फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   fake call center get caught in lucknow

सपा नेता के घर में पकड़ा गया फर्जी कॉल सेंटर, ग्राहकों से एक दिन में ऐंठते थे 7 से 8 लाख रुपये

Sat, 08 Sep 2018 04:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 08 Sep 2018 04:41 PM IST
विज्ञापन
fake call center get caught in lucknow
जालसाजों के पास से बरामद पैनकार्ड व आधार कार्ड - फोटो : amar ujala
लखनऊ में मड़ियांव के अलीगंज सीतापुर योजना की एसबीआई कॉलोनी में महिला सपा नेता के घर में फर्जी कॉल सेंटर के पकड़े जाने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। क्षेत्राधिकारी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि गिरोह ने दिल्ली में करोड़ों रुपये ठगने के बाद चार साल पहले लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का गोरखधंधा शुरू किया था।
विज्ञापन


जालसाज एक दिन में ग्राहकों को जाल में फंसाकर सात से आठ लाख रुपये ऐंठ लेते थे। सुल्तानपुर के राहुल टाकीज निवासी मास्टर माइंड फैज खान ने अपने दोस्त व लखनऊ में सरगना अमित सिंह को फर्जी कॉल सेंटर खुलवाने में मदद की थी। इसकी शुरूआत विभूतिखंड थानाक्षेत्र में हुई। कुछ विवाद होने के बाद चार महीने पहले कॉल सेंटर को सपा महिला नेता के घर में खोला गया।
विज्ञापन


क्षेत्राधिकारी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि अमित सिंह ने फर्जी कॉल सेंटर खोलने के लिए गौरव, सूरज सोनी, अर्पित सिंह और अपने भाई अतुल सिंह को तैयार किया। इन सभी की निगरानी में कॉल सेंटर की शुरूआत हुई। हालांकि, हिसाब-किताब देखने फैज हर महीने लखनऊ आता था और हिस्सेदारी लेकर चला जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने दर्जनों आधार कार्ड बनवाए। यह आधार कार्ड फर्जी नाम व पते पर थे। इनमें ज्यादातर कार्ड पर एक ही आरोपी का फोटो लगा हुआ है। इसी आधार कार्ड से पैन कार्ड बनवाया और बैंकों में खाता खुलवाया। राजधानी में आईसीआईसीआई, केनरा, भारतीय स्टेट बैंक और आंध्रा बैंक में दर्जनभर से अधिक खाते खुलवाए। इन्हीं खातों में जालसाजी की रकम मंगाई जाती थी। 

गोमतीनगर के आलीशान बंगले मेें रहता है सरगना

fake call center get caught in lucknow
रिप्पल फर्जावाड़ा
पुलिस के मुताबिक, जालसाजों के इस गिरोह का सरगना अमित सिंह परिवार के साथ गोमतीनगर के विरामखंड-5 में आलीशान बंगले में रहता था। जिसका किराया 25 हजार रुपये प्रति महीने है। उसके पास कई लग्जरी गाड़ियां भी हैं। इसी शान शौकत के दम पर राजधानी के एक बड़े बिल्डर की बेटी से उसने हाल में शादी भी की है।

पुलिस के मुताबिक, मास्टर माइंड ने विनय कुमार के नाम से फर्जी पहचान पत्र बनाकर एसयूवी फाइनेंस कराई थी। वहीं साइबर सेल प्रभारी विजय वीर सिंह सिरोही ने बताया कि जालसाज ठगी की रकम को एक-दो दिन बाद दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित कर देते थे।

फर्जी कॉल सेंटर में 25 युवतियां और पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी काम करते थे। ये जालसाज खुद ही फर्जी पहचान पत्र तैयार करते थे। गिरोह के सभी सदस्य ठगी की रकम से ब्रांडेड कपड़े जूते और अन्य सामानों की खरीदारी करते थे। 

पुलिस के मुताबिक, विभूतिखंड में कुछ विवाद होने के बाद जालसाजों को मड़ियांव में रहने वाली महिला सपा नेता लता बंसल का घर सबसे सुरक्षित ठिकाना लगा। यहां 30 हजार रुपये हर महीने के किराए पर मकान ले लिया। आलीशान मकान के गेट पर हमेशा ताला बंद रहता था। आने-जाने के लिए छोटे गेट का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे झांसे में लेकर करते थे ठगी

fake call center get caught in lucknow
महिला नेता के पति उमेश बंसल की नाजा मार्केट में कंप्यूटर की दुकान है। उन्होंने ही जालसाजों को कंप्यूटर उपलब्ध कराए। जब पुलिस ने छापेमारी की तो कारोबारी व महिला नेता ने टीम को अर्दब में लेने की कोशिश की।

पुलिस ने घर में छापेमारी कर जालसाजों को दबोचा। इस बीच मकान मालिक ने मास्टर माइंड को छापेमारी की सूचना दी। इस पर वह परिवार सहित भाग निकला। फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करने वाली टीम को आईजी रेंज सुजीत कुमार पांडेय ने 20 और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने 10 हजार रुपये का इनाम दिया। 

ऐसे झांसे में लेकर करते थे ठगी
स्टेप-1
पहले जुटाते थे लोगों के बारे में जानकारी, फिर हनी ट्रैपिंग के जरिए फंसाते

एसएसपी के मुताबिक, पहले गिरोह के सदस्य कुछ प्राइवेट टेक्नोलॉजी कंपनियों से साठगांठ कर लोगों के बारे में जानकारी जुटाते थे। इसके बाद सेंटर पर काम करने वाले कॉल टेकर युवक-युवतियां देश भर में लोगों को फोन करते और उनसे लोन के बारे में बात करते। जो लोन लेने के लिए राजी हो जाता, उससे पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज मंगा लेते।

कागजी कार्रवाई पूरी कर ऋण मंजूरी हो जाने की सूचना देते। इसके बाद दूसरी टीम लोन लेने वाले को कॉल करती और उस रकम का बीमा कराने का लालच देती। बताया जाता कि यदि आप ऋण की रकम नहीं लौटा पाएंगे तो बीमा करने वाली कंपनी उसे चुकाएगी। उपभोक्ता को इस झांसे में फंसाने के बाद शुरू होती पैसे की वसूली। 

70 हजार रुपये तक ऐंठ लेते

fake call center get caught in lucknow
पहली वसूली 3000 रुपये और फिर 70 हजार रुपये तक ऐंठ लेते
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज राधारमण सिंह के मुताबिक, इस गिरोह के सदस्य लोन लेने वाले हर व्यक्ति से अलग-अलग वसूली करते थे। पंजीकरण के नाम पर पहली वसूली 3000 रुपये तक होती थी। इसके बाद सत्यापन के नाम पर कई किस्तों में 20 हजार रुपये तक वसूले जाते थे।

इसके बाद घूस देने के नाम पर रकम खातों में जमा कराई जाती थी। एक चेक की फोटो ग्राहक को भेजते थे और रकम का बीमा कराने के नाम पर पैसे वसूले जाते। कुल मिलाकर इस पूरी प्रक्रिया में एक व्यक्ति से 25 से 70 हजार रुपये तक वसूल लिए जाते थे। एक दिन में औसतन 10 से 15 लोगों को टारगेट करते थे। 

साइबर क्राइम सेल के नोडल अधिकारी व क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अभय कुमार मिश्र ने बताया कि जालसाजों ने सिटी बैंक के नाम से एक वेबसाइट बना रखी थी। ताकि लोगों को लगे कि उनकी बातचीत सीधे बैंक के अधिकारियों से हो रही है। www.online.citibank.co.in के नाम से साइट बनवाई थी। सिटी की स्पेलिंग में हेराफेरी कर दी थी। इसी साइट से पत्राचार होता था। जानकारी जुटाने के लिए एक नंबर पर व्हाट्सएप भी चलाते थे। 

कई राज्यों के लोगों को बनाया शिकार

fake call center get caught in lucknow
डेमो
गिरोह ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कोलकाता, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, तामिलनाडू, केरल, उड़ीसा, हिमाचलप्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य प्रदेशों में भी अपना जाल फैला रखा था। राजस्थान के अलवर निवासी राजेंद्र कुमार कोहली और कोलकाता के जॉय हैंड पल्ली बरासर रोड बराकपुर निवासी संजय विश्वास ने इस गिरोह के खिलाफ ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। 

अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्र ने बताया फर्जी कॉल सेंटर का गिरोह सुल्तानपुर निवासी दो सगे भाई अमित कुमार सिंह और अतुल कुमार सिंह चलाते थे। एएसपी पूर्वी के मुताबिक, दोनों भाइयों की नजर हमेशा सेंटर पर तैनात कर्मचारियों पर रहती थी।

निगरानी के लिए इन लोगों ने सेंटर के प्रवेश द्वार से लेकर हर कमरे में सीसीटीवी कैमरा लगा रखा था। जिसकी डीवीआर अमित सिंह के कमरे में रहती थी। किसी भी कर्मचारी पर संदेह होते ही उस पर सेंटर से लेकर घर तक नजर रखी जाती थी। सुरक्षा का इतना ख्याल रखा जाता था कि जिस सेंटर पर आने के बाद कर्मचारियों के मोबाइल बाहर एक जगह जमा करा लिए जाते थे। इसके बाद सेंटर के मोबाइल से ही बातचीत करने की अनुमति थी। 

सीओ के मुताबिक, एक जालसाज इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्रनेता भी शामिल है। सुल्तानपुर का रहने वाला अर्पित सिंह पिछले साल छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री के पद का प्रत्याशी था। गिरोह ने इस चुनाव में करीब 20 लाख रुपये बहाए, लेकिन वह हार गया। राजनीति में आकर पुलिस में दबाव की रणनीति के तहत अर्पित का समर्थन किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed