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Lucknow News: 10 वर्षों में तीन गुना बढ़ गए अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी
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लखनऊ। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बहुभाषिकता के साथ भारतीय भाषाओं को बढ़ाने की वकालत करती है। इसके लिए प्रयास भी हो रहे हैं, लेकिन स्नातक स्तर पर सिर्फ अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी बढ़ते जा रहे हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय में मूल्यांकन प्रभारी डॉ. अनित्य गौरव के मुताबिक परिसर में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या अब 60 फीसदी तक पहुंच चुकी है। 10 साल पहले यह आंकड़ा महज 20 फीसदी था।
लविवि के संबद्ध कॉलेज लखनऊ के साथ सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई और रायबरेली में हैं। हालांकि, इन जनपदों में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी 10 फीसदी के ही करीब हैं।
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प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में संख्या और भी अधिक
बीए, बीएससी, बीकॉम में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या 60 फीसदी के करीब है। बीबीए, एलएलबी ऑनर्स और बीफॉर्मा जैसे पाठ्यक्रमों में यह आंकड़ा 90 फीसदी के पार पहुंच जाता है।
किताबें मिलने भी समस्या
विद्यार्थियों के पास अंग्रेजी भाषा में उत्तर लिखना मजबूरी भी है। अब भी कई विषयों में हिंदी भाषा की उत्कृष्ट पुस्तकें नहीं हैं। वहीं, अंग्रेजी माध्यम की किताबों की पर्याप्त संख्या है। विद्यार्थी इन किताबों से पढ़ाई करते हैं, इस वजह से भी उत्तर अंग्रेजी में लिखते हैं। हालांकि, कई बार अंग्रेजी माध्यम की उत्तर पुस्तिकाओं में भाषा और व्याकरण संबंधी गलतियां काफी ज्यादा रहती हैं।
कोट-
विद्यार्थी हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में परीक्षा दे सकते हैं। प्रश्नपत्र दोनों भाषाओं में रहते हैं। अभिभावक भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में ही डालना पसंद कर रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालय की कोई भूमिका नहीं रहती है।
- प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि
लखनऊ विश्वविद्यालय में मूल्यांकन प्रभारी डॉ. अनित्य गौरव के मुताबिक परिसर में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या अब 60 फीसदी तक पहुंच चुकी है। 10 साल पहले यह आंकड़ा महज 20 फीसदी था।
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लविवि के संबद्ध कॉलेज लखनऊ के साथ सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई और रायबरेली में हैं। हालांकि, इन जनपदों में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी 10 फीसदी के ही करीब हैं।
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प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में संख्या और भी अधिक
बीए, बीएससी, बीकॉम में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या 60 फीसदी के करीब है। बीबीए, एलएलबी ऑनर्स और बीफॉर्मा जैसे पाठ्यक्रमों में यह आंकड़ा 90 फीसदी के पार पहुंच जाता है।
किताबें मिलने भी समस्या
विद्यार्थियों के पास अंग्रेजी भाषा में उत्तर लिखना मजबूरी भी है। अब भी कई विषयों में हिंदी भाषा की उत्कृष्ट पुस्तकें नहीं हैं। वहीं, अंग्रेजी माध्यम की किताबों की पर्याप्त संख्या है। विद्यार्थी इन किताबों से पढ़ाई करते हैं, इस वजह से भी उत्तर अंग्रेजी में लिखते हैं। हालांकि, कई बार अंग्रेजी माध्यम की उत्तर पुस्तिकाओं में भाषा और व्याकरण संबंधी गलतियां काफी ज्यादा रहती हैं।
कोट-
विद्यार्थी हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में परीक्षा दे सकते हैं। प्रश्नपत्र दोनों भाषाओं में रहते हैं। अभिभावक भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में ही डालना पसंद कर रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालय की कोई भूमिका नहीं रहती है।
- प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि

गुरु़द्वारा श्री गुऱनानक देव जी दरबार में संगत में बैठे श्रद्धालु। अमर उजाला

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