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अमिताभ के पास आय से अधिक सम्पत्ति, होगी जांच

Thu, 27 Aug 2015 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 27 Aug 2015 02:07 AM IST
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ED to investigate Amitabh Thakur's property.

लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने निलंबित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ जांच पूरी कर ली है। उन्होंने ठाकुर को आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराए जाने की सिफारिश की है।

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उन्होंने कहा है कि सतर्कता विभाग की जांच में सामने आए तथ्य और उनके (लोकायुक्त के) समक्ष पेश किए गए सुबूत अमिताभ ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त हैं।
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लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिव सतर्कता व प्रमुख सचिव गृह को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि उनके यहां अमिताभ ठाकुर के खिलाफ दाखिल शिकायत और सुबूतों को उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान द्वारा सात जनवरी 2012 की जांच में सम्मिलित कर जांच अविलंब पूरी कराई जाए तथा इसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाए।
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सतर्कता विभाग की लंबित जांच में लखनऊ व बाराबंकी जिलाधिकारियों की ओर से पेश अमिताभ ठाकुर व उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति के ब्यौरे को भी शामिल किया जाए। साथ ही राजीव कुमार बाजपेयी की शिकायत को भी इस जांच से जोड़ा जाए।

पीआईएल की ट्रेडिंग तो नहीं कर रहे अमिताभ ठाकुर?
वर्ष 2009 से 2014 के दौरान अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में 140 पीआईएल और नूतन ठाकुर ने 160 पीआईएल दायर की थी। हाईकोर्ट ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह भी देखा जाए कि अमिताभ ठाकुर कहीं पीआईएल की ट्रेडिंग तो नहीं कर रहे? यह भी पता किया जाए कि अमिताभ व नूतन द्वारा पीआईएल दायर करने के लिए आय का स्रोत क्या है?

एनजीओ के बैंक खाते खंगालें

ED to investigate Amitabh Thakur's property.

लोकायुक्त ने कहा है कि नेशनल आरटीआई फोरम, पीपुल्स फोरम, पीएमजी ट्रस्ट, इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑफ सोशल साइंस और आरटीआई फोरम नाम की एनजीओ से अमिताभ ठाकुर व नूतन ठाकुर किस तरह जुड़े हुए हैं, इसकी जांच कराई जाए। इन एनजीओ के बैंक खाते खंगाले जाएं और उनमें आने वाले धन के स्रोत को देखा जाए।

अनुपूरक शिकायतों का नहीं दिया जवाब
लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि निलंबित आईपीएस अफसर ने उनके खिलाफ 21 जुलाई 2015 को आई शिकायत का तो जवाब दिया था, पर बाद में दो अनुपूरक शिकायतें जो 27 व 31 जुलाई को आई थीं, का कोई जवाब नहीं दिया है।

लोकायुक्त एक्ट के तहत की जांच

अमिताभ ठाकुर द्वारा लोकायुक्त पर गैरकानूनी तरीके से जांच किए जाने के आरोप का लोकायुक्त ने जवाब दिया है। ठाकुर ने कहा था कि केंद्रीय अधिकारी आचरण नियमावली 1967 के प्रावधानों के तहत लोकायुक्त परिवार के सदस्यों की संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए उन पर दबाव नहीं बना सकते हैं। इस पर लोकायुक्त का कहना है कि वे लोकायुक्त एक्ट के तहत जांच करते हैं। उन्हें सर्विस एक्ट से कोई मतलब नहीं होता है।

अदालत ने नकार दी थी अमिताभ की अपील

ED to investigate Amitabh Thakur's property.

पूर्व में अमिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त द्वारा अपने खिलाफ की जाने वाली जांच को अदालत में चुनौती थी। अदालत ने उनके तर्क को नकारते हुए जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे।

इसी तरह अमिताभ ठाकुर के तर्क कि लोकायुक्त पांच वर्ष से पहले की संपत्ति के मामलों की जांच नहीं करा सकते हैं, लोकायुक्त ने कहा है इसीलिए उन्होंने यह जांच की कि वर्ष 2012 की सतर्कता जांच अब तक क्यों नहीं शुरू हो सकी?

मामले पर न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का कहना है कि मैंने 24 अगस्त को जांच रिपोर्ट तैयार करने के बाद 25 अगस्त को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ सचिव सतर्कता को दे दी थी। 26 अगस्त को रिपोर्ट की कॉपी प्रमुख सचिव गृह को भी भिजवा दी।

सीबीआई जांच से परेशानी नहीं : अमिताभ

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि लोकायुक्त ने खुद पार्टी बनकर पूरी तरह एकपक्षीय जांच में उन्हें आय से अधिक संपत्ति का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी जांच की सिफारिश की है। उन्हें सीबीआई जांच से कोई परेशानी नहीं होगी।

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