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Lucknow News: रंग ला रहीं कोशिशें, कम हो रही है शिशु मृत्यु दर
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भारतीय बाल अकादमी का 16वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन।
लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के मुताबिक, सरकार की कोशिशें रंग ला रही हैं और प्रदेश में शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों में कमी आ रही है। ब्रजेश पाठक शनिवार को शहीद पथ स्थित होटल में आयोजित भारतीय बाल अकादमी के 16वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सिक न्यूबार्न केयर यूनिट, एनआईसीयू जैसे वार्ड बनाए जा रहे हैं। गर्भ में किसी प्रकार की समस्या का पता लगाने के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है। इसके लिए निजी केंद्रों से भी करार किया गया है। अस्पतालों को मिल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से नवजातों का इलाज करना आसान हुआ है। इसके चलते नवजात और शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है।
12 तक लानी है शिशु मृत्यु दर
केजीएमयू में पीडियाट्रिक विभाग की डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि जागरूकता और सही समय पर इलाज से शिशु मृत्युदर में कमी आई है। कुछ समय पहले तक प्रदेश में एक हजार में से 30 शिशुओं की मृत्यु हो जाती थी। तमाम प्रयासों के बाद अब यह आंकड़ा 25 हो गई है। अगले दो साल में इसे 12 तक लाना है। उन्होंने कहा कि नवजातों के मामले में संक्रमण मृत्यु की बड़ी वजह है। नवजात शिशुओं को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। ऐसा करके हम उन्हें संक्रमण से बचा सकते हैं।
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डाॅ. फरीदी को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड
कार्यक्रम के दाैरान एरा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एमएमए फरीदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। अकादमी के कार्यक्रम में हर साल एक डॉक्टर को यह अवार्ड दिया जाता है।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सिक न्यूबार्न केयर यूनिट, एनआईसीयू जैसे वार्ड बनाए जा रहे हैं। गर्भ में किसी प्रकार की समस्या का पता लगाने के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है। इसके लिए निजी केंद्रों से भी करार किया गया है। अस्पतालों को मिल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से नवजातों का इलाज करना आसान हुआ है। इसके चलते नवजात और शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है।
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12 तक लानी है शिशु मृत्यु दर
केजीएमयू में पीडियाट्रिक विभाग की डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि जागरूकता और सही समय पर इलाज से शिशु मृत्युदर में कमी आई है। कुछ समय पहले तक प्रदेश में एक हजार में से 30 शिशुओं की मृत्यु हो जाती थी। तमाम प्रयासों के बाद अब यह आंकड़ा 25 हो गई है। अगले दो साल में इसे 12 तक लाना है। उन्होंने कहा कि नवजातों के मामले में संक्रमण मृत्यु की बड़ी वजह है। नवजात शिशुओं को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। ऐसा करके हम उन्हें संक्रमण से बचा सकते हैं।
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डाॅ. फरीदी को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड
कार्यक्रम के दाैरान एरा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एमएमए फरीदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। अकादमी के कार्यक्रम में हर साल एक डॉक्टर को यह अवार्ड दिया जाता है।