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Lucknow News: आठ सुधारों ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में राजधानी को फिर बनाया अव्वल
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लखनऊ। नगर निगम और अन्य विभागों की ओर से किए गए आठ सुधारों के कारण स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ एक बार फिर अव्वल आया है। इनमें सफाई, मलबा निस्तारण और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे उपाय प्रमुख रहे। शिवरी प्लांट की सुधरी सेहत ने भी हवा की गुणवत्ता सुधारने में भूमिका निभाई। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पिछले साल शहर 15वें पायदान पर था।
अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव ने बताया कि हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए छह स्थानों पर स्टेशन बनाए गए हैं। इन्हें स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम से भी जोड़ा गया है। एयर प्यूरीफायर भी हवा की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं। डॉ. राव ने बताया कि रोड स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल से धूल कम हुई है। इसके अलावा अटल उदय वन व अन्य वाटिकाएं बनाकर लाखों पौधे भी लगाए गए हैं। बीते आठ वर्षों में करीब 1500 पार्कों का सुंदरीकरण कराया गया।
अपर नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में 52 कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इससे कचरा ले जाने वाली गाड़ियों की संख्या 240 से 150 रह गई है। लखनऊ यूपी का पहला शहर बन गया है जहां रोजाना 2550 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। कोरोना काल में सैनिटाइजेशन के लिए नगर निगम ने चार एंटी स्मॉग गन और स्प्रिंकल वाले 20 वाटर टैंकर खरीदे थे। अब इनका इस्तेमाल सड़कों पर पानी के छिड़काव और पेड़ों की धुलाई में हो रहा है।
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इन प्रयासों ने सुधारी हवा की सेहत
सड़कों की धूल खत्म : सड़कों की सफाई के लिए 97 ई मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। इनमें पानी के जेट से धुलाई भी होती है। इससे पीएम10 के स्तर में कमी आई है। इसके अलावा 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का किया गया।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा : 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग पॉइंट बनाए गए। शहर में 140 ई बसें दौड़ रही हैं। डीजल गाड़ियों को हटाकर 1100 इलेक्ट्रिक वाहन कूड़ा कलेक्शन व उठान के काम में लगाए गए।
हरियाली को बढ़ावा : वर्टिकल गार्डन, सड़कों व गोमती के किनारे हरियाली को बढ़ावा देने के साथ जापानी मियावाकी पद्धति से सघन पौधरोपण किया गया।
ट्रैफिक जाम पर लगाम : ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट चिह्नित कर सड़कों का चौड़ीकरण कराने के साथ फ्लाईओवर बनवाए गए। इससे गाड़ियां खड़े रहने से होने वाला धुआं भी कम हुआ।
स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता : शहर के सभी घरों तक एलपीजी-पीएनजी की पहुंच हुई। 24 घंटे बिजली और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा दिया गया। इससे डीजल से चलने वाले जनरेटरों का इस्तेमाल बंद हुआ।
औद्योगिक प्रदूषण पर नकेल : शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की लगातार निगरानी के साथ सीपीसीबी मानकों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
मलबा प्रबंधन : निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के लिए अलग कलेक्शन सेंटर बनाने के साथ प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया। इससे खुले में मलबा फेंकने से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण लगा है।
ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार : कचरा प्रबंधन में सुधार से हवा की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
रक्षा मंत्री ने दी बधाई
पुरस्कार मिलने के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। रक्षा मंत्री ने बधाई देने के साथ शहर को और बेहतर बनाने के लिए काम करने के लिए कहा। महापौर ने बताया कि 1.50 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वायु प्रदूषण कम करने से जुड़े कामों पर ही खर्च होगी। महापौर ने बताया कि पेपर मिल कॉलोनी को वार्डों के श्रेणी में देश में पहला स्थान मिला है। इसके लिए भी 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है।
कोट
शिवरी प्लांट, मलबा निस्तारण प्लांट और स्वच्छ भारत मिशन के कामों ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के पहले पायदान पर आने में प्रमुख भूमिका अदा की। इसमें अन्य विभागों का भी सहयोग मिला है।
- डॉ. अरविंद राव, अपर नगर आयुक्त
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नंबर वन का स्थान बनाए रखने के लिए और भी काम किए जाएंगे। अलग-अलग इलाकों में तीन वन बनाए जा रहे हैं। इससे हवा और बेहतर होगी। पेड़ों की छंटाई और पार्कों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए अलग से हार्टिकल्चर वेस्ट प्लांट लगाया जाएगा। विस्तारित इलाके में सफाई, निर्माण व अन्य कामों को बेहतर बनाने पर काम होगा। कूड़ा और मलबा निस्तारण में कड़ी निगरानी जारी रहेगी। कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के काम को प्राथमिकता पर पूरा कराया जाएगा।
- गौरव कुमार, नगर आयुक्त
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अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव ने बताया कि हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए छह स्थानों पर स्टेशन बनाए गए हैं। इन्हें स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम से भी जोड़ा गया है। एयर प्यूरीफायर भी हवा की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं। डॉ. राव ने बताया कि रोड स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल से धूल कम हुई है। इसके अलावा अटल उदय वन व अन्य वाटिकाएं बनाकर लाखों पौधे भी लगाए गए हैं। बीते आठ वर्षों में करीब 1500 पार्कों का सुंदरीकरण कराया गया।
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अपर नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में 52 कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इससे कचरा ले जाने वाली गाड़ियों की संख्या 240 से 150 रह गई है। लखनऊ यूपी का पहला शहर बन गया है जहां रोजाना 2550 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। कोरोना काल में सैनिटाइजेशन के लिए नगर निगम ने चार एंटी स्मॉग गन और स्प्रिंकल वाले 20 वाटर टैंकर खरीदे थे। अब इनका इस्तेमाल सड़कों पर पानी के छिड़काव और पेड़ों की धुलाई में हो रहा है।
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इन प्रयासों ने सुधारी हवा की सेहत
सड़कों की धूल खत्म : सड़कों की सफाई के लिए 97 ई मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। इनमें पानी के जेट से धुलाई भी होती है। इससे पीएम10 के स्तर में कमी आई है। इसके अलावा 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का किया गया।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा : 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग पॉइंट बनाए गए। शहर में 140 ई बसें दौड़ रही हैं। डीजल गाड़ियों को हटाकर 1100 इलेक्ट्रिक वाहन कूड़ा कलेक्शन व उठान के काम में लगाए गए।
हरियाली को बढ़ावा : वर्टिकल गार्डन, सड़कों व गोमती के किनारे हरियाली को बढ़ावा देने के साथ जापानी मियावाकी पद्धति से सघन पौधरोपण किया गया।
ट्रैफिक जाम पर लगाम : ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट चिह्नित कर सड़कों का चौड़ीकरण कराने के साथ फ्लाईओवर बनवाए गए। इससे गाड़ियां खड़े रहने से होने वाला धुआं भी कम हुआ।
स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता : शहर के सभी घरों तक एलपीजी-पीएनजी की पहुंच हुई। 24 घंटे बिजली और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा दिया गया। इससे डीजल से चलने वाले जनरेटरों का इस्तेमाल बंद हुआ।
औद्योगिक प्रदूषण पर नकेल : शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की लगातार निगरानी के साथ सीपीसीबी मानकों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
मलबा प्रबंधन : निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के लिए अलग कलेक्शन सेंटर बनाने के साथ प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया। इससे खुले में मलबा फेंकने से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण लगा है।
ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार : कचरा प्रबंधन में सुधार से हवा की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
रक्षा मंत्री ने दी बधाई
पुरस्कार मिलने के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। रक्षा मंत्री ने बधाई देने के साथ शहर को और बेहतर बनाने के लिए काम करने के लिए कहा। महापौर ने बताया कि 1.50 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वायु प्रदूषण कम करने से जुड़े कामों पर ही खर्च होगी। महापौर ने बताया कि पेपर मिल कॉलोनी को वार्डों के श्रेणी में देश में पहला स्थान मिला है। इसके लिए भी 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है।
कोट
शिवरी प्लांट, मलबा निस्तारण प्लांट और स्वच्छ भारत मिशन के कामों ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के पहले पायदान पर आने में प्रमुख भूमिका अदा की। इसमें अन्य विभागों का भी सहयोग मिला है।
- डॉ. अरविंद राव, अपर नगर आयुक्त
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नंबर वन का स्थान बनाए रखने के लिए और भी काम किए जाएंगे। अलग-अलग इलाकों में तीन वन बनाए जा रहे हैं। इससे हवा और बेहतर होगी। पेड़ों की छंटाई और पार्कों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए अलग से हार्टिकल्चर वेस्ट प्लांट लगाया जाएगा। विस्तारित इलाके में सफाई, निर्माण व अन्य कामों को बेहतर बनाने पर काम होगा। कूड़ा और मलबा निस्तारण में कड़ी निगरानी जारी रहेगी। कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के काम को प्राथमिकता पर पूरा कराया जाएगा।
- गौरव कुमार, नगर आयुक्त