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आईजी अस्पताल : जिंदा को मृत बता रही है ईसीजी मशीन
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Sat, 09 Aug 2014 12:34 AM IST
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साढ़े चार माह पहले खरीदी गई थी तीन नई मशीनें खराब, मरीज परेशान
हर रोज होती हैं 30 से 40 ईसीजी
नई खरीदी गई मशीनों की क्वालिटी पर सवालिया निशान
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में मार्च-अप्रैल में खरीदी गई तीन ईसीजी मशीनों के खराब होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इनमें से एक मशीन तो ऐसी है, जो जीवित व्यक्ति की मृत होने की रिपोर्ट निकाल देती है। इस कारण मजबूरन कर्मचारियों ने इन्हें बंद कर दिया है। इनमें से दो मशीनें कैथल जिला अस्पताल में दी गई थी, जबकि एक को पूंडरी में अस्पताल में भेजा गया था।
एक मशीन से चल रहा काम
टेस्टिंग लैब के निकट बनाए गए ईसीजी रूम में एक ही मशीन के साथ लोगों की ईसीजी की जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पहले से पड़ी हुई विभाग की पुरानी चार मशीनों में से तीन मशीनें खराब थी। इन मशीनों की रिपेयर हो सकती थी। लेकिन रिपेयर नहीं करवाई गई। इसके लिए दो नई मशीनें भेज दी गई।ं इन नई मशीनों में से एक मशीन तो 5-6 ईसीजी करने के बाद जीवित व्यक्ति की मृत होने की रिपोर्ट निकाल कर दे देती है। इसी प्रकार से पुरानी मशीन के मुकाबले दूसरी नई मशीन का भी परिणाम अच्छा नहीं है। जिस कारण इन मशीनों से ईसीजी नहीं हो रही है। केवल एक ही मशीन से काम चलाया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल में हर रोज 30 से 40 ईसीजी होता है। वीरवार को विभिन्न विभागों में चयनित उम्मीदवारों के मेडिकल में ईसीजी जरूरी था। इस कारण शाम तक लगी रही। लोगों को ईसीजी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। यही हाल पूंडरी का भी है।
रिजल्ट अच्छे नहीं आ रहे हैं : इंचार्ज
पूंडरी में इंचार्ज डा. भटनागर का कहना है कि जो मशीन आई थी, उसे शुरू में प्रयोग किया गया था। लेकिन उसके रिजल्ट अच्छे नहीं आते, जिस कारण उसे अब प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है।
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एक लाख रुपये में खरीदी थी मशीनें
एसएमओ कार्यालय के अनुसार इन तीनों मशीनों की खरीद मार्च एवं अप्रैल माह में की गई थी। इन पर करीब एक लाख रुपये खर्च हुआ था। अब केवल साढ़े चार माह में ही यदि मशीनें खराब हो गई हैं तो इनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कोट
पता चला है कि नई खरीदी गई मशीनों में कुछ खराबी है। लेकिन मशीनरी है, कभी भी खराब हो सकती है। संबंधित कंपनी को सूचित कर दिया गया है। शीघ्र ही इन्हें ठीक करवाया जाएगा।
डा. आरडी चावला, एसएमओ, आईजी अस्पताल।
हर रोज होती हैं 30 से 40 ईसीजी
नई खरीदी गई मशीनों की क्वालिटी पर सवालिया निशान
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में मार्च-अप्रैल में खरीदी गई तीन ईसीजी मशीनों के खराब होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इनमें से एक मशीन तो ऐसी है, जो जीवित व्यक्ति की मृत होने की रिपोर्ट निकाल देती है। इस कारण मजबूरन कर्मचारियों ने इन्हें बंद कर दिया है। इनमें से दो मशीनें कैथल जिला अस्पताल में दी गई थी, जबकि एक को पूंडरी में अस्पताल में भेजा गया था।
एक मशीन से चल रहा काम
टेस्टिंग लैब के निकट बनाए गए ईसीजी रूम में एक ही मशीन के साथ लोगों की ईसीजी की जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पहले से पड़ी हुई विभाग की पुरानी चार मशीनों में से तीन मशीनें खराब थी। इन मशीनों की रिपेयर हो सकती थी। लेकिन रिपेयर नहीं करवाई गई। इसके लिए दो नई मशीनें भेज दी गई।ं इन नई मशीनों में से एक मशीन तो 5-6 ईसीजी करने के बाद जीवित व्यक्ति की मृत होने की रिपोर्ट निकाल कर दे देती है। इसी प्रकार से पुरानी मशीन के मुकाबले दूसरी नई मशीन का भी परिणाम अच्छा नहीं है। जिस कारण इन मशीनों से ईसीजी नहीं हो रही है। केवल एक ही मशीन से काम चलाया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल में हर रोज 30 से 40 ईसीजी होता है। वीरवार को विभिन्न विभागों में चयनित उम्मीदवारों के मेडिकल में ईसीजी जरूरी था। इस कारण शाम तक लगी रही। लोगों को ईसीजी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। यही हाल पूंडरी का भी है।
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रिजल्ट अच्छे नहीं आ रहे हैं : इंचार्ज
पूंडरी में इंचार्ज डा. भटनागर का कहना है कि जो मशीन आई थी, उसे शुरू में प्रयोग किया गया था। लेकिन उसके रिजल्ट अच्छे नहीं आते, जिस कारण उसे अब प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है।
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एक लाख रुपये में खरीदी थी मशीनें
एसएमओ कार्यालय के अनुसार इन तीनों मशीनों की खरीद मार्च एवं अप्रैल माह में की गई थी। इन पर करीब एक लाख रुपये खर्च हुआ था। अब केवल साढ़े चार माह में ही यदि मशीनें खराब हो गई हैं तो इनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कोट
पता चला है कि नई खरीदी गई मशीनों में कुछ खराबी है। लेकिन मशीनरी है, कभी भी खराब हो सकती है। संबंधित कंपनी को सूचित कर दिया गया है। शीघ्र ही इन्हें ठीक करवाया जाएगा।
डा. आरडी चावला, एसएमओ, आईजी अस्पताल।