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Lucknow News: संस्कृतियों का गुलदस्ता भेंट कर ली विदाई

Thu, 21 Nov 2024 03:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Thu, 21 Nov 2024 03:32 AM IST
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Farewell by presenting a bouquet of cultures
भागीदारी उत्सव में लोकनृत्य प्रस्तुत करते कलाकार।
लखनऊ। सौ साल पुरानी संस्कृति और सभ्यता को पारंपरिक रूप में जीवित रखने वाले कलाकारों ने बुधवार को दर्शकों के बीच अपनी पहचान छोड़ी। इसी के साथ संस्कृतियों का गुलदस्ता भेंटकर अंतरराष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव ने राजधानी से विदा ली। इस दौरान 22 राज्यों और दो देशों के जनजाति कलाकारों ने हिस्सा लिया। उन्होंने न केवल स्थानीय संस्कृति की धरोहरों को संभालने का हुनर सिखाया बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति और सभ्यताओं का सम्मान करना भी सिखाया।
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संगीत नाटक अकादमी परिसर में बुधवार को प्रदेश सरकार की ओर से बिरसा मुंडा की जयंती पर अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि अगले साल से इस उत्सव को और विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनजातियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि से जोड़कर उनका विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।
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कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री संजीव कुमार गौड़, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. संजय गौड़, प्रमुख सचिव समाज कल्याण डॉ. हरिओम और प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग मुकेश कुमार मेश्राम उपस्थित रहे।
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कलाकारों ने दिया पशु-पक्षियों को स्वतंत्रता का संदेश
उत्सव के समापन अवसर पर अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। पिनसुख के निर्देशन में सौ साल पुराने सिक्किम के लेपचा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। यह नृत्य संदेश देता है कि हम लोगों को आजादी पसंद है, ठीक उसी तरह जंगल के पशु-पक्षियों को भी स्वतंत्रता भाती है। असम के दल ने पारंपरिक बर्दोई शिखला नृत्य किया। राजस्थान से आए तेजपाल दल ने कच्छी घोड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ के संजू सेन ने लोकवाद्यों का मंचीय प्रदर्शन कर भारत की उन्नत परंपरा की सशक्त झांकी पेश की। उड़ीसा का घुड़का नृत्य वासुदेव के निर्देशन में किया गया। कलाकारों ने बांस के मुकुट, मुर्गा, पिंजड़ा लेकर नृत्य किया।

बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन

बिरसा मुंडा पर प्रेरक नाटक का मंचन राजकुमार रायकवाड़ के निर्देशन में किया गया। सामान्य युवक के मानवीय पक्षों को उजागर करते हुए उसके संगठनात्मक शक्ति के साथ दूसरों की सेवा करने का महान भाव प्रभावी रूप से दर्शाया गया।


मंच पर इन्हें भी मिला सम्मान
डिजिटल डिस्ट्रिक्ट डिपॉस्टरी के तहत प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सिम्पी मौर्या और दूसरे स्थान पर रहीं शिखा भदौरिया को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति की ओर से आयोजित नेशनल कल्चरल एंड लिटरेरी फेस्ट में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के दल का भी सम्मान किया गया। समूह लोकनृत्य में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय से नैंसी, आस्था, सलोनी, रिंकी को सम्मान मिला। लोकल क्राफ्ट प्रतियोगिता में रोशनी को सम्मानित किया गया।
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