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विदेश में सेमिनार दंत संकाय का, सैर कर आए दूसरे डॉक्टर
Tue, 09 Apr 2019 01:58 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Tue, 09 Apr 2019 01:58 AM IST
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- फोटो : डेमो
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लखनऊ। केजीएमयू में धांधली थमने का नाम नहीं ले रही। अब दंत संकाय के सेमिनार के नाम पर दूसरे विभाग के डॉक्टरों ने विदेश में सैर-सपाटा कर लिया। इतना ही नहीं चिकित्सकों ने केजीएमयू प्रशासन से इसका भुगतान भी करवा लिया। मामले की शिकायत होने पर शासन ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।
देश-विदेश में होने वाले सेमिनार में केजीएमयू के तमाम विशेषज्ञ शामिल होते हैं। वे इलाज की नई तकनीकें व दवाओं की जानकारी हासिल करते हैं। मगर अब सेमिनार भी सैर-सपाटे का जरिया बनते जा रहे हैं। अभी हाल में श्रीलंका में दांतों की बीमारियों पर कार्यशाला हुई। इसमें केजीएमयू दंत संकाय के डॉक्टरों ने भाग लिया। इसके अलावा बेहोशी, गठिया, स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत अन्य डॉक्टर भी सेमिनार में भाग लेने के नाम पर श्रीलंका पहुंच गए। ऐसे में सवाल उठता है कि दंत संकाय के सेमिनार में दूसरे विभाग के डॉक्टर क्यों गए?
आरटीआई का नहीं दिया जवाब
केजीएमयू के दंत संकाय के सेमिनार में दूसरे विभाग के डॉक्टरों के जाने को लेकर एक संस्था से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई दाखिल की थी। चर्चा है कि संस्था पर आरटीआई वापस लेने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि केजीएमयू प्रशासन ने इस आरटीआई का जवाब तक नहीं दिया।
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एक अंतरराष्ट्रीय व चार राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल हो सकते हैं
केजीएमयू प्रोफेसर व एडिशनल प्रोफेसर साल में एक अंतरराष्ट्रीय व चार राष्ट्रीय सेमिनार में भाग ले सकते हैं। उनके आने-जाने, ठहरने व खाने-पीने का खर्च केजीएमयू प्रशासन उठाता है। असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर दो साल में एक अंतरराष्ट्रीय और चार राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग ले सकते हैं।
मुझे इसकी जानकारी नहीं
श्रीलंका में दांतों की बीमारियों पर कार्यशाला हुई थी। उसमें दांतों के अलावा दूसरी विधा के डॉक्टर क्यों और कैसे गए, इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी की जाएगी।
- डॉ. पवित्र रस्तोगी, प्रवक्ता दंत संकाय, केजीएमयू
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देश-विदेश में होने वाले सेमिनार में केजीएमयू के तमाम विशेषज्ञ शामिल होते हैं। वे इलाज की नई तकनीकें व दवाओं की जानकारी हासिल करते हैं। मगर अब सेमिनार भी सैर-सपाटे का जरिया बनते जा रहे हैं। अभी हाल में श्रीलंका में दांतों की बीमारियों पर कार्यशाला हुई। इसमें केजीएमयू दंत संकाय के डॉक्टरों ने भाग लिया। इसके अलावा बेहोशी, गठिया, स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत अन्य डॉक्टर भी सेमिनार में भाग लेने के नाम पर श्रीलंका पहुंच गए। ऐसे में सवाल उठता है कि दंत संकाय के सेमिनार में दूसरे विभाग के डॉक्टर क्यों गए?
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आरटीआई का नहीं दिया जवाब
केजीएमयू के दंत संकाय के सेमिनार में दूसरे विभाग के डॉक्टरों के जाने को लेकर एक संस्था से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता ने आरटीआई दाखिल की थी। चर्चा है कि संस्था पर आरटीआई वापस लेने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि केजीएमयू प्रशासन ने इस आरटीआई का जवाब तक नहीं दिया।
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एक अंतरराष्ट्रीय व चार राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल हो सकते हैं
केजीएमयू प्रोफेसर व एडिशनल प्रोफेसर साल में एक अंतरराष्ट्रीय व चार राष्ट्रीय सेमिनार में भाग ले सकते हैं। उनके आने-जाने, ठहरने व खाने-पीने का खर्च केजीएमयू प्रशासन उठाता है। असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर दो साल में एक अंतरराष्ट्रीय और चार राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग ले सकते हैं।
मुझे इसकी जानकारी नहीं
श्रीलंका में दांतों की बीमारियों पर कार्यशाला हुई थी। उसमें दांतों के अलावा दूसरी विधा के डॉक्टर क्यों और कैसे गए, इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी की जाएगी।
- डॉ. पवित्र रस्तोगी, प्रवक्ता दंत संकाय, केजीएमयू