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कोरोना से नहीं, पर संसाधनों की कमी से डर गए थे डॉक्टर

Mon, 21 Mar 2022 01:51 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Mar 2022 01:51 AM IST
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Doctors were afraid of lack of resources, not corona
केजीएमयू ने चार सौ डाक्टरों को लेकर किया अध्ययन। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
कोविड-19 के हालात ने सामान्य लोगों के साथ ही डॉक्टरों को भी झकझोरकर रख दिया था। इंफ्रास्ट्रक्चर और जरूरी चीजों की कमी से डॉक्टरों की भी हालत खराब हो गई थी।
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महामारी के दौरान देश के विभिन्न अस्पतालों में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने एक अध्ययन किया है।
इसके अनुसार संसाधनों की कमी उन पर काफी हावी हो गई थी। यहां तक कि नौ फीसदी डॉक्टर नौकरी छोड़ने के बारे में भी सोेचने लगे थे, जबकि 23 फीसदी डॉक्टर ड्यूटी से बचना चाहते थे।
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केजीएमयू में सुयोग सिंधू, मेधावी गौतम और नीरज कुमार अग्रवाल ने यह अध्ययन किया। महामारी के दौरान हुए अध्ययन में देशभर के चार सौ डॉक्टरों को शामिल किया गया।
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इनमें से 49 फीसदी डॉक्टर सरकारी संस्थानों में कार्यरत थे। इनमें से 256 डॉक्टरों ने अपना जवाब दिया। ज्यादातर डॉक्टर 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के थे।
महामारी के दौरान ड्यूटी करते वक्त इन डॉक्टरों में से करीब 60 फीसदी को इलाज के दौरान प्रताड़ना या फिर भेदभाव झेलना पड़ा।
यह बात भी सामने आई कि डॉक्टर पेशे के प्रति वफादारी के तहत ड्यूटी करना चाहते थे, लेकिन बच्चों की परवरिश या घर की जिम्मेदारियों ने विचलित कर दिया था।
दूसरी लहर के दौरान किया गया अध्ययन
यह अध्ययन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल-जून 2020 के दौरान किया गया। यही वह समय था जब देश में ऑक्सीजन और दवाओं की मारामारी थी। संक्रमण से सबसे ज्यादा मौतें भी इसी समय अंतराल में हुईं। अध्ययन के दौरान गूगल फॉर्म का उपयोग किया गया और इसे व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रसारित किया गया। गूगल फॉर्म में कुल 49 सवाल थे। इस अध्ययन के लिए इनमें से 14 सवालों को आधार बनाया गया। इनसे मिले जवाब के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। इसे जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च में प्रकाशित किया गया है।

पीपीई किट की कमी ने किया था परेशान
अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि पीपीई किट की समस्या ने भी डॉक्टरों को परेशान किया। पीपीई किट की कमी से परिवारवालों के संक्रमित होने, बच्चों की देखभाल, घर के प्रमुख होने की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों ने भी डॉक्टरों में भय का माहौल पैदा किया। इसके अलावा डॉक्टरों के घर से कार्यस्थल की दूरी, बीमारी और पर्याप्त संसाधन न होना कोविड ड्यूटी की राह में सबसे बड़ी बाधा साबित हुए।
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