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उपभोक्ता फोरम ने नर्सिंग होम पर ठोका 55 हजार रुपए जुर्माना

Sat, 18 Jan 2014 12:28 PM IST
अतुल भारद्वाज/ अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 18 Jan 2014 12:28 PM IST
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due to unfair trade practice, pay fine

नर्सिंग होम की लापरवाही मरीज पर भारी पड़ी और उसकी अंगुली टेढ़ी हो गई। डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ करीब दस साल पहले जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम में वाद दायर किया गया।

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इलाज में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई और फोरम ने नर्सिंग होम पर 55 हजार रुपये जुर्माना ठोका है। इसमें नर्सिंग होम के आलावा डॉ. एम तौकीर रजा को वादी बनाया गया।
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दस साल पहले गोलागंज निवासी सुनील सिंह की मिडिल फिंगर में एक्सीडेंट के दौरान चोट लग गई थी। उसे नक्खास स्थित फहमीना नर्सिंग होम में 31 मई 2003 को दिखाया था।
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यहां केवल तीन दिन दवा खाने केलिए कहा गया जबकि अंगुली पूरी तरह कुचली हुई थी। तीन दिन बाद राहत नहीं मिलने पर फिर दिखाया गया। इस दौरान भी इलाज कर रहे डॉ. सलमान ने सब ठीक होने का आश्वासन दिया।

एक महीने तक परेशान होने के बाद सुनील को परिवारीजनों ने केजीएमयू में दिखाया। यहां प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि गलत प्रॉसिजर की वजह से अंगुली को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता था।

सात जुलाई 2003 को नौबत पूरी अंगुली काटने की आ गई। वादी के वकील एलपी यादव ने बताया कि सीएमओ की खुद की रिपोर्ट अंगुली के 40 प्रतिशत तक खराब होने की बात कह रही है।

हालात यह है कि बीच की अंगुली होने की वजह से वादी कोई भी काम अब पहले की तरह नहीं कर सकता। लिगामेंट खराब होने से अंगुली टेढ़ी हो गई है।

हालांकि केजीएमयू और सिविल केडॉक्टरों ने इसे लंबे समय तक इलाज के बाद कटने से बचा लिया।नोटिस मिलने के बाद नर्सिंग होम का कहना था कि मरीज करीब 12 घंटे के बाद पहुंचा।

वह पूरी तरह होश में नहीं था। अंगुली पूरी तरह से कुचली हुई थी। इलाज ठीक से किया गया। लिगामेंट इंजरी के लिए अस्पताल जिम्मेदार नहीं है।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद फोरम ने खुद माना कि डॉक्टर ने अपना काम ठीक से नहीं किया। प्रिस्क्रिप्शन स्लिप में कहीं भी एक्सरे कराने का जिक्र नहीं है। नर्सिंग होम की ‘अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस’ की वजह से मरीज को नुकसान हुआ।

यह है आदेश
उपभोक्ता फोरम प्रथम के अध्यक्ष विजय वर्मा के आदेश के मुताबिक, 10 साल से मरीज भटक रहा है। लंबे समय से अपने केस को लड़ने के लिए उसे समुचित हर्जाना और कानूनी खर्च मिलना चाहिए।


नर्सिंग होम को 50,000 रुपये शिकायतकर्ता को हर्जाना अदा करना होगा। वहीं विधिक व्यय के लिए 5,000 रुपये देने होंगे। 30 दिन तक हर्जाना नहीं देने के बाद 12 प्रतिशत की ब्याज दर चुकानी होगी।

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