हर व्यक्ति को सीपीआर की जानकारी देने की जरूरत, इसके जरिए बचाई जा सकती है मरीजों की जान
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वह शुक्रवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में यूपी चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (यूपीएपीआई) की ओर से आयोजित यूपी एपीकॉन 2019 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सीपीआर (फुफुस्कीकरण) के दौरान सबसे जरूरी बात होती है सीने को दबाने की प्रक्रिया।
इसके जरिये हम हृदय एवं सांस की गति रुक जाने पर मरीज को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं। हृदय गति रुक जाने पर तीन से पांच मिनट के अंदर रक्त नहीं पहुंचता है तो मस्तिष्क मृत हो जाता है। ऐसी स्थिति में सीपीआर से मरीज को अधिक से अधिक ऑक्सीजन देने का प्रयास किया जाता है।
टीकाकरण से रोक सकते हैं संक्रमण
डॉ. ओपी चौधरी ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के सही निस्तारण से हेपेटाइटिस बी एवं सी के संक्रमण का खतरा कम होता है। कार्यक्रम के संयुक्त सचिव डॉ. केके सावलानी ने ट्रॉमा या आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान बचाने की तरकीब बताई। इसी तरह डॉ. संजय टंडन, डॉ. अभिषेक, डॉ. अर्जुन खन्ना, डॉ. प्रज्ञा पांडेय ने भी विचार रखे।
टीकाकरण से रोक सकते हैं संक्रमण
प्रदेश में पहली बार हो रहे इस आयोजन में जागरूकता से जुड़े हर पहलू को समाहित किया गया है। जहां तक बीमारियों को रोकने का सवाल है तो इसके लिए टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। चिकित्सक, चिकित्साकर्मियों और तीमारदारों के जरिये भी तमाम बीमारियां बढ़ती है। यदि शुरुआत से ही टीकाकरण होता रहे और समय-समय पर बूस्टर का इस्तेमाल किया जाए तो संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है। - डॉ. डी हिमांशु, आयोजन सचिव
घर में रखे जा सकते हैं वेंटिलेटर
टूडी इको से आसान हुआ दिल का इलाज
हृदय मरीजों के इलाज में टूडी इको काफी सहायक होता है। ऐसे में इसे हर हाल में कराना चाहिए। यह स्क्रीनिंग टूल की तरह काम करता है। एक तरह से यह हृदय का अल्ट्रासाउंड है। इससे पता चल जाता है कि मरीज की सांस फूलने की वजह क्या है। जब हृदय संबंधी दिक्कतों की वजह से सांस फूलती है तो मरीज को फ्लूड नहीं दिया जाता हैै। इसी तरह हार्ट चैंबर में रक्त का थक्का जमने संबंधी जानकारी भी इससे मिलती है। - डॉ. रुपाली खन्ना, एसजीपीजीआई
अब घर में भी वेंटिलेटर की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए नॉन- इनवेसिव वेंटिलेटर (एनआईवी) आ गया है। यह छोटे किस्म का वेंटिलेटर होता है। इसे बाईपेप भी कहा जाता है। इसमें मरीज को बेहोश नहीं करना पड़ता है, बल्कि एक मास्क होता है, उसे ही लगा दिया जाता है। यह निमोनिया, फेफड़ों में पानी भरने, स्वाइन फ्लू आदि से जुड़े मरीजों के लिए कारगर होता है। - डॉ. राजीव गर्ग, केजीएमयू