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समाज कल्याण निदेशक की सिफारिश, ईओडब्ल्यू या एसआईटी से कराएं छात्रवृत्ति घोटाले की जांच
Sun, 11 Apr 2021 11:53 AM IST
ishwar ashish
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 11 Apr 2021 11:53 AM IST
सार
- समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने इस संबंध में शासन को भेजे पत्र में कहा है कि अनियमितता बड़ी है।
- निदेशक ने मथुरा में वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक सभी पाठ्यक्रमों में दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के तहत वितरित धनराशि की जांच का अनुरोध किया है।
- इसके अलावा निजी फॉर्मेसी संस्थान, आयुर्वेद एवं यूनानी पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले संस्थानों, बीएड संस्थानों और निजी महाविद्यालयों के खिलाफ भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं।
- मथुरा में स्थित पैरामेडिकल, जेएनएम और एएनएम पाठ्यक्रम संचालित करने वाले निजी संस्थानों में भी करोड़ों के वारे-न्यारे करने की शिकायतें हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की सिफारिश की गई है। समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने इस संबंध में शासन को भेजे पत्र में कहा है कि अनियमितता बड़ी है। विभागीय स्तर पर सीमित समय में सभी तथ्यों की सही से जांच संभव नहीं है।
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निदेशक ने मथुरा में वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक सभी पाठ्यक्रमों में दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के तहत वितरित धनराशि की जांच का अनुरोध किया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि मथुरा में आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति में अभी तक क्रमश: 22.99 करोड़ और 9.62 करोड़ रुपये का गबन सामने आ चुका है।
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इसके अलावा निजी फॉर्मेसी संस्थान, आयुर्वेद एवं यूनानी पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले संस्थानों, बीएड संस्थानों और निजी महाविद्यालयों के खिलाफ भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं।
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पत्र में यह भी: मथुरा में स्थित पैरामेडिकल, जेएनएम और एएनएम पाठ्यक्रम संचालित करने वाले निजी संस्थानों में भी करोड़ों के वारे-न्यारे करने की शिकायतें हैं। इसमें वर्ष 2016-17 व 2017-18 में जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। यह भी कहा गया है कि एमबीए, बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों में सीटों से अधिक छात्र दिखाकर गबन किया गया है। जांच के लिए अलग-अलग समितियां बनी हैं, लेकिन इसकी उच्चस्तरीय जांच की जरूरत है।