कुमार राय का का कहना है कि उन्हें एक्सीडेंट की जानकारी नहीं है। पता करेंगे और डाला छोड़े जाने के बारे में जांच होगी