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Lucknow News: फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिका और कनाडा में ठगी, 12 जालसाज गिरफ्तार

Sun, 20 Oct 2024 04:47 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2024 04:47 AM IST
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Fake call centers defrauded America and Canada, 12 fraudsters arrested

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लखनऊ। वृंदावन योजना स्थित एवरेस्ट अपार्टमेंट के फ्लैट से साइबर ठगों का गिरोह फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका और कनाडा में ठगी कर रहा था। पीजीआई व साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने इस गिरोह के 12 गुर्गों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साइबर ठग पहले कम्प्यूटर में वायरस डालते थे, फिर उसे ठीक करने के नाम पर रकम गिफ्ट कार्ड के रूप में ऐंठते थे। यह गैंग करीब तीन महीने से काम कर रहा था। इसके कई और गुर्गे हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है।

डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि शुक्रवार को सूचना मिली कि एवरेस्ट अपार्टमेंट के टावर-1 में बने फ्लैट नंबर-201 में कॉल सेंटर संचालित हो रहा है। वहां काम करने वाले युवक उसी फ्लैट में रहते भी हैं और देर रात तक काम करते हैं। संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर पुलिस ने अपार्टमेंट में छापा मारकर 12 युवकों को गिरफ्तार किया। डीसीपी ने बताया कि गिरोह का सरगना राजस्थान का मोहन है। इनसे 11 लैपटॉप, 7 चार्जर, एक टैबलेट, दो एयर फाइबर डिवाइस, दो राउटर, दो हेडफोन, दो माउस और 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
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ऐसे फंसाते थे जाल में

पाॅपअप मैसेज भेजते...यूजर के क्लिक करते ही हैंग हो जाता कम्प्यूटर



डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए युवकों ने बताया कि अमेरिका व कनाडा के लोगों के कम्प्यूटर पर वे पॉपअप मैसेज भेजते थे। यूजर जैसे ही पॉपअप मैसेज को क्लिक करता, कम्प्यूटर हैंग हो जाता। किसी वेबसाइट को सर्च करते समय आपने अक्सर देखा होगा कि एक कोने में कोई मैसेज या किसी वेबसाइट को साइन इन करने की एक छोटी सी विंडो खुल जाती है। यह सब ऑटोमेटिक यानी पॉपअप होता है।
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हैंग होते ही शुरू हो जाता काम

यूजर का कम्प्यूटर हैंग होते ही जालसाज उसे सही करने के लिए अपना इंटरनेट कॉलिंग नंबर देते थे। यूजर जब उसपर संपर्क करता, तो जालसाज अल्ट्रा व्यूअर एप्लीकेशन के माध्यम से उसका कम्प्यूटर हैक कर लेते थे।



डॉलर के बजाय गिफ्ट कार्ड मांगते

जालसाज पकड़े न जाएं इसलिए कम्प्यूटर को सही करने के एवज में अमेजन व एप्पल के गिफ्ट कार्ड खरीदकर उसका कोड देने को कहते। कोड मिलते ही टेलीग्राम एप के माध्यम से गिरोह के दूसरे साथियों को उसे देते थे। टेलीग्राम एप से जुड़े गिरोह के गुर्गे गिफ्ट कार्ड को रिडीम कराते यानी भुनाते थे।



खुद को माइक्रोसाॅफ्ट व एप्पल कंपनी का अधिकारी बताते

लखनऊ में बैठे जालसाज माइक्रोसाॅफ्ट व एप्पल कंपनी का अधिकारी बनकर बात करते थे। जालसाजों का बात करने का तरीका बिल्कुल पेशेवर होने के चलते पीड़ित को ठगी का अहसास नहीं हो पाता था। आरोपी विदेशी लोगों से बातचीत करने के लिए (X-LITE) और (eyeBeam) कॉलिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे।




ये शातिर आए गिरफ्त में



फ्लैट में रहने वाले कानपुर नगर निवासी चंदन उर्फ रिक्की, राजस्थान का मोहन, ठाकुरगंज का उत्कर्ष, रायबरेली का नीरज कुमार, हजरतगंज निवासी करन सिंह, संतकबीरनगर निवासी तरुण गुप्ता, दिल्ली निवासी नीरज पांडेय, गोंडा निवासी सिद्धार्थ कश्यप, अलीगंज निवासी रितुराज गुप्ता, बहराइच निवासी सोमनाथ, चंदौली निवासी विराट कुमार और बस्ती निवासी रामजनक।
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