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सीएम योगी से मिलकर बदले निर्वाचन आयुक्त के सुर, बोले- पुराने ईवीएम चुनाव कराएंगे

Sun, 16 Apr 2017 11:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Apr 2017 11:26 AM IST
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 Election commissioner of Uttar Pradesh says we are not against conducting election with old EVM.

राज्य निर्वाचन आयोग के सुर शनिवार को बदल गए। दो दिन पहले मॉडल-1 ईवीएम से नगर निगमों के चुनाव न कराने की बात कहने वाले आयोग ने अब कहा है कि वह पुरानी ईवीएम से चुनाव कराने के लिए तैयार है। हालांकि यह भी कहा कि पुरानी ईवीएम की गुणवत्ता की गारंटी भारत निर्वाचन आयोग को ही लेनी चाहिए।

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दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वर्ष 2006 से पहले की मॉडल-1 ईवीएम दी गई तो वह बैलेट पेपर से नगर निगमों के चुनाव कराएगा, क्योंकि मॉडल-1 ईवीएम का इस्तेमाल अब केंद्रीय चुनाव आयोग बंद कर चुका है। वहां अब मॉडल-2 ईवीएम का इस्तेमाल हो रहा है।
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आयोग का यह बयान ऐसे समय आया जब विपक्षी पार्टियां ईवीएम की गुणवत्ता को लेकर तरह-तरह के सवाल उठा रही हैं। आयोग के इस बयान के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार हरकत में आई।
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शुक्रवार को मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर कहा कि उनके बयान से ऐसा लग रहा है कि सरकार ईवीएम से चुनाव कराने के खिलाफ है।

निर्वाचन आयुक्त से हुई सीएम योगी की मुलाकात

 Election commissioner of Uttar Pradesh says we are not against conducting election with old EVM.
डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला

इसी के बाद शनिवार सुबह राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई। आधे घंटे की इस मुलाकात में उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष रखा।

साथ ही बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग भी पुरानी ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर चुका है। इसलिए उन्होंने नई ईवीएम देने की मांग की है।

राज्य निर्वाचन आयोग भी चाहता है कि नगर निगमों के चुनाव ईवीएम से ही कराए जाएं, लेकिन अभी तक केंद्रीय चुनाव आयोग ने ईवीएम देने के संबंध में अपने निर्णय से अवगत नहीं कराया है।

क्या है पुरानी व नई ईवीएम का विवाद

 Election commissioner of Uttar Pradesh says we are not against conducting election with old EVM.

केंद्रीय चुनाव आयोग के पास इस समय मॉडल-1 व मॉडल-2 ईवीएम हैं। मॉडल-1 ईवीएम वर्ष 2006 से पहले की बनी हुई हैं।

केंद्रीय आयोग ने वर्ष 2014 के सामान्य निर्वाचन में इनका आखिरी बार इस्तेमाल किया था। ये मशीनें 15 साल की लाइफ पूरी कर चुकी हैं। इनमें कम सिक्योरिटी फीचर हैं।
 
मॉडल-1 ईवीएम में वीवीपैट मशीन नहीं लग सकती है। इसलिए चुनाव आयोग ने इन मशीनों का प्रोडक्शन बंद कर मॉडल-2 ईवीएम का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इसके साथ ही वर्ष 2013 से  मॉडल-3 ईवीएम का निर्माण भी शुरू हो गया है।

नई ईवीएम में ऐसे सिक्योरिटी फीचर डाले गए हैं कि इन मशीनों में यदि कोई छेड़छाड़ करेगा तो ये मशीनें अपने आप काम करना बंद कर देंगी। केंद्र सरकार पहले ही मॉडल-3 ईवीएम के लिए दो हजार करोड़ रुपये जारी कर चुकी है।

यूपी के लिए आवंटित ईवीएम महाराष्ट्र भेजीं

 Election commissioner of Uttar Pradesh says we are not against conducting election with old EVM.

राज्य निर्वाचन आयोग ने सबसे पहले 18 अक्तूबर 2016 को केंद्रीय चुनाव आयोग को नगर निगमों के चुनाव के लिए ईवीएम उपलब्ध कराने की मांग की थी। इस पर 10 नवंबर को केंद्रीय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश को मॉडल-2 ईवीएम उपलब्ध न होने के कारण मॉडल-1 ईवीएम मध्य प्रदेश से देने के लिए आवंटित कर दीं।

26 नवंबर को इसकी सूचना मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य निर्वाचन आयोग को दी। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने आठ दिसंबर को एक बार फिर चुनाव आयोग को मॉडल-2 ईवीएम देने का अनुरोध किया।

वहीं, भारत निर्वाचन आयोग ने 31 जनवरी 2017 को मध्य प्रदेश की मॉडल-1 ईवीएम महाराष्ट्र के राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा दीं। इसकी जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 28 मार्च 2017 के पत्र में राज्य निर्वाचन आयोग को दी।

इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 31 मार्च को एक बार फिर भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर ईवीएम की मांग की है। इसमें कहा है कि जनवरी से मार्च तक विधानसभा चुनाव चलने के कारण मध्य प्रदेश से आवंटित ईवीएम नहीं मंगाई गई थीं। अब सूबे को नए सिरे से ईवीएम आवंटित करने की मांग की गई है। हालांकि इसका जवाब अभी तक नहीं आया है।

मई के अंत में जारी होनी है अधिसूचना

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सूबे में 15 जुलाई से पहले नगर निकायों का गठन होना है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग को मई के अंत तक अधिसूचना जारी करनी होगी। आयोग के पास अब 35-40 दिन ही बचे हैं। उसे सूबे के 14 नगर निगमों में चुनाव ईवीएम से कराना है। यदि समय पर ईवीएम न आईं तो आयोग को दिक्कत आ सकती है।

क्या कहते हैं कि राज्य निर्वाचन आयुक्त
इस पर राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त एसके अग्रवाल का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग कभी भी ईवीएम से चुनाव कराने के विरोध में नहीं रहा। हमने सिर्फ यह कहा था कि जो ईवीएम भारत निर्वाचन आयोग हमें दे रहा है, उसकी गारंटी तो उसे ही लेनी चाहिए।

भारत निर्वाचन आयोग अब खुद मॉडल-1 ईवीएम का इस्तेमाल नहीं करता है। हमने आयोग से ईवीएम आवंटित करने को दोबारा पत्र भेजा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

15 जुलाई से पहले सूबे में चुनाव कराकर नगर निकायों के गठन का काम पूरा होना है। इसलिए ईवीएम जल्द आवंटित करने की मांग की गई है। यदि ऐसा न हुआ तो फिर हमें दूसरे विकल्पों पर विचार करना होगा।

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