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शिकायतों की सुनवाई में नहीं होगी कोताही

Sun, 11 Aug 2013 10:12 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 11 Aug 2013 10:12 AM IST
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equal citizen charter will apply in all departments

आम जनता से जुड़े विभागों में आने वाली शिकायतों की सुनवाई में अब

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हीला-हवाली नहीं चलेगी।

सिटीजन चार्टर के तहत निर्धारित समय में उनकी शिकायतों का समाधान हो सकेगा। प्रदेश सरकार सूबे में केंद्र सरकार की तर्ज पर सिटीजन चार्टर लागू करने पर विचार कर रही है।

सरकार इसे बनाए गए अधिनियम के तहत लागू करना चाहती है, ताकि पूरे प्रदेश में सभी विभागों में एक समान सिटीजन चार्टर लागू हो सके। वर्तमान में कई विभागों ने अपना चार्टर बनाया है लेकिन उनमें समानता नहीं है। अब वे भी इसके दायरे में आ सकेंगे।


केंद्र सरकार ने आम जनता की सहूलियत के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में सिटीजन चार्टर लागू किया है। इसी की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने भी अधिनियम बनाकर सिटीजन चार्टर लागू किया है, लेकिन इस अधिनियम के बनने से पहले ही कई विभाग अपने-अपने स्तर से चार्टर को लागू कर चुके हैं।

किसे दी गई जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने इसकी जिम्मेदारी लोक सेवा प्रबंधन विभाग को सौंपी है। प्रदेश में करीब 25 विभाग ऐसे हैं जिन्होंने अपना चार्टर लागू कर दिया है लेकिन इसका खास फायदा सामने नहीं आया। हालांकि उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद में सिटीजन चार्टर लागू किया गया है, जिसके तहत तय समय में जनता को जानकारी देने का प्रावधान है।

परिषद जनता से सीधे संवाद भी करती है। वहीं, कई विभाग ऐसे हैं जहां किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है, जो जनता की समस्याओं का निस्तारण अपने स्तर से कर सकें।

लिहाजा अब प्रदेश सरकार चाहती है कि अधिनियम के तहत ही चार्टर लागू किया जाए। यह चार्टर शासन और निदेशालय स्तर पर लागू किया जाएगा और उसके बाद इसे जिला स्तर पर विभाग और जिलाधिकारी लागू करेंगे। किसी विभाग ने बेहतर चार्टर तैयार किया है तो उसे हर विभाग में लागू किया जाएगा।


यह है सिटीजन चार्टर

आम जनता से जुड़े विभागों में आने वाले व्यक्ति को अधिकारियों और कर्मचारियों केचक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए एक प्रकोष्ठ बनाकर चार्टर लागू किया जाता है।

कोई भी व्यक्ति प्रकोष्ठ में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और एक तय समय में उसे जवाब देने की विभाग की बाध्यता होती है। उसके बाद भी अगर किसी समस्या का निदान नहीं होता है तो व्यक्ति ऊपर के अधिकारियों से शिकायत कर सकता है।

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