{"_id":"68b4b863727e6621e20887b0","slug":"dr-shambhu-nath-merged-into-the-five-elements-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1363613-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: पंचतत्व में विलीन हुए डॉ. शंभुनाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: पंचतत्व में विलीन हुए डॉ. शंभुनाथ
विज्ञापन
पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ
लखनऊ। पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में शनिवार को आयोजित एक पुस्तक के लोकार्पण समारोह में वक्तव्य देते समय उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में साहित्यकार, रंगकर्मी और पूर्व व वर्तमान प्रशासनिक अफसर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. शंभुनाथ शनिवार को हिंदी संस्थान में मनोरमा श्रीवास्तव के उपन्यास ‘व्यथा कौंतेय की’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मृत्यु पर ही बोल रहे थे कि अचानक बोलते बोलते ही उनकी मौत हो गई। रामचरित मानस के अच्छे अध्येता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने आठ किताबें लिखी थीं। उनके जीवन पर भी किताबें लिखी गईं जिनमें से हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे की भी एक किताब शामिल है। वे नवपरिमल साहित्यिक संस्था के पहले अध्यक्ष थे।
रविवार को भैंसाकुंड श्मसान घाट पर उनके पुत्रों गौरव नाथ और अमितांशु नाथ ने अंतिम संस्कार किया। उनके दोनों ही बेटे बंगलूरू में रहते हैं। पिता के देहावसान की खबर सुनकर वे लखनऊ पहुंचे। अमितांशु इंजीनियर हैं तो गौरव पायलट हैं। अंतिम संस्कार के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र, सर्वेश अस्थाना, नरेंद्र भूषण, राजेंद्र शुक्ल राज, राजीव वर्मा वत्सल, सुभाष चंद्र रसिया, रामराज भारती, वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के अलावा वर्तमान व पूर्व प्रशासनिक अफसराें में अमित घोष, आलोक रंजन, जीबी पटनायक और अनिल पाठक समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. शंभुनाथ शनिवार को हिंदी संस्थान में मनोरमा श्रीवास्तव के उपन्यास ‘व्यथा कौंतेय की’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मृत्यु पर ही बोल रहे थे कि अचानक बोलते बोलते ही उनकी मौत हो गई। रामचरित मानस के अच्छे अध्येता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने आठ किताबें लिखी थीं। उनके जीवन पर भी किताबें लिखी गईं जिनमें से हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे की भी एक किताब शामिल है। वे नवपरिमल साहित्यिक संस्था के पहले अध्यक्ष थे।
विज्ञापन
रविवार को भैंसाकुंड श्मसान घाट पर उनके पुत्रों गौरव नाथ और अमितांशु नाथ ने अंतिम संस्कार किया। उनके दोनों ही बेटे बंगलूरू में रहते हैं। पिता के देहावसान की खबर सुनकर वे लखनऊ पहुंचे। अमितांशु इंजीनियर हैं तो गौरव पायलट हैं। अंतिम संस्कार के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र, सर्वेश अस्थाना, नरेंद्र भूषण, राजेंद्र शुक्ल राज, राजीव वर्मा वत्सल, सुभाष चंद्र रसिया, रामराज भारती, वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के अलावा वर्तमान व पूर्व प्रशासनिक अफसराें में अमित घोष, आलोक रंजन, जीबी पटनायक और अनिल पाठक समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ

पूर्व मुख्य सचिव और साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का रविवार को भैंसाकुंड स्थित विद्युत शवदाह गृह में अ
विज्ञापन