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एडीआर ने खोली पोल, दागियों को सबसे ज्यादा टिकट सपा ने बांटे, बसपा दूसरे नंबर पर
Sat, 02 Mar 2019 12:02 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 02 Mar 2019 12:02 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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साथ सुथरे और बेदाग उम्मीदवारों की वकालत करने वाली सभी पार्टियां चुनाव के वक्त दागियों को हाथों हाथ लेती हैं। पिछले तीन लोकसभा और तीन विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ( सपा) ने सबसे अधिक अपराधिक मामलों में फंसे उम्मीदवारों को टिकट दिए।
2004, 2009, 2014 के संसदीय चुनाव और 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के 40 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके बाद बसपा दूसरे भाजपा तीसरे, कांग्रेस चौथे और रालोद पांचवे नंबर पर रहा।
इसका खुलासा उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में हुआ जिसमें उत्तर प्रदेश में पिछले 15 साल के संसदीय और विधानसभा, दोनों चुनावों का विश्लेषण किया गया है। इसमें 2004 से संसदीय और विधान सभा चुनाव लड़ने वाले 1971 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया है। इसमें 1443 सांसद-विधायक हैं।
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उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच के संजय सिंह और एडीआर के प्रो. त्रिलोचन शास्त्री ने बताया कि विधानसभा चुनाव में 16668 उम्मीदवारों और 1209 निर्वाचित विधायकों का विश्लेषण किया गया। कुल उम्मीदवारों में 2893 ने (17 फीसदी) ने आपराधिक मामले और 1637 (10 फीसदी) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए। 2007 से विश्लेषण किए गए 1208 में से 463 विधायकों (38 फीसदी) ने अपने ऊपर आपराधिक और 270 विधायकों (22 फीसदी) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए।
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2004, 2009, 2014 के संसदीय चुनाव और 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के 40 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके बाद बसपा दूसरे भाजपा तीसरे, कांग्रेस चौथे और रालोद पांचवे नंबर पर रहा।
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इसका खुलासा उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में हुआ जिसमें उत्तर प्रदेश में पिछले 15 साल के संसदीय और विधानसभा, दोनों चुनावों का विश्लेषण किया गया है। इसमें 2004 से संसदीय और विधान सभा चुनाव लड़ने वाले 1971 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया है। इसमें 1443 सांसद-विधायक हैं।
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उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच के संजय सिंह और एडीआर के प्रो. त्रिलोचन शास्त्री ने बताया कि विधानसभा चुनाव में 16668 उम्मीदवारों और 1209 निर्वाचित विधायकों का विश्लेषण किया गया। कुल उम्मीदवारों में 2893 ने (17 फीसदी) ने आपराधिक मामले और 1637 (10 फीसदी) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए। 2007 से विश्लेषण किए गए 1208 में से 463 विधायकों (38 फीसदी) ने अपने ऊपर आपराधिक और 270 विधायकों (22 फीसदी) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए।
महिला प्रतिनिधित्व घटा :
डेमो
- फोटो : डेमो
रिपोर्ट में महिला उम्मीदवारों की संख्या में बेहद कमी मिली। सभी पार्टियों के कुल 19971 में से 1484 (7 %) ही महिला उम्मीदवार थीं। कुल 1443 सांसदों और विधायकों में महिलाओं की संख्या मात्र 131 (9 %) ही थी।
मेनका, मुलायम, राहुल, सोनिया की संपत्ति बढ़ी
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
2004 से 2014 में लगातार तीन बार निर्वाचित पांच सांसदों की संपत्ति में औसतन 510 फीसदी की वृद्धि हुई है। मेनका गांधी की 2004, 2009 और 2014 में सांसदी जीतने के बाद संपत्ति में 30 करोड़ से ऊपर का इजाफा हुआ है।
2004 में जहां उनकी संपत्ति 6.67 करोड़ थी, वह 2014 में बढ़कर 37.41 करोड़ से अधिक हो गई। मुलायम सिंह की संपत्ति में 14 करोड़, राहुल और सोनिया गांधी की संपत्ति में आठ-आठ करोड़ रुपये और ब्रजभूषण शरण सिंह की संपत्ति में दो करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2004 से संसदीय और विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 19.971 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया है। इनमें 1443 सांसद या विधायक है। रिपोर्ट के अनुसार बसपा ने सबसे अधिक 59 फीसदी करोड़पति उम्मीदवारों को टिकट दिए।
सपा ने 55, भाजपा ने 52, कांग्रेस ने 42 और रालोद ने 29 फीसदी करोड़पति उम्मीदवारों को टिकट दिया। इनमें से भाजपा के 73 फीसदी, सपा के 58, बसपा के 43, कांग्रेस के 58 और रालोद के 64 फीसदी करोड़पति सांसद/ विधायक थे।
2004 में जहां उनकी संपत्ति 6.67 करोड़ थी, वह 2014 में बढ़कर 37.41 करोड़ से अधिक हो गई। मुलायम सिंह की संपत्ति में 14 करोड़, राहुल और सोनिया गांधी की संपत्ति में आठ-आठ करोड़ रुपये और ब्रजभूषण शरण सिंह की संपत्ति में दो करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2004 से संसदीय और विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 19.971 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया है। इनमें 1443 सांसद या विधायक है। रिपोर्ट के अनुसार बसपा ने सबसे अधिक 59 फीसदी करोड़पति उम्मीदवारों को टिकट दिए।
सपा ने 55, भाजपा ने 52, कांग्रेस ने 42 और रालोद ने 29 फीसदी करोड़पति उम्मीदवारों को टिकट दिया। इनमें से भाजपा के 73 फीसदी, सपा के 58, बसपा के 43, कांग्रेस के 58 और रालोद के 64 फीसदी करोड़पति सांसद/ विधायक थे।