तेलीबाग सड़क हादसा: जलती रहीं चिताएं, आई नौवीं मौत की खबर
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तेलीबाग में सोमवार आधी रात हुए दर्दनाक हादसे में घायल तनिष्क (9) ने भी मंगलवार दोपहर दम तोड़ दिया था। उसकी मौत के बाद देर रात चचेरी बहन सुहानी ने भी दम तोड़ दिया।
तनिष्क के परिवार के सभी सदस्यों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था । दो अन्य घायल विकास और रोहन की हालत बेहद नाजुक है। उधर, तनिष्क के मामा पंकज ने वैन चालक के खिलाफ पीजीआई में लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी है।
हादसा सोमवार रात करीब साढ़े बारह बजे पीजीआई थाना क्षेत्र के रामभरोसे इंटर कॉलेज के पिछले गेट के पास हुआ था। निगोहां के उदयपुर निवासी योगेंद्र तिवारी (34) अपनी हांडा अमेज कार से साले पंकज सिंह के आलमबाग स्थित चंद्रा गेस्ट हाउस में आयोजित तिलक समारोह से लौट रहे थे तभी सामने से आ रही मारुति वैन से टक्कर हो गई।
लौट रहे थे एक शादी समारोह से
योगेंद्र के साथ पत्नी रुचि (28), बेटी अनुष्का (12), नौ वर्षीय बेटा तनिष्क व आठ साल की बेटी रिया के अलावा बड़े भाई वीरेंद्र तिवारी की बेटी सुहानी और दोस्त संजय सिंह व अनुपम सिंह बैठे थे। मारुति वैन सवार लोग पीजीआई के बिरौरा में आयोजित शादी समारोह से घर लौट रहे थे।
वैन काकोरी के किला मैदान निवासी इश्तखार (40) चला रहे थे जिन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। वैन सवार आठ लोग घायल हो गए थे जिन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।
वहां काकोरी के उदवतखेड़ा निवासी विकास (25) व रोहन (26) को गंभीर हालत में भर्ती करके बाकी को छुट्टी दे दी गई।
शायद ही कभी ये दिन भुला सकेंगे
निगोहां के उदयपुर के लोग मंगलवार का दिन शायद ही कभी भुला सकेंगे। पीजीआई में दर्दनाक हादसे ने योगेंद्र तिवारी का हंसता-खेलता परिवार खत्म होने का दर्द सबके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।
चंद घंटे पहले जिस बरामदे में योगेंद्र की बेटियां अनुष्का और रिया एक-दूसरे को छेड़ती हुई मां रुचि से शिकायतें करती थीं, आज उसी जगह पर सब शांत पड़ीं थीं। यहां से चंद कदम दूर रहने वाले निजी कंपनी के सुरक्षाकर्मी संजय सिंह के शव से चिपटकर उसकी पत्नी सोनल बिलख रही थी।
बीच-बीच में कुछ दूर से आती पापा उठो... उठो पापा... की चीखें लोगों के कलेजे को चीर रही थीं। यह चीखें थीं किसान अनुपम सिंह की सात साल की बेटी वर्तिका की। गांव के लोग समझ नहीं पा रहे थे किसकी मौत पर आंसू बहाएं, किसके आंसू पोंछे, किसे हिम्मत बंधाएं, किसे संभालें और किसकी अर्थी को कंधा दें।
एक चौखट पर रुकते तो दूसरे घर से आने वाली रोने-पीटने की आवाजें उन्हें विचलित कर देतीं। पूरा गांव सुबह से रो रहा था। हादसे की जानकारी पाकर आसपास के कई गांव के लोग भी उदयपुर आ गए।
चार चिताएं जल रही थीं, खबर आई तनिष्क की भी मौत हो गई
योगेंद्र और उसके परिवार के तीन सदस्यों की अर्थी उठाने के लिए कंधे कम पड़ गए थे। बड़े भाई वीरेंद्र और अरविंद की भी कुछ समझ में नहीं आया तो चेहरा ढककर फफक पड़े।
ग्रामीण चारों अर्थियों को कंधा देकर गांव के किनारे चिताओं तक ले गए। वीरेंद्र ने एक साथ चार चिताओं को अग्नि दी तो लोगों के कलेजे फट गए। एक बार फिर से चीख-पुकार मच गई।
इसी बीच खबर आई कि योगेंद्र के बेटे तनिष्क की भी ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। पहले से सुध-बुध खोए बैठे ग्रामीण और बेहाल हो गए। मौसा सोनू पांडेय, साला पंकज, संतोष शुक्ला, रवि सिंह सहित कुछ लोग तत्काल ट्रॉमा सेंटर भागे।
आनन-फानन शव का पोस्टमार्टम कराकर गांव लाया गया। तनिष्क का क्रियाकर्म बाद में हुआ। अनुपम सिंह और संजय सिंह की चिता भी पास ही में जलाई गई। गांव का आलम यह था कि किसी को रोटी खाने तक की सुध-बुध नहीं थी।