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योगी सरकार देगी बड़ी राहत, रक्त संबंधों के बीच संपत्ति हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क में मिलेगी छूट
Fri, 11 Dec 2020 11:21 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 11 Dec 2020 11:21 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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प्रदेश सरकार अब प्रथम श्रेणी के रक्त संबंधियों के बीच अचल संपत्तियों के हस्तांतरण (दान अभिलेख) पर स्टांप शुल्क से छूट देने पर विचार कर रही है। स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने कहा कि प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल, रक्त संबंधों में अचल संपत्ति के हस्तानांतरण में स्टांप शुल्क से बचने के लिए लोग दानपत्र के स्थान पर वसीयत का सहारा लेते हैं। दान अभिलेख पर सामान्य बैनामा की भांति ही स्टांप शुल्क देय होता है। चूंकि वसीयतनामा वसीयतकर्ता के निधन के पश्चात ही प्रभावी होता है और वसीयत की रजिस्ट्री भी जरूरी नहीं है।
ऐसे में अधिकांश वसीयत विवादित हो जाती हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार अब वसीयत के स्थान पर दान अभिलेख के माध्यम से संपत्तियों के हस्तांतरण को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है।
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उन्होंने कहा कि छूट देने से राजस्व में कुछ कमी तो आएगी, लेकिन पारिवारिक विवादों में काफी कमी आएगी। वसीयत की प्रवृत्ति भी कम होगी।
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दरअसल, रक्त संबंधों में अचल संपत्ति के हस्तानांतरण में स्टांप शुल्क से बचने के लिए लोग दानपत्र के स्थान पर वसीयत का सहारा लेते हैं। दान अभिलेख पर सामान्य बैनामा की भांति ही स्टांप शुल्क देय होता है। चूंकि वसीयतनामा वसीयतकर्ता के निधन के पश्चात ही प्रभावी होता है और वसीयत की रजिस्ट्री भी जरूरी नहीं है।
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ऐसे में अधिकांश वसीयत विवादित हो जाती हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार अब वसीयत के स्थान पर दान अभिलेख के माध्यम से संपत्तियों के हस्तांतरण को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है।
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उन्होंने कहा कि छूट देने से राजस्व में कुछ कमी तो आएगी, लेकिन पारिवारिक विवादों में काफी कमी आएगी। वसीयत की प्रवृत्ति भी कम होगी।
नीलामी में खरीदी परिसंपत्ति पर उद्यमियों को दोहरे स्टांप शुल्क से मिलेगी निजात
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की औद्योगिक एवं निवेश नीतियों व नियमों के अनुसार सभी जिलों में उद्योगों को प्रोत्साहन और सुविधा दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में स्थापित इकाई की नीलामी में खरीदी गई परिसंपत्तियों पर उद्यमियों से विक्रय और पट्टा विलेख यानी दो बार स्टांप शुल्क लेने की व्यवस्था नियमानुसार खत्म कर दी जाए। यह केवल पट्टा हस्तांतरण की प्रक्रिया होनी चाहिए। इस पर केवल एक बार स्टांप शुल्क लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में स्थापित इकाई की नीलामी में खरीदी गई परिसंपत्तियों पर उद्यमियों से विक्रय और पट्टा विलेख यानी दो बार स्टांप शुल्क लेने की व्यवस्था नियमानुसार खत्म कर दी जाए। यह केवल पट्टा हस्तांतरण की प्रक्रिया होनी चाहिए। इस पर केवल एक बार स्टांप शुल्क लिया जाना चाहिए।