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राहत: इस साल भी यूपी में नहीं बढ़ेंगी बिजली दरें, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया टैरिफ ऑर्डर

Fri, 30 Jul 2021 01:47 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 30 Jul 2021 01:47 AM IST
सार

यूपी विधानसभा चुनाव व कोरोना से पैदा हुए हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इस वर्ष भी बिजली दरें न बढ़ाने का निर्णय लिया है।

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Electricity proces will not be increased in uttar Pradesh this year.
- फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा और कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले साल की तरह इस साल भी बिजली दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 2021-22 में मौजूदा दरें ही प्रभावी रहेंगी। यही नहीं पावर कॉर्पोरेशन की ओर से श्रेणियों के स्लैब में परिवर्तन तथा रेगुलेटरी एसेट के आधार पर दरों में 10-12 फीसदी तक की वृद्धि के प्रस्ताव को भी आयोग ने खारिज कर दिया है। दरों में वृद्धि न किए जाने की वजह आगामी विधानसभा चुनाव को भी माना जा रहा है।

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विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों की ओर से 2021-22 के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर), 2020-21 की एनुअल परफार्मेंस रिव्यू, 2019-20 के लिए दाखिल ट्रू-अप (अनुमोदित व वास्तविक खर्च में अंतर) तथा स्लैब परिवर्तन याचिका पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाते हुए टैरिफ आर्डर जारी कर दिया। खास बात यह है कि 49 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के रेगुलेटरी एसेट का दावा करने वाली बिजली कंपनियों पर इस साल भी उपभोक्ताओं की करीब 1059 करोड़ रुपये की देनदारी निकल आई है। मौजूदा सरकार में अभी तक केवल एक बार वर्ष 2019-20 में बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि सभी बिजली कंपनियों के गैप/सरप्लस की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पिछले साल की ही दरों को 2021-22 में जारी रखा गया है। साथ ही आयोग ने बिजली कंपनियों के टैरिफ श्रेणी व उपश्रेणी (स्लैब) को तर्कसंगत बनाने तथा रेगुलेटरी एसेट के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया है।
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71964 करोड़ एआरआर अनुमोदित
नियामक आयोग ने 2021-22 के लिए बिजली कंपनियों की तरफ से दाखिल 81,901.24 करोड़ रुपये एआरआर की जगह 71963.91 करोड़ रुपये ही अनुमोदित किया है। इसी तरह बिजली कंपनियों ने 16.64 प्रतिशत वितरण लाइन हानियों के आधार पर एआरआर प्रस्ताव दाखिल किया था जिसे आयोग ने कम करते हुए मात्र 11.08 प्रतिशत ही अनुमोदित किया है। इससे बिजली कंपनियों पर 2021-22 में फिर उपभोक्ताओं की लगभग 1059 करोड़ रुपये की देनदारी निकल रही है। आयोग  ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि बिलिंग व राजस्व वसूली में अक्षमता से होने वाले घाटे को एआरआर में अनुमोदित नहीं किया गया है। इससे ईमानदार उपभोक्ता हतोत्साहित होते हैं और बकायेदारों को बिल जमा न करने के  लिए प्रोत्साहन मिलता है। आयोग का कहना है कि 2020-21 के मुकाबले इस साल क्रास सब्सिडी सरचार्ज (सीएसएस) कम किया गया है।

उपभोक्ता नहीं वहन करेंगे स्मार्ट मीटर का खर्च

आयोग ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर पर आने वाला कोई भी खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। पूर्व में अनुमोदित किए गए स्मार्ट मीटर रोल आउट प्लान में यह स्पष्ट था कि इसके लिए राशि की व्यवस्था बिलिंग और राजस्व वसूली क्षमता बढ़ाकर यानी वाणिज्यिक हानियों की कमी से होने वाले लाभ के जरिये की जाएगी।

किसानों को राहत
नियामक आयोग ने टैरिफ  आर्डर में साफ किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के निजी नलकूपों पर भले ही मीटर लगवा दिए जाएं, लेकिन उनसे वसूली अनमीटर्ड श्रेणी की दर 170 रुपये प्रति हार्सपावर प्रतिमाह पर ही की जाएगी।

अगस्त के दूसरे सप्ताह से प्रभावी हो सकती हैं दरें
नियामक आयोग द्वारा 2021-22 के लिए घोषित बिजली दरें अगस्त के दूसरे सप्ताह से प्रभावी हो सकती हैं। अब सिर्फ टैरिफ आर्डर के सार्वजनिक प्रकाशन की कानूनी औपचारिकता भर पूरी की जानी है। सार्वजनिक प्रकाशन के सात दिन बाद दरें प्रभावी हो जाएंगी। आयोग ने बृहस्पतिवार को टैरिफ आर्डर जारी करते हुए पावर कार्पोरेशन को हिंदी व अंग्रेजी के समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन कराने के निर्देश दिए हैं। चूंकि दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है इसलिए कॉर्पोरेशन को भी इसके लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी। विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार टैरिफ आर्डर जारी होने के तीन दिन के भीतर इसका सार्वजनिक प्रकाशन कराया जाना चाहिए और प्रकाशन की तिथि के सात दिन बाद दरें स्वत: प्रभावी हो जाती हैं।

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