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बदनामी के डर से बेटियों की डायबिटीज छिपा रहे परिजन : डॉ. अजय

Sat, 10 Oct 2026 01:34 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:34 AM IST
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Families hiding daughters' diabetes due to fear of stigma: Dr. Ajay
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। समाज में बदनामी और शादी में परेशानी के डर से माता-पिता बेटियों की डायबिटीज छिपा रहे हैं। बीमारी का पता दूसरों को न चले, इसके लिए कई बार समय पर इलाज कराने से भी कतराते हैं। इसका खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ता है।
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ये बातें उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन के डॉ. अजय तिवारी ने कहीं। शुक्रवार को उप्र डायबिटीज एसोसिएशन की ओर से लोहिया संस्थान के प्रेक्षागृह में डायबिटीज जागरूकता पर शुरू हुए यूपीडकॉन-2026 कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि समय पर इलाज न मिलने से ब्लड शुगर बेकाबू हो जाता है। दूसरी गंभीर समस्याएं घेरने लगती हैं।
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लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि हर उम्र के लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। शुरुआत में बीमारी के लक्षण मरीज को नजर नहीं आते। कुछ मरीजों को समस्या महसूस होती हैं, जिसे वह अनदेखा कर देते हैं। इससे बीमारी गंभीर हो जाती है। डायबिटीज को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोग समय पर इलाज कराएं। समय पर बीमारी की पहचान, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं या इंसुलिन का इस्तेमाल और जीवनशैली में सुधार से ब्लड शुगर काबू रखी जा सकती है।
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लोहिया संस्थान के कुलसचिव डॉ. सुब्रत चंद्रा ने कहा कि करीब छह प्रतिशत टाइप वन डायबिटीज पीड़ितों को इंसुलिन की जरूरत पड़ती है, जबकि टाइप-2 डायबिटीज पीड़ितों में पांच प्रतिशत को इसकी जरूरत पड़ती है। डीन डॉ. राजन भटनागर ने कहा कि दवाओं के साथ जीवनशैली में भी सुधार जरूरी है। भोजन से लेकर नियमित कसरत को जीवन का अहम हिस्सा बनाकर डायबिटीज को रोक सकते हैं।

केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरसिंह वर्मा ने कहा कि डायबिटीज के इलाज में शर्म और झिझक की कोई जगह नहीं है। इलाज में देरी से बीमारी का असर दूसरे अंगों पर पड़ सकता है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
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