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भ्रष्टाचार में लिप्त डीपीओ निलंबित : वित्तीय अनियमितता व अधीनस्थों के उत्पीड़न के आरोप में हुई कार्रवाई

Thu, 06 Jan 2022 08:54 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 06 Jan 2022 08:54 PM IST
सार

मनोज राव को गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितिता के अलावा अधीनस्थों के उत्पीड़न की शिकायतों की वजह से निलंबित किया गया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया है।

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DPO involved in corruption suspended: Action taken on charges of financial irregularities and harassment of subordinates

विस्तार

लंबे समय से भ्रष्टाचार में लिप्त प्रयागराज से जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज राव को सरकार ने आखिरकार निलंबित कर दिया है। मनोज राव को गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितिता के अलावा अधीनस्थों के उत्पीड़न की शिकायतों की वजह से निलंबित किया गया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया है। मनोज को डीएम कौशांबी के कार्यालय से संबद्ध करते हुए उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए अपर निदेशक वित्त अधिकारी दिलीप कुमार अग्रवाल और उप निदेशक कमलेश गुप्ता को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। गोंडा व प्रयागराज में तैनाती के दौरान मनोज पर कई तरह के गंभीर आरोप लगे थे। उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है, लेकिन अपनी पहुंच के बल पर उन्होंने कई वर्षों से जांच को दबाए रखा।

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अमर उजाला ने मनोज राव के भ्रष्टाचार का बहुत पहले ही खुलासा किया था। इसके बाद इनके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू हुई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद  शासन ने मनोज को निलंबित करते हुए आरोपपत्र भी दिया है। इसमें मनोज द्वारा वित्तीय लाभ लेने के लिए परियोजनाओं से संबद्ध वाहनों का अवैध तरीके से भुगतान करने के अलावा अधीनस्थ बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) स्मृति कुमार सिंह, अजय कुमार, विमलेश कुमार व सोम प्रकाश तिवारी आदि के खिलाफ दुर्भावना पूर्वक कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि देने, निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई करने का आरोप है। इसके अलावा सीडीपीओ अरुण कुमार पांडेय की प्रोन्नति रोकने के उद्देश्य से उनके खिलाफ भी दुर्भावना पूर्वक प्रतिकूल प्रविष्टि देकर उनकी गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट निदेशालय भेजने का आरोप है। जबकि इनके द्वारा ही पांडेय को उतृष्ट प्रविष्टि दी गई थी और निदेशक आईसीडीएस व सीडीओ द्वारा इस प्रविष्टि को मंजूरी दी गई थी।
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इन आरोपों की प्रांरभिक जांच में मनोज राव द्वारा अधीनस्थ सभी सीडीपीओ के खिलाफ की गई कार्रवाई दुर्भावना से प्रेरित और गैर कानूनी साबित हुई है। इस पर शासन ने कड़ा रूख अपनाते हुए उन्हें निलंबित करने के आदेश जारी कर उन पर लगे आरोपों की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि गोंडा में तैनाती के दौरान भी मनोज राव पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगे थे। इसी प्रकार पिछले पांच से प्रयागराज में तैनाती में भी कुंभ में टेंट लगाने आदि के काम में भी 35 लाख से अधिक धनराशि का घोटाला करने की भी शिकायत शासन को मिली थी. जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा भी पोषाहार वितरण आदि के हुए घालमेल की शिकायत पर मनोज राव के खिलाफ पिछले कई साल से विजिलेंस जांच चल रही है। लेकिन अपनी ऊंची पहुंच की वजह से जांच की गति धीमी है। 

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