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जिला जेल में ड्यूटी के दौरान कर्मचारी पहनेंगे बॉडी वॉर्न कैमरा
Fri, 01 Jan 2021 11:00 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 01 Jan 2021 11:00 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
जिला जेल में ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों व बंदियों के बीच होने वाले विवाद को कम करने और सुरक्षा केलिए जेल प्रशासन ने नई पहल की है। इसके तहत ड्यूटी के दौरान जेल कर्मचारी बॉडी वॉर्न कैमरा लगायेंगे। इसकी शुरूआत जल्द ही लखनऊ के जिला जेल में की जाएगी। हालांकि यह योजना प्रदेश के 10 जिला जेलों के लिए पहले चरण में लागू करने की तैयारी है।
जेल की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने नई योजना बनाई है। इसके तहत कर्मचारियों को बॉडी वॉर्न कैमरा लगाकर ही ड्यूटी करना होगा। इस योजना को लागू करने के लिए पहले चरण में प्रदेश के 10 जेलों को चयन किया गया है। जिसमें लखनऊ का जिला जेल भी शामिल हैं। जेल के कर्मचारी बॉडी वार्न कैमरे पहनकर जेल के अंदर ड्यूटी करेंगे। कैमरे में बंदियों के सारी गतिविधियों उनके व्यवहार और उनसे मिलने के लिए आने वाले लोगों तक की रिकार्डिंग होगी। यह रिकार्डिंग सुरक्षित की जाएगी।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पहल पर यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश समेत राजस्थान, तेलंगाना और पंजाब में भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश को इसके लिए 80 लाख रुपये की मंजूरी की गई है। बंदियों को बाहर के अपराधियों से संपर्क रखने पर रोक लगाने में यह व्यवस्था कारगर साबित होगी।
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जेल कर्मचारी जब बॉडी वार्न कैमरा पहनकर ड्यूटी करेंगे तो ड्यूटी के दौरान जेल की सारी गतिविधियां, कैदियों का व्यवहार आदि सब की कैमरे में कैद होगा। इसकी भी जानकारी होगी कि किस कैदी से मिलने के लिए उसका कौन आ रहा है। कैदी के व्यवहार से लेकर हर गतिविधियों पर चलते-फिरते कैमरे नजर रखी जाएगी। इन कैमरों की रिकार्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी। ड्यूटी शुरू होते ही कर्चमारी इसे धारण कर लेगा। कर्मचारी की ड्यूटी समाप्ति के समय ही बंद किए जाएंगे।
विशेष परिस्थितियों जैसे बंदियों या कर्मचारी को निजता की आवश्यकता हो जैसे वाशरूम जाने हेतु ही थोड़ी देर के लिए कैमरे बंद कर सकते हैं। पर इसकी सूचना कर्मचारियों को कंट्रोल रूम को देनी पड़ेगी। इसके लिए जेल में एक कंट्रोल रूम भी जेल में ही बनाया जाएगा। एक अधिकारी को कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी दी जाएगी। कैमरे में कैद रिकार्डिंग को मनोचिकित्सक व एक्सपर्ट देखेंगे। वह इसे देखकर यह पता लगाएंगे कि किस कैदी का क्या व्यवहार है। उसके अनुसार कैदी को सुधारने के तौर तरीके भी बताएंगे। जिससे कैदियों को अपराध की दुनियां से बाहर निकाला जा सके।
जेल प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक इसकी शुरूआत पायलट प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है। इस योजना में लखनऊ के अलावा प्रयागराज का केंद्रीय कारागार नैनी, सीतापुर, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, बांदा, वाराणसी, मुरादाबाद, अलीगढ़ और मुज्जफरनगर जेल को चयनित किया गया है। इन जेलों में योजना के सफल होने के बाद अन्य जेलों में इसे लागू किया जाएगा।
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जेल की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने नई योजना बनाई है। इसके तहत कर्मचारियों को बॉडी वॉर्न कैमरा लगाकर ही ड्यूटी करना होगा। इस योजना को लागू करने के लिए पहले चरण में प्रदेश के 10 जेलों को चयन किया गया है। जिसमें लखनऊ का जिला जेल भी शामिल हैं। जेल के कर्मचारी बॉडी वार्न कैमरे पहनकर जेल के अंदर ड्यूटी करेंगे। कैमरे में बंदियों के सारी गतिविधियों उनके व्यवहार और उनसे मिलने के लिए आने वाले लोगों तक की रिकार्डिंग होगी। यह रिकार्डिंग सुरक्षित की जाएगी।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पहल पर यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश समेत राजस्थान, तेलंगाना और पंजाब में भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश को इसके लिए 80 लाख रुपये की मंजूरी की गई है। बंदियों को बाहर के अपराधियों से संपर्क रखने पर रोक लगाने में यह व्यवस्था कारगर साबित होगी।
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जेल कर्मचारी जब बॉडी वार्न कैमरा पहनकर ड्यूटी करेंगे तो ड्यूटी के दौरान जेल की सारी गतिविधियां, कैदियों का व्यवहार आदि सब की कैमरे में कैद होगा। इसकी भी जानकारी होगी कि किस कैदी से मिलने के लिए उसका कौन आ रहा है। कैदी के व्यवहार से लेकर हर गतिविधियों पर चलते-फिरते कैमरे नजर रखी जाएगी। इन कैमरों की रिकार्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी। ड्यूटी शुरू होते ही कर्चमारी इसे धारण कर लेगा। कर्मचारी की ड्यूटी समाप्ति के समय ही बंद किए जाएंगे।
विशेष परिस्थितियों जैसे बंदियों या कर्मचारी को निजता की आवश्यकता हो जैसे वाशरूम जाने हेतु ही थोड़ी देर के लिए कैमरे बंद कर सकते हैं। पर इसकी सूचना कर्मचारियों को कंट्रोल रूम को देनी पड़ेगी। इसके लिए जेल में एक कंट्रोल रूम भी जेल में ही बनाया जाएगा। एक अधिकारी को कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी दी जाएगी। कैमरे में कैद रिकार्डिंग को मनोचिकित्सक व एक्सपर्ट देखेंगे। वह इसे देखकर यह पता लगाएंगे कि किस कैदी का क्या व्यवहार है। उसके अनुसार कैदी को सुधारने के तौर तरीके भी बताएंगे। जिससे कैदियों को अपराध की दुनियां से बाहर निकाला जा सके।
जेल प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक इसकी शुरूआत पायलट प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है। इस योजना में लखनऊ के अलावा प्रयागराज का केंद्रीय कारागार नैनी, सीतापुर, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, बांदा, वाराणसी, मुरादाबाद, अलीगढ़ और मुज्जफरनगर जेल को चयनित किया गया है। इन जेलों में योजना के सफल होने के बाद अन्य जेलों में इसे लागू किया जाएगा।