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कोरोना काल में इलाज के नाम पर वसूली : पांच साल बाद निजी अस्पताल के डॉक्टरों पर एफआईआर

Sun, 23 Aug 2026 02:35 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:35 AM IST
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Extortion in the name of treatment during the COVID-19 pandemic: FIR registered against private hospital doctors after five years.
प्रतीकात्मक।
तेलीबाग। कोरोना काल में इलाज के नाम पर वसूली और लापरवाही के एक मामले में पांच साल बाद एफआईआर दर्ज हुई है। उतरेठिया स्थित आशी क्लीनिक में सर्दी-जुकाम से पीड़ित 25 साल के युवक को कोरोना मरीज बताकर 10 दिन में 14 लाख रुपये वसूल लिए गए थे। बाद में युवक की मौत भी हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने दो साल बाद अस्पताल को दोषी ठहराया, लेकिन तब तक संचालक फरार हो गया था। इसके बाद तीन साल तक परिवार कार्रवाई के लिए भटकता रहा।
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इन्हौना, अमेठी निवासी सेना से सेवानिवृत्त बृजेश त्रिपाठी 2021 में बंगला बाजार की गीतापल्ली में रहते थे। अप्रैल 2021 में उनके बेटे कामाख्या नारायण त्रिपाठी (25) को सर्दी-जुकाम हुआ था। परिजन उन्हें आशी क्लीनिक ले गए, जहां डॉक्टर ने कोरोना बताकर भर्ती कर लिया। अस्पताल ने जांच और दवाओं के नाम पर 10 दिन में 14 लाख रुपये लिए, पर युवक की जान नहीं बची। परिजनों ने लापरवाही की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा ने जांच समिति गठित की थी। जांच रिपोर्ट 2023 में आई, जिसमें अस्पताल संचालक दोषी पाए गए।
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रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल संचालक डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ला और उनकी पत्नी डॉ. मनीषा शुक्ला अस्पताल बंद कर फरार हो गए। बृजेश त्रिपाठी 2023 से 2026 तक विभाग से कार्रवाई की मांग करते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर 21 अगस्त को तेलीबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि दोनों डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि तुरंत कार्रवाई होती तो आरोपी फरार नहीं होता।
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