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दर्द निवारक हो या शक्तिवर्धक, रसीद न मांगो तो नकली व प्रतिबंधित सब दवा मिलेगी

Thu, 01 Aug 2019 05:20 PM IST
Amulya Rastogi चंद्रभान यादव अमर उजाला लखनऊ
चंद्रभान यादव अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 01 Aug 2019 05:20 PM IST
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duplicate and banned drugs are openly available in lucknow
medicine
ये केस तो बागनी हैं कि दवा कोई भी हो (नकली या प्रतिबंधित) सब मिलेगी, बस रसीद न मांगिए। राजधानी में प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। केजीएमयू सहित विभिन्न अस्पतालों के आसपास ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जा रही है। 
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हालांकि, रसीद मांगने पर दवाएं नहीं दी जाएंगी। वहीं, यह सब जानते हुए भी प्रशासन चुप्पी साधे है। इसका ही नतीजा है कि दो दिन पहले राजधानी में मेरठ का युवक दवाएं खपाने पहुंच गया था। वहीं, शक्तिवर्धक दवाओं के नाम पर जिम सेंटर भी दवा का क ारोबार कर रहे हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 344 दवाओं को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसमें फिक्स डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पेडर्म, ग्लूकोनार्म, ल्यूपिडीक्लाक्स, टैक्सीन जैसी दवाएं इसमें शामिल हैं। 
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इसी तरह कुछ ऐसी दवाएं हैं, जिनकी बिक्री तो हो सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह इन्हें नहीं खरीदा जा सकता है। हालांकि, इसके बावजूद ये दवाएं बाजार में धड़ल्ले से चल रही हैं। जानकारों की मानें तो मेलीट्रेसिन नामक दवा एंटीडिप्रेसेंट है। 

यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर बुरा प्रभाव डालती है। ज्यादातर देशों में इसे बैन किया जा चुका है। फिर भी यह राजधानी में बिक रही है। इसी तरह 2013 में प्रतिबंधित की गई दवा फ्लूपेंटिक्सॉल भी मिल जाती है। वहीं, लिवर पर बुरा असर डालने वाली प्रतिबंधित दवा निमेसुलाइड भी बाजार में अलग- अलग नाम से मिल जाती है।

दर्द निवारक और शक्तिवर्धक के तीन हजार उत्पाद

दवा कारोबारी के सूत्रों की मानें तो प्रतिबंधित दवाओं में सबसे ज्यादा कारोबार दर्द निवारक और शक्तिवर्धक दवाओं का है। इनके तीन हजार से ज्यादा उत्पाद बाजार में है। चूंकि शक्तिवर्धक दवाएं ज्यादातर लोग चोरी-छिपे खरीदते हैं। ऐसे में इनकी रसीद भी नहीं मांगते, जिससे इनका कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी कैप्सूल के साथ तेल, जैल बाजार में चल रहे हैं। इसमें ज्यादातर फिक्स डोज कंबिनेशन (एफडीसी) की दवाएं हैं। कुछ ऐसी भी दवाएं हैं, जो डोपिंग की श्रेणी में हैं। इन्हें भी चोरी-छिपे बाजार में उतारा गया है।

केस 1
पत्रकारपुरम चौराहे पर 15 रुपये लेकर दुकानदार ने तुरंत ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन दे दिया। हालांकि, रसीद मांगने पर भड़क गया। इसके बाद इंजेक्शन छीन लिया और कहा- आगे बढ़ो। रसीद लेनी हो तो पूरा डिब्बा खरीदो। किस काम के लिए खरीद रहे हो, मुझे मालूम है।

केस 2
केजीएमयू के बाहर शाहमीना रोड स्थित मेडिकल स्टोर पर डिप्रेशन की दवा सिटलोप्रान मांगने पर पूरा पत्ता थमा दिया गया। एक टैबलेट मांगने पर दुकानदार बोला, किसी तरह इंतजाम करके रखा है। बिना पर्चे के दे रहे हैं, फिर भी एक दवा मांग रहे हो। 10 टैबलेट का पूरा पत्ता 25 रुपये का है। रसीद मांगने पर कहा- यहां नहीं मिलेगी।रसीद लेनी है कि अंदर के मेडिकल स्टोर पर जाओ।

लंबे समय से राजधानी सहित आसपास हो रही थी सप्लाई

दो दिन पहले कार में प्रतिबंधित शक्तिवर्धक इंजेक्शन व अन्य दवाओं के साथ पकड़ा गया युवक लंबे समय से राजधानी में सप्लाई दे रहा था। उसने खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम को दवा आपूर्ति करने वाले अड्डे बताए हैं। यह भी बताया है कि वह शिमला, हरिद्वार, सोनीपत की कंपनियों से खुला माल खरीदता है। फिर उसे डिब्बे में पैक कर दुकानदारों तक पहुंचाता है। उसकी दवाएं सस्ती होती है। इससे दुकानदारों को अच्छा कमीशन मिल जाता है। वह राजधानी ही नहीं आसपास के जिलों में भी दवा आपूर्ति करता रहा है। उसके पास 20 दुकानदारों के चेक मिले हैं। इनके आधार पर संबंधित दुकानदारों से पूछताछ होगी।

एक ही नाम की कई दवाएं
एफएसडीए के असिस्टेंट कमिश्नर रमाशंकर ने बतया कि कई दवाएं एक ही नाम की है, लेकिन वह मनुष्य और जानवर के लिए अलग- अलग बनी है। उदाहरण के तौर पर ऑक्सीटोसिन को ही लें। यह प्रसव में भी इस्तेमाल होती है, लेकिन उसे गायनोकोलॉजिस्ट की सलाह और निगरानी में दिया जाता है। इसकी डोज भी अलग होती है।
 

एफडीसी को समझें

फिक्स डोज कंबिनेशन (एफडीसी) दवाओं का कॉकटेल है। इसमें एक ही खुराक में दो या इससे ज्यादा दवाएं मिली होती हैं। भारत में दवाओं का बाजार लगभग एक लाख करोड़ रुपये का है। बैन की जा रही दवाओं का हिस्सा इसमें करीब दो फीसदी है। इसके बाद भी इनका कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। राजधानी में करीब पांच हजार दवा कारोबारी हैं। अमीनाबाद स्थित दवा बाजार से रोजाना करीब 50 लाख का कारोबार होता है। 

प्रतिबंधित दवाओं की सूची जारी होने पर उसे मेडिकल स्टोर संचालकों तक भेजा जाता है। समय- समय पर जांच भी होती है। लेकिन जागरूकता की जरूरत है। ग्राहक जो भी दवा खरीदें, तत्काल रसीद मांगें। यदि दवा नकली या प्रतिबंधित होगी तो दुकानदार रसीद नहीं देगा। बिना रसीद वाली दवाओं का सेवन न करें। वहीं, जिस दवा पर लेबल, बैच नंबर, चेतावनी, डोज, बनाने वाली कंपनी का नाम, सेवन का तरीका आदि की जानकारी न हो, उसे प्रतिबंधित श्रेणी में मानकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- रमाशंकर, असिस्टेंट कमिश्नर, एफएसडीए
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