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राहत भरी खबरः कोरोना को हराने में बच्चे सबसे तेज, दस दिन में ठीक हो गए सभी

Sat, 23 May 2020 07:27 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 23 May 2020 07:27 PM IST
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Eight children were found corona positive in lucknow, recovered in ten days
प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना के खौफ के बीच एक राहत भरी खबर आई है कि संक्रमित होने वाले दस वर्ष से कम बच्चों के ठीक होने की दर सबसे अच्छी है। साथ ही इनमें वायरस का कोई लक्षण भी नहीं मिला। लखनऊ में पहली मरीज के रूप में भर्ती हुई कनाडा से लौटी डॉक्टर का ढाई साल का बेटा पॉजिटिव मिला था।

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पांच अप्रैल को केजीएमयू में भर्ती कराया गया मासूम 11 को डिस्चार्ज हो गया। इसी तरह 16 अप्रैल को सदर के आठ साल के बच्चे को मां के साथ राम सागर मिश्रा अस्पताल भेजा गया, जो 8 दिन में ठीक हो गया।
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तीन मई को नई बस्ती की बच्ची पॉजिटिव मिली, जिसकी छह दिन बाद रिपोर्ट निगेटिव आ गई। मछली मोहाल में पॉजिटिव मिली नौ साल की बालिका की भी दसवें दिन रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
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लखनऊ में तक आठ बच्चे पॉजिटिव मिले हैं, जिनकी उम्र 10 साल से कम थी। सदर निवासी एक बच्चे को छोड़कर सभी औसत आठ दिन में ठीक हो गए। चिकित्सा विशेषज्ञ इस पर नए सिरे से अध्ययन की तैयारी में हैं। बच्चों के रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं।

मजबूत इम्यूनिटी से भी नहीं दिख रहे लक्षण

अध्ययन में सामने आया है कि बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन लगातार होने से टी सेल इम्युनिटी सक्रिय रहती है। बीसीजी का टीका 12 साल की उम्र तक प्रतिरोधकता बनाए रखता है। चीन से आए सर्वे में कहा गया कि 10 साल से कम के बच्चों में खतरा बहुत कम पाया गया। मृत्यु दर 0.01 फीसदी पाई गई है। मजबूत इम्युनिटी से भी कोरोना के लक्षण बच्चों में नहीं दिख रहे हैं।  -डॉ. केके यादव, बाल रोग विभाग, लोहिया संस्थान  

बच्चों के ठीक होने की दर पूरी दुनिया में बेहतर है। इस पर विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। बच्चों का डाटा जुटा कर अध्ययन में देखा जाएगा कि भर्ती के दौरान बच्चे के मेडिकल पैरामीटर्स कैसे थे और उनमें क्या बदलाव आया। इससे पता चलेगा किवायरस का असर कितना था और ठीक होने में कम वक्त लगने की वजह क्या थी। -डॉ. डी. हिमांशु, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट, केजीएमयू  
 

ठीक होने की महिलाओं की दर

राजधानी में महिलाओं पर कोरोना का असर पुरुषों की अपेक्षा आधे से भी कम है। राजधानी में विभिन्न प्रदेशों के जमातियों समेत अब तक कुल करीब 334 पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। इसमें महिलाओं की संख्या 101 है।

यह करीब 30.14 फीसदी है। खास बात यह है कि महिला मरीजों की संख्या शुरुआती दौर में बेहद कम थी। इनके ठीक होने की दर 92 फीसदी है। ज्यादातर 14 दिन में ही ठीक हो गईं।

राजधानी में पहली पॉजिटिव मरीज पाई गई कनाडा से लौटने वाली डॉक्टर 10 दिन में और बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर 14 दिन में डिस्चार्ज हुई थीं। ठीक होने में सबसे ज्यादा समय करीब 26 दिन खुर्रमनगर निवासी युवती को लगा था। इस परिवार के तीन लोग पॉजिटिव आए थे।  
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