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नशीला कफ सिरप : एबॉट कंपनी का खेल...सिंडीकेट की जमकर मदद की; 100 करोड़ का सिरप वापस लेकर शुभम को बेचा

Sat, 06 Dec 2025 07:52 AM IST
आकाश द्विवेदी अशोक मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अशोक मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 06 Dec 2025 07:52 AM IST
सार

रिपोर्टों के अनुसार, नशीले कफ सिरप सिंडीकेट की सप्लाई में कई फर्मों और बिचौलियों की भूमिका सामने आई है, जिसके बाद ईडी फार्मा कंपनी और संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर्स की जांच तेज कर रही है। 

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Drug-related cough syrup: Abbott company's game...helped the syndicate; took back syrup worth Rs 100 crore and
कफ सिरफ कांड - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

प्रदेश में नशीले कफ सिरप सिंडीकेट की करतूतों में एबॉट फॉर्मास्युटिकल कंपनी भी साथ दे रही थी। कंपनी ने सहारनपुर निवासी विभोर राणा को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा कोलकाता में गिरफ्तार किए जाने के बावजूद दो बार उसके करीबियों के नाम खोली फर्मों को सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बना दिया। 
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यूपी एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई के डर से जब यूपी और उत्तराखंड में उनका माल बिकना बंद हो गया तो कंपनी ने 100 करोड़ रुपये का सिरप वापस लेकर उसे रांची में शुभम जायसवाल की फर्म शैली ट्रेडर्स को बेच दिया।
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कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी

कफ सिरप सिंडीकेट की गहनता से जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी की इन करतूतों के बाद कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही कंपनी को नोटिस भेजकर सिंडीकेट की फर्मों को सिरप की आपूर्ति का आर्डर देने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा। 

दरअसल, कंपनी द्वारा विभोर राणा के करीबी अभिषेक शर्मा की दिल्ली की फर्म एबी फॉर्मास्युटिकल्स और शुभम जायसवाल की रांची की फर्म शैली ट्रेडर्स को दिया जाने वाला फेंसेडिल कफ सिरप तस्करी कर बांग्लादेश भेजा जा रहा था। 

इसकी पुष्टि पुलिस की जांच में हो चुकी है। इस सिरप का निर्माण हिमाचल प्रदेश के बद्दी में कंपनी द्वारा किया जा रहा था, जिसका उत्पादन दिसंबर, 2024 से बंद कर दिया गया था। 

ईडी के अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि कंपनी ने बीते 10 वर्षों में कितने सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बनाए थे। कंपनी ने किन लोगों को कफ सिरप बनाने का काम सौंपा था। दरअसल, कई जगहों पर छापों के दौरान सामने आया है कि छोटे परिसरों में भी अवैध तरीके से कफ सिरप बनाया जा रहा था। गाजियाबाद में तो पेंट की दुकान में इसकी फैक्ट्री मिली थी।

 

तीसरा सीए भी ईडी के रडार पर

इस प्रकरण में सिंडीकेट की मदद करने वाले तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट ईडी के रडार पर आ चुके हैं। वाराणसी के तुषार, विष्णु अग्रवाल के साथ अरुण सिंघल का नाम भी जांच के दायरे में आ चुका है। 

तुषार और विष्णु अग्रवाल पूर्वांचल में तस्करों की फर्मों का हिसाब-किताब देख रहे थे तो अरुण सिंघल सहारनपुर के विभोर राणा और उसके करीबियों की फर्मों का लेखा-जोखा संभाल रहा था। इन सभी ने फर्मों के अकाउंट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की, जिससे वह जांच एजेंसियों की नजर में नहीं आ सके।
 
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साल भर में महज एक बैठक

प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन भी संजीदा नहीं दिखा। बीते वर्ष जहां नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली एनकॉर्ड की चार बैठकों का आयोजन किया गया था, तो वहीं हालिया वर्ष में केवल एक बैठक ही हो सकी। 

इसमें भी विभागों की प्रवर्तन टीमों द्वारा कोडीनयुक्त कफ सिरप के सिंडीकेट का सुराग नहीं लगा पाने से उसकी कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि प्रवर्तन कार्रवाई के लिए कई विभागों की संयुक्त टीमों का गठन होता है।
 
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