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बिजली कंपनियों ने घाटे की भरपाई का फैसला नियामक आयोग पर छोड़ा
Tue, 28 Jul 2020 03:47 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 28 Jul 2020 03:47 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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बिजली कंपनियों ने 2019-20 में लगभग 4500 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई का फैसला राज्य विद्युत नियामक आयोग पर छोड़ दिया है। कंपनियों ने 2019-20 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में कमियों पर नियामक आयोग में जवाब दाखिल कर दिया है लेकिन घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव नहीं सौंपा है।
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बिजली कंपनियों की तरफ से कहा गया है कि घाटे की भरपाई के लिए आयोग अपने स्तर से निर्णय करे। बिजली कंपनियों की ओर से दाखिल एआरआर में इस साल लाइन हानियों में करीब छह फीसदी की वृद्धि का अनुमान जताते हुए आमदनी और खर्च में लगभग 4500 करोड़ रुपये का अंतर रहने की संभावना जताई गई है।
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दिलचस्प बात यह है कि इस घाटे की भरपाई के लिए बिजली कंपनियों ने श्रेणीवार दरों में कोई वृद्धि प्रस्तावित नहीं की है। सुधार के बड़े-बड़े दावों को बावजूद इस साल वितरण हानियां 17.90 प्रतिशत प्रस्तावित की गई हैं जबकि पिछले साल आयोग ने वितरण हानियां 11.96 प्रतिशत अनुमोदित की थीं। अब दरों का मामला आयोग के पाले में आ गया है। सूत्रों के अनुसार आयोग जल्द ही दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगा।
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चोर दरवाजे से बिजली दरें बढ़वाने की साजिश का आरोप
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि टैरिफ प्रस्ताव न दाखिल करके बिजली कंपनियां चोर दरवाजे से दरें बढ़वाने की साजिश कर रही हैं। विद्युत नियामक आयोग को मनगढंत आंकड़ों पर आधारित एआरआर को खारिज करते हुए उदय व ट्रू-अप में 2017-18 तक का बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे 13337 करोड़ रुपये का लाभ दिलाना चाहिए। पिछले टैरिफ ऑर्डर में आयोग ने यह कहा भी था।
यह राशि अब 14782 करोड़ रुपये हो गई है। अगर आयोग इस पूरी राशि का लाभ उपभोक्ताओं को दे तो दरों में 25 प्रतिशत की कमी होगी। बिजली कंपनियों के 4500 करोड़ रुपये के घाटे को घटा दिया जाए तो भी दरों में 16 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए।
यह राशि अब 14782 करोड़ रुपये हो गई है। अगर आयोग इस पूरी राशि का लाभ उपभोक्ताओं को दे तो दरों में 25 प्रतिशत की कमी होगी। बिजली कंपनियों के 4500 करोड़ रुपये के घाटे को घटा दिया जाए तो भी दरों में 16 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए।