Lucknow: शिक्षामंत्री का इस्तीफा युवाओं की जीत, बोले- नहीं चली सरकार की मनमर्जी, टॉफियां बांटी, मिठाई खिलाई
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने पर लखनऊ में युवाओं ने खुशी मनाई। टॉफियां और मिठाई बांटी। छात्रों ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना ही होगा।
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युवाओं के संघर्ष और नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा ) पेपर लीक पर हो रहे प्रदर्शनों के बीच शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही राजधानी के युवाओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इको गार्डन, लखनऊ विश्वविद्यालय और परिवर्तन चौक सहित प्रमुख स्थानों पर युवाओं ने एक-दूसरे को मिठाई व लड्डू खिलाकर बधाई दी।
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर आजाद के आह्वान पर इको गार्डन में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। देर शाम तक चले प्रदर्शन के बीच जैसे ही इस्तीफे की जानकारी मिली, युवाओं में खुशी की लहर दौड़ गई। चंद्रशेखर आजाद ने प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि यह युवाओं की नैतिक जीत है। चंद्रशेखर के आगमन पर युवाओं ने नीट पेपर लीक के विरोध में तरह-तरह के नारे लगाए। जब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर मिली तो सभी ने बैनर और पोस्टर लहराकर एक-दूसरे को टॉफियां बांटी और मिठाई खिलाकर अभिवादन किया।
छात्र संगठनों ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने मात्र इस्तीफा ही नहीं दिया है, बल्कि गड़बड़ी को भी स्वीकार किया है। जिसकी लापरवाही से दो दर्जन से अधिक युवाओं ने नीट पेपर लीक होने पर खुदकुशी कर ली थी। मंत्री के इस्तीफे से साफ संदेश मिला है कि युवा शक्ति बहुत कुछ कर सकती है। उधर, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और इस दौरान जीत के नारे लगाए।
विश्वविद्यालय की छात्रा नेहा सिंह ने कहा कि छात्रों ने संघर्ष किया, लाठियां खाईं, लेकिन हौसले को टूटने नहीं दिया और आंदोलन को जीवित रखा। यह एक बड़े आंदोलन की जीत है। दमनकारी सरकार पर यह करारा प्रहार है। छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि यदि आप गलत करेंगे, तो पद से इस्तीफा देना ही पड़ेगा।
छात्रों के आगे नहीं चली मनमर्जी
छात्र अब्दुल वहाब का कहना है कि छात्रों के आगे सरकार की मनमर्जी नहीं चली। सरकार पहले कहती थी कि मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन छात्रों की एकजुटता की वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। मंत्री का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि यदि कुछ गलत होगा, तो युवा एक स्वर में आवाज उठाएंगे।
सड़क से सदन तक हुआ आंदोलन
छात्रा सुजाता का कहना है कि सड़क से सदन तक आंदोलन हुआ, तब जाकर शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया। छात्रों ने दिन-रात प्रदर्शन जारी रखा, सड़कों पर रातें गुजारीं और घर-बार छोड़ दिया। सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा। इस जीत से यह संदेश गया है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करना ही पड़ेगा।
देशभर में आंदोलन से सरकार को झुकना पड़ा
छात्रा सोनी कुमारी का कहना है कि नीट पेपर लीक पर राजधानी सहित देशभर में उग्र आंदोलन हुए। जिन परिवारों के बच्चों ने जानें गंवाई थीं, उससे युवाओं में भारी आक्रोश था। सभी ने आंदोलन का समर्थन किया और पूरे देश में इसे जारी रखा। अंततः सरकार को झुकना ही पड़ा।