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बैंकों में हड़ताल से हाहाकार, नकदी के लिए भटक रहे लोग, एटीएम भी खाली

Fri, 01 Jun 2018 01:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 01 Jun 2018 01:31 AM IST
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effect of strike on atm of banks.
खाली पड़े एटीएम - फोटो : amar ujala

बैंक हड़ताल के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को प्रदेश भर की शाखाओं में करीब 13 हजार करोड़ रुपये फंसे होने से हालात और खराब हो गए। एटीएम खाली होने से लोग नकदी के लिए इधर से उधर भटकते दिखाई दिए।

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अकेले लखनऊ में ही करीब दो हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित होने से कारोबार पर गहरा असर पड़ा। वहीं, बैंक यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो संघर्ष और तेज करेंगे।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान हुई हड़ताल के दूसरे दिन भी कर्मचारियों और अधिकारियों ने ताले बंदकर बैंकों के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कैश, चेक, ऋण संबंधी, डिमांड ड्रॉफ्ट से संबंधित कोई काम नहीं होने से प्रदेश में करीब 13 हजार करोड़ का लेनदेन ठप रहा, जबकि बुधवार को 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ था। ऐसे में दो दिन में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन नहीं हो सका।
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कई संस्थाओं में नहीं जारी हुआ वेतन
महीने का आखिरी दिन होने से कई संस्थानों द्वारा वेतन जारी नहीं किया जा सका। वहीं, एटीएम खाली होने से लोगों नकदी के लिए इधर से उधर चक्कर काटने पड़े। दरअसल, बैंकों में पैसा जमा नहीं होने और ट्रेजरी में कैश नहीं आने से काफी दिक्कत हुई। बैंक अधिकारियों ने बताया कि करीब सात सौ शाखाओं से सीधे तौर पर प्रतिदिन 80 से 100 करोड़ रुपये आने से संतुलन बना रहता था, लेकिन अवकाश और हड़ताल से यह गड़बड़ा गया है। इसी वजह से तीस प्रतिशत एटीएम को सप्लाई नहीं पहुंच पाई है।

हड़ताल के पीछे यूनियनों का तर्क

effect of strike on atm of banks.

- पांच साल में एक बार 20 से 25 प्रतिशत की वेतनवृद्धि दी जाती है, इस बार सिर्फ दो प्रतिशत दी गई।
- केंद्रीय कर्मचारी के मुकाबले बैंककर्मियों को करीब 40 प्रतिशत न्यूनतम बेसिक वेतन मिलता है।
- नोटबंदी और नए नोट जारी करने में 10 से 12 घंटे रोज के बदले ओवर टाइम नहीं दिया गया।
- कर्मियों व अफसरों को म्यूचुअल फंड व इंश्योरेंस बेचने के लक्ष्य से निजी कंपनियों को हो रहा फायदा।
- राजनीतिक दबाव से जनता के रुपये में से बड़े उद्यमियों को दिलवाया जा रहा ऋण, पर नहीं लौटा रहे उद्यमी।
- कार्यक्षमता बढ़ाने का तर्क देकर छोटे सरकारी बैंकों का किया जा विलय, पर निजी बैंकों को दे रहे लाइसेंस।

‘उद्योगों को हजारों करोड़ देकर डुबोए ’
बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। यूएफबीयू के प्रदेश संयोजक वाईके अरोड़ा ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद वेतन में मात्र दो प्रतिशत की वृद्धि अन्याय है। इस हड़ताल से उन्हें दो दिन का वेतन तक कटवाना पड़ सकता है।

वहीं नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक यूनियंस के महामंत्री केके सिंह ने कहा कि आईबीए ने डूबे ऋण को घाटे की वजह बताया है और इसी आधार पर कम वेतन वृद्धि दी जा रही है। हजरतगंज स्थित एसबीआई के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव दिलीप चौहान, स्टेट बैंक अधिकारी संघ महामंत्री पवन कुमार, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक यूनियन उपाध्यक्ष वीके सेंगर, एसके संगतानी, एसडी मिश्र, डीपी वर्मा, सहित कई नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

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