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Lucknow News: फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले कर्मचारी हटाया

Thu, 22 May 2025 02:28 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 May 2025 02:28 AM IST
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Employees who made fake death certificates were removed
लखनऊ। पार्षद का फर्जी लेटर पैड और फर्जी साइन बनाकर गलत तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले कार्यदायी संस्था से तैनात कर्मचारी को नगर निगम ने बुधवार को नौकरी से हटा दिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कर्मचारी ने जोनल अधिकारी और कर अधीक्षक के भी फर्जी हस्ताक्षर बनाए थे। इस मामले में आरोपी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने को लेकर पार्षद ने नगर आयुक्त को मांग पत्र भी दिया है।
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जोनल अधिकारी जोन तीन अमरजीत सिंह ने बताया कि कूटरचित दस्तावेजों के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले कार्यदायी संस्था से तैनात अरविंद को नौकरी से हटा दिया गया। महानगर वार्ड के भाजपा पार्षद हरिश्चंद्र लोधी की शिकायत के बाद जब दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि उसने जोनल अफसर और कर अधीक्षक के भी फर्जी हस्ताक्षर बनाए थे।
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शुरुआती जांच में सामने आया कि निर्मला शुक्ला नामक जिस महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र महानगर सेक्टर-बी पोस्ट ऑफिस के पास स्थित घर में मौत होने के आधार पर बनाया जा रहा था, उसकी मौत पीजीआई में हुई थी। पार्षद ने बताया कि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए नगर आयुक्त गौरव कुमार से मिलकर मांग की गई है। उनको पत्र भी दिया गया है।
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ऐसे पकड़ में आया मामला
जोनल अफसर ने बताया कि मामला तब पकड़ में आया जब एसडीएम के यहां से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर कर्मचारी उनसे ओटीपी लेने आया। जब उन्होंने फाइल देखी तो पता चला कि एसडीएम से प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति को लेकर जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उस पर तो उन्होंने हस्ताक्षर ही नहीं किए थे। इस बारे में कर अधीक्षक से पूछा गया तो उन्होंने भी इंकार किया। इसके बाद प्रमाण पत्र को जारी करने पर रोक लगाई गई और कर्मचारी को नौकरी से हटाया गया।


2021 में हुई थी मौत, अब बनवाया जा रहा था प्रमाण पत्र
जिस महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा रहा था, वह अंबेडकर नगर की रहने वाली थी। उसकी मौत 20 मई 2021 को बताई गई थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चार साल तक मृत्यु प्रमाण पत्र क्यों नहीं बनवाया। जानकारों ने बताया कि यदि किसी की मृत्यु पीजीआई में हुई है तो उसका प्रमाण पत्र पीजीआई से ही जारी होता है।

नगर निगम से जारी नहीं किया जा सकता क्योंकि साल 2019 से केंद्र सरकार ने यह व्यवस्था लागू कर दी थी कि सरकारी अस्पताल, मेडिकल काॅलेज और संस्थानों में यदि जन्म-मृत्यु होती है तो प्रमाण पत्र वहीं से जारी किया जाएगा। अगर घर में हुई है या प्राइवेट अस्पताल में तो नगर निगम जारी करेगा। ऐसे में फर्जी तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराकर कोई फर्जीवाड़ा किए जाने की तैयारी थी।



प्राइवेट कर्मचारी कर रहे धांधली
नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि मृत्यु या जन्म के 21 दिन के अंदर प्रमाण पत्र जारी हो जाता है तो जांच की जरूरत नहीं पड़ती है। उसके बाद जांच कराई जाती है। इसमें एक साल पुराने प्रमाण पत्र के मामले में एसडीएम से अनुमति ली जाती है। उसके लिए नगर निगम से रिपोर्ट भेजी जाती है, जिसके लिए नगर निगम के सफाई निरीक्षकों को जांच कर रिपोर्ट देनी होती है। इसके लिए कई जोन में प्राइवेट कर्मचारी लगाए हैं जो यह फर्जीवाड़ा करते हैं।
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