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ई-रिक्शा चालक मुशीरूद्दीन बन गया आतंकी : पिछले साल लॉकडाउन के बाद ई-रिक्शा चलाना छोड़ कर ली थी बैटरी की दुकान
Mon, 12 Jul 2021 12:55 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 12 Jul 2021 12:55 AM IST
सार
पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उसने रिक्शा चलाना छोड़कर बैटरी की दुकान कर ली। मुशीरुद्दीन के संबंध आतंकी संगठन से बताए जा रहे हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
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लखनऊ
- फोटो : self
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विस्तार
एटीएस द्वारा गिरफ्तार मड़ियांव के सीतापुर निवासी मुशीरुद्दीन उर्फ मुशीर उर्फ राजू डेढ़ साल पहले तक ई-रिक्शा चलाता था। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उसने रिक्शा चलाना छोड़कर बैटरी की दुकान कर ली। मुशीरुद्दीन के संबंध आतंकी संगठन से बताए जा रहे हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
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मुशीरूद्दीन की पत्नी के मुताबिक सुबह करीब 11 बजे एटीएस कमांडो की टीम उसके घर पहुंची। इसके बाद सभी को एक किनारे कर दिया गया। पूरे घर में तलाशी ली गई। घर से एक प्रेशर कुकर लिया और मुशीरूद्दीन को हिरासत में ले लिया। पत्नी के मुताबिक सुबह हमलोग नाश्ता ही कर सके थे। तभी एटीएस की टीम ने छापा डाला था।
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45 मिनट तक मड़ियांव थाने में रोके रखी
मुशीर की पत्नी का आरोप है कि एटीएस उसे लेकर मड़ियांव थाने गई। वहां करीब 45 मिनट तक रोके रखा। इसके बाद परिवारीजनों को वापस भेजा। कुछ देर बाद वापस पहुंचे तो मुशीरूद्दीन नहीं था। उसे कहां लेकर गये इस बारे में पुलिस ने कुछ नहीं बताया। आरोप है कि एटीएस ने पूरे घर का सामान पलट दिया। घर के अंदर नया गैस चूल्हा, कुकर और बर्तन रखे थे। टीम ने एक कुकर लिया और चले गये। इसके अलावा बच्चों के स्कूल की किताबें और सभी पांच लोगों के पहचान पत्र लेकर चले गये।
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दो साल पहले खरीदा था मोहिबुल्लापुर का मकान
मुशीरूद्दीन मड़ियांव इलाके में रहने से पहले हसनगंज के खदरा में रहता था। दो साल पहले उसने खदरा का मकान बेच दिया। इसके बाद मोहिबुल्लापुर में मकान खरीदा। मकान अब भी पूरी तरह नहीं बना है। पिछले लॉकडाउन के दौरान तीन महीने तक ई-रिक्शा खड़ा था। जिसके बाद खराब हो गया। रोटी की तलाश में उसने कुछ लोगों से कर्ज लेकर बैटरी की दुकान खोली। इसके बाद वहीं बैठता था। परिवार में पत्नी, बूढ़ी मां और दो बच्चे हैं। हालांकि माली हालत ठीक नहीं है। लेकिन, उसके रहन-सहन पर कोई असर नहीं पड़ता था। अच्छे कपड़े पहनना, बातचीत के दौरान सोच समझकर शब्दों का प्रयोग, साथ ही खाने पीने के मामले में भी वह काफी सतर्क रहता था।